राजस्थान के उदयपुर शहर स्थित हिरण मगरी सेक्टर-11 में एक रिहायशी मकान के अंदर बेहद अनोखा और दुर्लभ सफेद कोबरा पाए जाने से हड़कंप मच गया। घर के कमरे में अचानक नजर आए इस जहरीले सांप को देखकर परिवार के लोग घबरा गए और उन्होंने बिना देरी किए वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर को इसकी सूचना दी। खबर मिलते ही रेस्क्यू सेंटर के संभागीय अध्यक्ष डॉ. चमन सिंह चौहान अपनी विशेषज्ञ टीम के साथ मौके पर पहुंचे। जब टीम ने कमरे का गहन निरीक्षण किया, तो अलमारी के निचले हिस्से में हलचल महसूस हुई। इसके बाद अलमारी को बेहद सतर्कता के साथ खिसकाया गया, तो उसके नीचे सफेद रंग का एक छोटा कोबरा बैठा हुआ मिला।
दुर्लभ सफेद कोबरा का सुरक्षित रेस्क्यू
डॉ. चमन सिंह चौहान और उनकी टीम ने पूरी सावधानी के साथ इस जहरीले सांप को काबू में किया और उसे सुरक्षित तरीके से पकड़ लिया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान टीम ने सुरक्षा के सभी प्रोटोकॉल का पालन किया ताकि सांप या किसी इंसान को कोई नुकसान न पहुंचे। डॉ. चौहान के मुताबिक आमतौर पर भारतीय कोबरा गहरे भूरे या पूरी तरह काले रंग के होते हैं। हजारों सांपों की आबादी में से किसी एक में ऐसा दुर्लभ सफेद रंग देखने को मिलता है। इस तरह के दुर्लभ जीवों का सामने आना वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों के लिए भी कौतूहल का विषय बना रहता है।
त्वचा के रंग में बदलाव का वैज्ञानिक कारण
सांप के इस असामान्य रंगत के बारे में वैज्ञानिक व्याख्या करते हुए डॉ. चौहान ने बताया कि शरीर के रंग में परिवर्तन का मुख्य कारण आनुवंशिक यानी जेनेटिक बदलाव होता है। जब किसी जीव के शरीर में मेलेनिन पिगमेंट का निर्माण कम हो जाता है या पूरी तरह बंद हो जाता है, तब उसकी त्वचा, शल्कों और रंगत में प्राकृतिक बदलाव आ जाता है। हालांकि, यह सफेद कोबरा पूरी तरह से एल्बिनो नहीं था।
डॉ. चौहान ने आगे स्पष्ट किया कि आमतौर पर जो सांप पूरी तरह एल्बिनो प्रजाति के होते हैं, उनकी आंखें लाल या हल्की भूरी रंग की होती हैं। इसके विपरीत, हिरण मगरी से रेस्क्यू किए गए इस सफेद कोबरा की आंखें पूरी तरह गहरी काली थीं। काली आंखों का होना इस सांप को अन्य एल्बिनो सांपों की तुलना में अत्यधिक अनोखा और आकर्षक बनाता है।
प्राकृतिक जंगल में अस्तित्व का संकट
प्राकृतिक पर्यावरण और जंगलों में ऐसे विशिष्ट रंग वाले वन्यजीवों के लिए जीवित रहना बहुत बड़ी चुनौती साबित होता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सफेद या हल्का रंग होने की वजह से ये सांप प्राकृतिक झाड़ियों, सूखे पत्तों या मिट्टी में आसानी से छिप नहीं पाते। इनके शरीर का रंग इन्हें छिपाने के बजाय उजागर कर देता है।
इस वजह से चील, बाज और अन्य शिकारी पक्षियों की नजर इन पर बहुत दूर से ही पड़ जाती है। शिकारी जीवों का आसान शिकार बनने के कारण जंगल में इनके लंबे समय तक जीवित रहने की संभावना बेहद कम होती है। रेस्क्यू टीम ने सांप का स्वास्थ्य परीक्षण करने के बाद इसे मानव आबादी से दूर एक सुरक्षित प्राकृतिक जंगल में सफलतापूर्वक छोड़ दिया है।
सांप दिखने पर क्या करें: विशेषज्ञ की अपील और हेल्पलाइन नंबर
इस घटना के बाद वाइल्ड एनिमल रेस्क्यू सेंटर के संभागीय अध्यक्ष डॉ. चमन सिंह चौहान ने आम नागरिकों से एक विशेष अपील जारी की है। उन्होंने कहा कि यदि किसी घर, दुकान या आसपास की जगह पर सांप दिखाई दे, तो उसे बिल्कुल भी नुकसान न पहुंचाएं। सांप को खुद से पकड़ने, छेड़ने या मारने का प्रयास करना जानलेवा साबित हो सकता है।
ऐसी किसी भी परिस्थिति में तुरंत वन विभाग या प्रशिक्षित वन्यजीव रेस्क्यू टीम से संपर्क करना चाहिए। उदयपुर शहर के निवासियों के लिए उन्होंने आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। आपात स्थिति में नागरिक डॉ. चमन सिंह चौहान से उनके मोबाइल नंबर 9828058158 या 7737470311 पर संपर्क करके सहायता प्राप्त कर सकते हैं।



















