मध्य प्रदेश में वन्यजीव संरक्षण की दिशा में एक अहम उपलब्धि हासिल करते हुए कान्हा के जंगलों में जंगली भैंसों को अब अधिक विस्तृत दायरे में विचरण करने की अनुमति मिल गई है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने बालाघाट जिले के गढ़ी सुपखार पहुंचकर पुनर्स्थापन अभियान के तहत इन जंगली भैंसों को लगभग 17 हेक्टेयर में फैले बड़े बाड़े में औपचारिक रूप से छोड़ा। इस दल में कुल 8 वन्य प्राणी शामिल हैं, जिनमें 6 मादा और 2 नर भैंसे हैं। यह कदम इन दुर्लभ जीवों को प्राकृतिक परिवेश में पूरी तरह ढालने की रणनीति का हिस्सा है।
क्वारंटाइन अवधि पूरी होने के बाद बड़ा बाड़ा बना नया बसेरा
इससे पहले इन सभी जंगली भैंसों को निगरानी और स्वास्थ्य परीक्षण के उद्देश्य से एक छोटे बाड़े में रखा गया था। लगभग 1 हेक्टेयर क्षेत्र में बने इस बाड़े में पिछले 4 महीने से इन सभी की विशेष निगरानी और क्वारंटाइन की प्रक्रिया चल रही थी। विशेषज्ञों और वन विभाग की टीम द्वारा स्वास्थ्य मानकों की पुष्टि किए जाने के बाद अब इन्हें 17 हेक्टेयर के बड़े बाड़े में स्थानांतरित किया गया है। यह व्यवस्था इसलिए की गई है ताकि वे प्राकृतिक परिस्थितियों के अनुसार सुरक्षित माहौल में अपनी संख्या और गतिविधियों को सहजता से बढ़ा सकें।
असम से 2200 किमी का सफर और एक सदी बाद वापसी
मध्य प्रदेश के वनों में जंगली भैंसों की यह वापसी करीब 100 साल के लंबे अंतराल के बाद दर्ज की गई है। इस पुनर्बसाहट के लिए असम के मुख्यमंत्री हेमंत बिस्वा के सहयोग से इन्हें लगभग 2200 किलोमीटर की दूरी तय करके लाया गया था। कान्हा का जंगल पहले से ही बारहसिंगा और बाघों की मजबूत मौजूदगी के लिए पूरी दुनिया में पहचाना जाता है, और अब जंगली भैंसों के जुड़ने से यहां की जैव विविधता और समृद्ध हुई है। पुनर्स्थापन के पहले चरण में कान्हा के सुपखार क्षेत्र में 28 अप्रैल को 4 भैंसें और इसके बाद 9 मई को 4 भैंसें लाई गई थीं, जिन्हें शुरुआत में छोटे बाड़े में रखा गया था। अब दूसरे चरण के तहत इन्हें बड़े बाड़े में विस्थापित कर दिया गया है।
वन्यजीव इकोसिस्टम और नए टाइगर रिजर्व का विस्तार
मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इस अवसर पर राज्य में लुप्तप्राय वन्य जीवों के संरक्षण के रोडमैप का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि हाल ही में 7 अक्टूबर को नौरादेही को रानी दुर्गावती के नाम से नया टाइगर रिजर्व घोषित किया गया है, जहां चीतों का तीसरा बसेरा तैयार किया गया है। सरकार की योजना है कि राज्य में एक-एक कर विभिन्न वन्य प्राणियों का संतुलित इकोसिस्टम तैयार किया जाए, ताकि जो वन्य प्राणी अतीत में जंगलों से लुप्त हो चुके हैं, उन्हें पुनः स्थापित किया जा सके। बालाघाट का यह प्रसिद्ध टाइगर रिजर्व वैश्विक स्तर पर वन्यजीव प्रेमियों के बीच अपनी खास पहचान रखता है।
सुरक्षा व्यवस्था और बालाघाट के विकास पर फोकस
क्षेत्र के प्रशासनिक और सामाजिक माहौल का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बालाघाट को नक्सल मुक्त कर दिया गया है और अब यह क्षेत्र विकास के नए पैमाने तय कर रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि पिछले 5 महीनों में वे खुद 4 बार इस इलाके का दौरा कर चुके हैं। नक्सली गतिविधियों के खात्मे के साथ ही प्रशासन अब जंगलों में दुर्लभ वन्यजीवों के संरक्षण और स्थानीय बुनियादी ढांचे को तेजी से आगे बढ़ाने के काम में जुटा हुआ है।



















