मध्य प्रदेश के शाजापुर जिले की कालापीपल विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत हन्नुखेड़ी गांव में वन्यजीव प्रबंधन का एक बड़ा और विशेष अभियान शुरू हुआ है। खेतों में फसलों को नुकसान से बचाने और कृष्णमृगों को सुरक्षित प्राकृतिक आवास मुहैया कराने के उद्देश्य से यह कार्रवाई की जा रही है। 10 अक्टूबर से शुरू हुए इस बचाव अभियान के शुरुआती दिन ही करीब 97 कृष्णमृगों को सुरक्षित पकड़ा गया। हवा में उड़ते हेलीकॉप्टर और जमीन पर घेराबंदी की संयुक्त रणनीति के तहत पकड़े गए इन सभी वन्यजीवों को अब कुनो अभयारण्य केंद्र में स्थानांतरित करने की योजना तैयार की गई है। यह पूरा अभियान 31 अक्टूबर तक लगातार जारी रहने वाला है।
हेलीकॉप्टर और बोमा तकनीक से हांका लगाने का अभियान
हन्नुखेड़ी गांव और आसपास के ग्रामीण इलाकों में शनिवार सुबह अचानक हेलीकॉप्टर की तेज आवाज गूंजी, जिससे स्थानीय ग्रामीणों में भारी उत्सुकता देखने को मिली। खेतों के ऊपर मंडराते हेलीकॉप्टर और नीचे तेजी से दौड़ते हिरणों के झुंड को एक सुरक्षित दिशा में मोड़ने का काम बेहद तालमेल के साथ किया गया। इस पूरी प्रक्रिया में अफ्रीकी वन्यजीव प्रबंधन की प्रसिद्ध बोमा तकनीक अपनाई जा रही है। इस पद्धति में फनल जैसी संरचना बनाकर जानवरों को बिना किसी शारीरिक चोट या अत्यधिक तनाव के एक बाड़े की तरफ हांका जाता है।
दक्षिण अफ्रीका से आई तकनीकी विशेषज्ञों की टीम इस पूरे बचाव अभियान की निगरानी कर रही है। हेलीकॉप्टर की मदद से दूर-दराज के खेतों में फैले झुंडों की पहचान की जाती है और फिर उन्हें योजनाबद्ध तरीके से बाड़े की ओर बढ़ाया जाता है। जमीन पर तैनात बचाव दल के सदस्य यह सुनिश्चित करते हैं कि कोई भी जानवर भटक कर रिहायशी इलाकों की तरफ न जाए या कंटीले तारों में न उलझे।
शुरुआती सफलता के बाद दूसरे दिन भी जारी रही घेराबंदी
अभियान के पहले ही चरण में 97 कृष्णमृगों की सफल पकड़ ने इस तकनीकी प्रयोग की उपयोगिता साबित कर दी है। इसके बाद रविवार सुबह होते ही विशेषज्ञ दल ने पुनः आसपास के इलाकों में अपनी गतिविधियां तेज कर दीं। सुबह से ही हेलीकॉप्टर ने हन्नुखेड़ी के सीमावर्ती खेतों के ऊपर उड़ान भरकर कृष्णमृगों को हांकने का काम शुरू किया। मैदानी स्तर पर मौजूद दल हिरणों को सुरक्षित घेरे में लेने के लिए पूरी तत्परता से जुटा रहा। रेस्क्यू किए गए इन सभी कृष्णमृगों को पहले से तय एक सुरक्षित स्थान पर रखा जा रहा है, जहां उनकी प्राथमिक स्वास्थ्य जांच और देखभाल के बाद उन्हें कुनो अभयारण्य केंद्र भेजने की अंतिम व्यवस्था की जाएगी।
विधानसभा में उठे सवाल के बाद धरातल पर उतरी कार्ययोजना
कालापीपल क्षेत्र में फसलों को लगातार हो रहे नुकसान को देखते हुए स्थानीय विधायक घनश्याम चंद्रवंशी ने यह मामला मध्य प्रदेश विधानसभा के पटल पर उठाया था। उन्होंने किसानों की समस्या को रेखांकित करते हुए कृष्णमृगों को सुरक्षित अन्यत्र स्थानांतरित करने का अभियान शुरू करने की मांग रखी थी। शासन स्तर पर अनुमति और तकनीकी योजना बनने के बाद 10 अक्टूबर से हन्नुखेड़ी में औपचारिक रूप से यह अभियान प्रारंभ हुआ।
शनिवार को विधायक घनश्याम चंद्रवंशी स्वयं मौके पर पहुंचे और चल रहे कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने दक्षिण अफ्रीका से आए तकनीकी दल और स्थानीय अधिकारियों से बातचीत कर पहले दिन 97 कृष्णमृगों के सुरक्षित रेस्क्यू पर संतोष जताया। इसके साथ ही उन्होंने आगामी दिनों में होने वाले रेस्क्यू कार्यों और हिरणों को कुनो ले जाने की परिवहन व्यवस्था के बारे में भी विस्तृत जानकारी ली।
वन्यजीव संरक्षण और फसल सुरक्षा का संतुलन
हन्नुखेड़ी में संचालित यह कार्य केवल एक साधारण बचाव अभियान नहीं है, बल्कि यह मानव और वन्यजीव सह-अस्तित्व के टकराव को आधुनिक तकनीक से सुलझाने का एक बड़ा उदाहरण बन रहा है। भारत के भीतर कालापीपल विधानसभा क्षेत्र में इस प्रकार का अंतरराष्ट्रीय स्तर का बोमा रेस्क्यू अभियान दूसरी बार क्रियान्वित किया जा रहा है। आधुनिक साधनों और अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता के समन्वय से चलाए जा रहे इस प्रयास से एक तरफ जहां किसानों की खड़ी फसलों को होने वाला नुकसान रुकेगा, वहीं दूसरी ओर कृष्णमृगों को कुनो के रूप में एक विशाल और अनुकूल पर्यावास मिल सकेगा। अब प्रशासन और ग्रामीणों की नजरें 31 अक्टूबर तक चलने वाले इस चरणबद्ध अभियान के अगले चरणों पर टिकी हैं।
























