मध्य प्रदेश में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी कार्रवाई के तहत इंदौर पुलिस में तैनात हेड कांस्टेबल फिरोज खान के खिलाफ भारी अनुपातहीन संपत्ति का खुलासा हुआ है। लोकायुक्त की विशेष जांच टीमों ने जब उनके देवास स्थित आवास समेत कुल 15 ठिकानों पर एक साथ दबिश दी, तो सामने आई संपत्तियों के ब्योरे ने जांच अधिकारियों को भी हैरान कर दिया। अब तक के तलाशी अभियान में प्रधान आरक्षक के पास 29 करोड़ रुपये से अधिक की अचल संपत्ति होने के दस्तावेज मिले हैं। अधिकारियों का कहना है कि दोनों शहरों में तलाशी अभियान जारी है और आगे संपत्ति का यह आंकड़ा और बड़ा हो सकता है।
15 ठिकानों पर लोकायुक्त की एक साथ छापेमारी
लोकायुक्त इंदौर और लोकायुक्त उज्जैन की संयुक्त टीमों ने 14 अक्टूबर की सुबह फिरोज खान के देवास स्थित निवास और उनसे जुड़े अन्य ठिकानों पर सुनियोजित तलाशी अभियान शुरू किया। जांच के दायरे में कुल 15 अलग-अलग ठिकाने शामिल किए गए। शुरुआती जांच में सामने आया कि प्रधान आरक्षक का कुल व्यय लगभग ₹12.95 करोड़ दर्ज किया गया है। यह राशि उनकी ज्ञात और वैध आय से करीब ₹11.01 करोड़ अधिक बैठती है। अनुपातहीनता के लिहाज से यह उनकी वास्तविक वैध आमदनी से करीब 568 प्रतिशत अधिक पाई गई है।
33 अचल संपत्तियों और 21 बैंक खातों का खुलासा
दस्तावेजों की पड़ताल के दौरान कुल 33 अचल संपत्तियों की जानकारी सामने आई है, जिनका मौजूदा बाजार मूल्य करीब ₹29.73 करोड़ आंका गया है। इसके अलावा जांच में एक परिचित महिला रोशनी वर्मा के नाम पर दर्ज संपत्तियों, कई कंपनियों और विभिन्न कारोबारी फर्मों से जुड़े लेन-देन की कड़ियां भी मिली हैं। मामले में लगभग 21 बैंक खातों का पता चलने के बाद अधिकारियों ने किसी भी संभावित वित्तीय हेरफेर को रोकने के लिए इन सभी खातों से रकम निकासी पर तत्काल रोक लगा दी है। फिलहाल देवास और इंदौर में संबंधित परिसरों पर जांच की प्रक्रिया जारी है।
पुलिस पृष्ठभूमि से जुड़ा है परिवार
जांच के बीच फिरोज खान की पारिवारिक पृष्ठभूमि से जुड़े तथ्य भी सामने आए हैं। उनके पिता गफ्फार भी पुलिस महकमे में अपनी सेवाएं दे चुके थे और सब इंस्पेक्टर के पद से सेवानिवृत्त हुए थे, जिनका अब निधन हो चुका है। इसके अलावा फिरोज के जुड़वां भाई जावेद भी पुलिस विभाग में कार्यरत हैं और इस समय आगर मालवा में पदस्थ हैं। विभाग से मिले रिकॉर्ड के मुताबिक, फिरोज खान पिछले कई दिनों से बिना ड्यूटी के अवकाश पर चल रहे थे। पुलिस विभाग में एक प्रधान आरक्षक के स्तर पर इतनी भारी संपत्ति अर्जित करने के मामले ने सभी को चौंका दिया है।























