मध्य प्रदेश के कई महत्वपूर्ण जिलों की सड़क कनेक्टिविटी को नया आयाम देने के लिए एक बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना को अंतिम मंजूरी मिल गई है। लंबे समय से प्रतीक्षित देशगांव से जुलवानिया फोरलेन सड़क परियोजना के लिए नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) और निर्माण कंपनी के बीच अनुबंध की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। इस बेहद महत्वपूर्ण राजमार्ग के निर्माण का काम जनवरी 2027 से जमीन पर शुरू हो जाएगा। इस परियोजना की मंजूरी से खंडवा सहित आसपास के कई क्षेत्रों के लोगों में खुशी की लहर है, जो सालों से इस मार्ग के चौड़ीकरण की मांग कर रहे थे। यह सिर्फ एक सड़क परियोजना नहीं है, बल्कि इस पूरे क्षेत्र के आर्थिक और सामाजिक विकास का नया मार्ग खोलेगी। वर्तमान में इस मार्ग पर वाहनों का भारी दबाव रहता है, जिसके कारण आए दिन ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है और खतरनाक मोड़ों की वजह से दुर्घटनाओं का अंदेशा भी रहता है। लेकिन इस फोरलेन के बनने से न केवल लोगों को जाम से राहत मिलेगी, बल्कि यात्रा भी सुरक्षित और सुगम हो जाएगी।
क्षेत्रीय संपर्क में सुधार और हादसों पर लगेगा लगाम
यह सड़क मार्ग खंडवा, खरगोन, बड़वानी और बैतूल जैसे जिलों के लिए एक जीवन रेखा की तरह काम करेगा। विशेष रूप से ग्रामीण इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए यह सड़क एक बड़ा वरदान साबित होगी, क्योंकि बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से उनका समय बचेगा और व्यापारिक गतिविधियों में तेजी आएगी। कई छोटे और दूर-दराज के गांव, जो अब तक मुख्य सड़क नेटवर्क से पूरी तरह नहीं जुड़ पाए थे, वे भी इस आधुनिक राजमार्ग से सीधे जुड़ जाएंगे। इस सड़क के निर्माण से स्थानीय स्तर पर छोटे व्यवसायों को काफी बढ़ावा मिलेगा और कृषि उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाना काफी आसान हो जाएगा। इसके अलावा, आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाएं और शिक्षा के अवसर भी अब ग्रामीण आबादी की पहुंच में आसानी से आ सकेंगे।
दो चरणों में पूरा किया जाएगा इस विशाल परियोजना का काम
इस पूरी सड़क परियोजना के निर्माण कार्य को सुचारू रूप से चलाने के लिए इसे दो मुख्य हिस्सों में बांटा गया है। पहले चरण के तहत बैतूल से रुधि तक के लगभग 125 किलोमीटर लंबे मार्ग को अपग्रेड किया जाएगा। वर्तमान में यह सड़क इंटरमीडिएट लेन के रूप में है, जिसे अब मानक टू-लेन सड़क में बदला जाएगा। इस पहले हिस्से के निर्माण पर लगभग 1700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत आने का अनुमान है और इसे पूरा करने के लिए दो साल की समय-सीमा तय की गई है।
वहीं, इस परियोजना का दूसरा और सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा देशगांव से जुलवानिया तक का होगा। इस करीब 108 किलोमीटर लंबे मार्ग को पूरी तरह से फोरलेन में तब्दील किया जाएगा। इस हिस्से के निर्माण पर करीब 2600 करोड़ रुपये से अधिक का खर्च आएगा। इस भारी निवेश के जरिए इस बात को सुनिश्चित किया जा रहा है कि यह राजमार्ग भविष्य में बढ़ने वाले भारी वाहनों के भार को आसानी से सहन कर सके।
शहरी भीड़ को कम करने के लिए बनाए जाएंगे विशेष बायपास
शहरों के भीतर ट्रैफिक के दबाव को कम करने और स्थानीय निवासियों को भारी वाहनों के प्रदूषण और शोर से बचाने के लिए इस परियोजना में कई बायपास रास्तों का प्रावधान किया गया है। नए बायपास बनने से भारी वाहन सीधे शहरों के बाहर से निकल जाएंगे। साईखेड़ी, बिरुल, भीकनगांव, बमनाला, ललानी, देवलगांव, खरगोन, ऊन, तलाकपुरा, शेगांव और जुलवानिया जैसे महत्वपूर्ण कस्बों और क्षेत्रों में बायपास सड़कों का निर्माण किया जाएगा।
इसके अतिरिक्त, खरगोन जिले में एक विशेष 16 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड बायपास भी तैयार किया जाएगा। यह बायपास पूरी तरह से नए मार्ग पर बनेगा, जिससे शहर के भीतर लगने वाले भीषण ट्रैफिक जाम से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। इस महत्वाकांक्षी फोरलेन परियोजना को पूरा करने का अंतिम लक्ष्य दिसंबर 2030 रखा गया है, जिसके बाद इस पूरे इलाके की सूरत बदल जाएगी।
बुनियादी ढांचे के साथ पर्यावरण और वन्यजीव संरक्षण का तालमेल
इस सड़क परियोजना की सबसे खास बात यह है कि इसमें केवल मानव विकास ही नहीं, बल्कि प्रकृति और वन्यजीवों की सुरक्षा का भी पूरा ख्याल रखा गया है। चूंकि इस सड़क का एक हिस्सा संवेदनशील सतपुड़ा-मेलघाट टाइगर कॉरिडोर से होकर गुजरता है, इसलिए जंगली जानवरों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। वाहनों की तेज रफ्तार के कारण वन्यजीवों के साथ होने वाले हादसों को रोकने के लिए इस क्षेत्र में 7 अंडरपास बनाए जाएंगे।
इन अंडरपास के माध्यम से जंगली जानवर बिना किसी खतरे के सड़क के नीचे से सुरक्षित रूप से आ-जा सकेंगे। इसके साथ ही, पेड़ों पर रहने वाले जीवों के लिए विशेष मंकी लेटर भी लगाए जाएंगे। यह पर्यावरण-अनुकूल डिजाइन इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे हम पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना देश के बुनियादी ढांचे का विकास कर सकते हैं।



















