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मास्टर प्लान 2047 को मिली मंजूरी, दिल्ली के बाहरी इलाकों में विकसित होंगे 6 नए व्यवस्थित उपनगरभारत
13 अग॰ 2026, 7:16 pm (10 घंटे पहले)· 2

मास्टर प्लान 2047 को मिली मंजूरी, दिल्ली के बाहरी इलाकों में विकसित होंगे 6 नए व्यवस्थित उपनगर

दिल्ली में अगले 20 वर्षों के दौरान रोहिणी और द्वारका की तर्ज पर 6 नए आधुनिक सब-सिटी विकसित किए जाएंगे। डीडीए का उद्देश्य 2047 तक बढ़ने वाली आबादी को आवास और सुविधाएं देना तथा पुराने इलाकों पर दबाव कम करना है।

दिल्ली आने वाले दशकों में एक नए और अत्यधिक व्यवस्थित रूप में नजर आने वाली है। मास्टर प्लान 2047 को आधिकारिक मंजूरी मिलने के बाद राष्ट्रीय राजधानी के बाहरी और ग्रामीण इलाकों में 6 नए उपनगर यानी सब-सिटी विकसित करने की कार्ययोजना पर काम शुरू हो चुका है। इन नए क्षेत्रों को रोहिणी और द्वारका जैसे पूर्व में सफल रहे योजनाबद्ध उपनगरों की तर्ज पर तैयार किया जाएगा। अगले 20 वर्षों की अवधि में इन इलाकों में गुणवत्तापूर्ण आवास, आधुनिक सड़क नेटवर्क, जन परिवहन, स्कूल, कॉलेज और रोजगार के नए अवसर प्रदान करने की विस्तृत रूपरेखा तैयार की गई है।

6 नए उपनगरों का भौगोलिक विभाजन और जोन विवरण

दिल्ली विकास प्राधिकरण द्वारा तैयार मास्टर प्लान के तहत राजधानी के उत्तरी, पश्चिमी और दक्षिणी हिस्सों को शामिल करते हुए 6 विशेष जोन तय किए गए हैं, जिनका आने वाले समय में पूरी तरह नक्शा बदलने वाला है

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  • P-1 जोन: इसमें नरेला के मौजूदा विकसित क्षेत्र से बाहर का इलाका शामिल है, जिसे एक स्वतंत्र और भव्य नरेला सब-सिटी के रूप में विकसित किया जाएगा।
  • N जोन: उत्तर-पश्चिमी दिल्ली में स्थित इस जोन में नरेला, बवाना और कंझावला के वृहद इलाकों को शामिल कर एकीकृत विकास की योजना बनाई गई है।
  • P-2 जोन: उत्तरी दिल्ली में बख्तावरपुर गांव से आगे बढ़ते हुए तिग्गीपुर और उसके आसपास के मैदानी क्षेत्रों तक इस जोन का विस्तार होगा।
  • L जोन: पश्चिमी दिल्ली में द्वारका और नजफगढ़ के पीछे फैला बड़ा भूभाग इस जोन में आता है, जो ढांसा बॉर्डर तक विस्तृत है।
  • K-1 और K-2 जोन: इन दोनों जोन को पश्चिमी व दक्षिण-पश्चिमी दिल्ली के प्रमुख केंद्रों द्वारका और वसंत कुंज के आसपास के इलाकों में आकार दिया जाएगा।
  • J जोन: दक्षिणी दिल्ली के घिटोरनी और उसके समीपवर्ती क्षेत्रों को इस जोन के अंतर्गत आधुनिक उपनगर के रूप में विकसित करने की तैयारी है।

बढ़ती आबादी का प्रबंधन और बुनियादी ढांचे का सुदृढ़ीकरण

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के आकलन के अनुसार वर्ष 2047 तक दिल्ली की जनसंख्या में भारी वृद्धि होने का अनुमान है। इस जनसांख्यिकी बदलाव को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान 2047 में आवास निर्माण, यातायात प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण, बिजली-पानी की आपूर्ति और स्थानीय रोजगार को एक साथ जोड़ा गया है। इसका प्राथमिक उद्देश्य दिल्ली के पुराने और अत्यधिक घने रिहायशी इलाकों पर बढ़ रहे ढांचागत दबाव को कम करना है। नए उपनगरों में चौड़ी सड़कों, निर्बाध जलापूर्ति, बिजली नेटवर्क और सार्वजनिक परिवहन का विस्तार इस तरह किया जाएगा ताकि निवासियों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए मध्य दिल्ली पर निर्भर न रहना पड़े।

कमर्शियल हब का निर्माण और रियल एस्टेट सेक्टर के साथ साझेदारी

इन 6 उपनगरों को केवल रिहायशी कॉलोनियों तक सीमित रखने के बजाय पूर्ण आत्मनिर्भर आर्थिक केंद्र बनाया जाएगा। डीडीए चिन्हित गांवों और आसपास के भूखंडों पर व्यावसायिक और कमर्शियल हब विकसित करने की तैयारी में है, जिससे स्थानीय स्तर पर व्यापार, औद्योगिक गतिविधियों और नौकरियों के अवसर बढ़ेंगे। सरकारी स्कूल और कॉलेज स्थापित करने के साथ-साथ निजी क्षेत्र से भी निवेश आकर्षित करने की रणनीति बनाई गई है। विकास कार्यों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने के लिए डीडीए रियल एस्टेट सेक्टर के साथ रणनीतिक साझेदारी के मॉडल पर काम करेगा, जिससे आगामी दो दशकों में दिल्ली के शहरी परिदृश्य का कायाकल्प हो सके।

सवाल-जवाब

दिल्ली मास्टर प्लान 2047 के तहत कुल कितने नए उपनगर बनाए जाएंगे?
मास्टर प्लान 2047 के तहत दिल्ली के बाहरी और विभिन्न हिस्सों में कुल 6 नए उपनगर (सब-सिटी) विकसित किए जाएंगे।
इन नए उपनगरों को किन पुरानी सब-सिटी की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है?
इन नए उपनगरों को दिल्ली के व्यवस्थित और योजनाबद्ध रिहायशी क्षेत्रों रोहिणी और द्वारका की तर्ज पर विकसित करने की योजना है।
नए उपनगर विकास योजना में दिल्ली के कौन-कौन से इलाके शामिल हैं?
इसमें नरेला, बवाना, कंझावला, बख्तावरपुर, तिग्गीपुर, नजफगढ़, ढांसा बॉर्डर, वसंत कुंज और घिटोरनी जैसे क्षेत्र शामिल हैं।
दिल्ली में 6 नए उपनगर बनाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य 2047 तक बढ़ने वाली आबादी को योजनाबद्ध आवास देना, पुरानी दिल्ली के इलाकों पर दबाव घटाना और नए रोजगार पैदा करना है।
क्या इन सब-सिटी में केवल मकान ही बनाए जाएंगे?
नहीं, रिहायशी मकानों के साथ-साथ डीडीए कमर्शियल हब, चौड़ी सड़कें, स्कूल, कॉलेज और बिजली-पानी का आधुनिक ढांचा विकसित करेगा।
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