भारत और जापान अपने सामरिक और रणनीतिक संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं। इसी कड़ी में जापान के रक्षा मंत्री शिंजिरो कोइजुमी 19 अगस्त को भारत के महत्वपूर्ण दौरे पर मुंबई पहुंचेंगे। मुंबई स्थित नौसेना बेस का जायजा लेने के बाद वह 20 अगस्त को नई दिल्ली पहुंचेंगे, जहां उनकी मुलाकात भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से होगी। यह द्विपक्षीय बैठक दोनों देशों के बीच नौसेना के युद्धपोतों के लिए UNICORN रेडियो एंटीना प्रणाली के सह-विकास समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने के तुरंत बाद आयोजित हो रही है, जिससे रक्षा प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में दोनों देशों की साझेदारी और मजबूत हुई है।
मुंबई से नई दिल्ली तक का दौरा और द्विपक्षीय वार्ता
रक्षा मामलों से जुड़े आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, राजनाथ सिंह और शिंजिरो कोइजुमी के बीच होने वाली उच्च स्तरीय बातचीत में रक्षा उद्योग में आपसी सहयोग बढ़ाने तथा दोनों देशों की सशस्त्र सेनाओं की संयुक्त परिचालन तैयारियों की समीक्षा पर मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित किया जाएगा। बीते कुछ वर्षों के दौरान भारत और जापान के बीच सैन्य स्तर पर जुड़ाव और रणनीतिक समन्वय में उल्लेखनीय बढ़ोतरी देखी गई है। दोनों देश तकनीक के हस्तांतरण और संयुक्त सैन्य उत्पादन के विभिन्न अवसरों को तलाश रहे हैं।
सितंबर में संयुक्त वायु अभ्यास और जापानी वायुसेना प्रमुख का दौरा
दोनों देशों का यह सैन्य सहयोग सिर्फ नौसेना तक सीमित नहीं है। आगामी सितंबर महीने में भारतीय आकाश में दोनों देशों की वायुसेनाओं का बड़ा रणनीतिक तालमेल दिखाई देगा। जापानी वायुसेना के अत्याधुनिक फाइटर जेट्स एक साझा वायु अभ्यास में हिस्सा लेने के लिए भारत आएंगे। इस अभ्यास का अवलोकन करने के लिए जापानी एयर चीफ जनरल ताकेहिरो मोरिटा स्वयं भारत यात्रा पर रहेंगे। अपनी इस यात्रा के दौरान जापानी वायुसेना प्रमुख भारतीय सैन्य अधिकारियों और शीर्ष रणनीतिकारों के साथ कई महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताएं करेंगे।
टोक्यो वार्ता का अगला कदम और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की सुरक्षा
जापानी रक्षा मंत्री की यह यात्रा बीते महीने 13 जुलाई को टोक्यो में आयोजित रक्षा वार्ता का ही विस्तार मानी जा रही है। टोक्यो में हुई उस बैठक में साइबर सिक्योरिटी, अंतरिक्ष तकनीक और एडवांस्ड मिलिट्री टेक्नोलॉजी जैसे आधुनिक विषयों पर गहन मंथन हुआ था। भारत और जापान दोनों ही इंडो-पैसिफिक क्षेत्र को एक स्वतंत्र, खुले, सुरक्षित और अंतरराष्ट्रीय नियमों से संचालित क्षेत्र बनाने के प्रबल समर्थक हैं। इस साझेदारी का प्राथमिक उद्देश्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा को पुख्ता करना और क्षेत्र में उभरती हुई रणनीतिक चुनौतियों से मिलकर निपटना है।
मालाबार नौसैनिक अभ्यास में साझा भागीदारी
इसके अतिरिक्त, चालू वर्ष के अंत में भारत और जापान की नौसेनाएं अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया के साथ मिलकर बहुपक्षीय 'मालाबार नौसैनिक अभ्यास' में हिस्सा लेंगी। यह अभ्यास चारों क्वाड देशों के बीच समुद्री सुरक्षा और अंतर-संचालनीयता को बेहतर बनाने का एक प्रमुख मंच है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि शिंजिरो कोइजुमी का यह दौरा भारत-जापान रक्षा संबंधों को और व्यापक बनाने के साथ-साथ समूचे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर साबित होगा।



















