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पन्ना: चलने में असमर्थ नीलू को पीठ पर बिठाकर कलेक्ट्रेट पहुंचा पति, बोली, 10 साल से न राशन मिला न कोई योजनामध्य प्रदेश
18 जून 2026, 1:14 am (45 दिन पहले)· 3

पन्ना: चलने में असमर्थ नीलू को पीठ पर बिठाकर कलेक्ट्रेट पहुंचा पति, बोली, 10 साल से न राशन मिला न कोई योजना

मध्य प्रदेश के पन्ना जिले की दिव्यांग नीलू राजा को उसके पति पुष्पेंद्र सिंह पीठ पर बिठाकर जनसुनवाई में लाए, जहां महिला ने 10 साल से राशन और हर सरकारी योजना से वंचित रहने की पीड़ा बयां की। कलेक्टर उषा परमार ने राशन पर्ची बनवाने और पात्र योजनाओं का लाभ दिलाने का आश्वासन दिया।

मध्य प्रदेश के पन्ना कलेक्ट्रेट में मंगलवार की जनसुनवाई एक ऐसी तस्वीर की गवाह बनी, जिसने वहां मौजूद हर शख्स को भीतर तक झकझोर दिया। गौरा गांव का रहने वाला पुष्पेंद्र सिंह अपनी दिव्यांग पत्नी को पीठ पर बिठाकर, बच्चों के साथ कलेक्टर के सामने फरियाद लेकर पहुंचा था। पत्नी का नाम नीलू राजा है, जो चलने-फिरने में असमर्थ है, और यही उसकी मजबूरी थी कि उसे पति की पीठ ही सहारा बनी।

10 साल से न राशन, न कोई योजना

कलेक्टर उषा परमार के सामने रोती-बिलखती नीलू ने अपनी आपबीती सुनाई। उसका कहना था कि बीते 10 वर्षों से न तो उसे राशन मिल रहा है और न ही किसी सरकारी योजना का लाभ। परिवार आज तक प्रधानमंत्री आवास और शौचालय जैसी बुनियादी योजनाओं से भी वंचित है। गांव में रोजगार का कोई जरिया भी नहीं है, जिससे हालात और कठिन बने हुए हैं।

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राशन कार्ड बदल दिया, पर्ची आज तक नहीं

नीलू ने बताया कि उसका अति गरीबी रेखा वाला राशन कार्ड पंचायत के कर्मचारियों ने बदलकर गरीबी रेखा का कर दिया। इसके बाद से उसे राशन पर्ची ही नहीं मिल पाई, और यही वजह रही कि एक दशक से उसके घर अनाज नहीं पहुंचा। महिला का आरोप है कि उसने सरपंच, पंचायत सचिव और कई अधिकारियों के दरवाजे खटखटाए, मगर किसी ने उसकी सुनवाई नहीं की।

किडनी का इलाज, बच्चों की पढ़ाई पर असर

अपनी व्यथा बताते हुए नीलू ने कहा कि वह चल-फिर पाने में असमर्थ है और भोपाल एम्स में किडनी का इलाज करा रही है। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी कमजोर हो चुकी है कि अब बच्चों की पढ़ाई तक प्रभावित होने लगी है। महिला के मुताबिक उसने पंचायत से लेकर जनपद, जिला पंचायत, कलेक्ट्रेट और यहां तक कि मुख्यमंत्री कार्यालय तक अपनी फरियाद पहुंचाई, लेकिन आज तक उसकी समस्या का कोई हल नहीं निकला।

कलेक्टर का आश्वासन

जनसुनवाई में अपनी पीड़ा सुनाते हुए नीलू राजा भावुक हो उठी। पूरा मामला सुनने के बाद कलेक्टर उषा परमार ने इसे गंभीरता से लिया और पीड़िता को राशन पर्ची बनवाने के साथ ही पात्र योजनाओं का लाभ दिलाने का भरोसा दिलाया। इस आश्वासन के बाद परिवार इस उम्मीद के साथ अपने घर लौटा कि शायद इस बार उसका काम हो जाए।

सवाल-जवाब

नीलू राजा को जनसुनवाई में पीठ पर बिठाकर कौन लाया?
उसके पति पुष्पेंद्र सिंह, जो गौरा गांव के रहने वाले हैं, उसे पीठ पर बिठाकर बच्चों के साथ कलेक्ट्रेट लाए।
नीलू को कितने समय से राशन नहीं मिल रहा और क्यों?
पिछले 10 वर्षों से, क्योंकि पंचायत कर्मचारियों ने उसका अति गरीबी रेखा वाला राशन कार्ड बदल दिया और उसे राशन पर्ची आज तक नहीं मिली।
नीलू किस बीमारी का इलाज करा रही है?
वह चलने-फिरने में असमर्थ है और भोपाल एम्स में किडनी का इलाज करा रही है।
कलेक्टर उषा परमार ने क्या आश्वासन दिया?
उन्होंने पीड़िता को राशन पर्ची बनवाने और पात्र सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने का भरोसा दिलाया।
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