बुंदेलखंड के सागर जिले में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को सहेजने के लिए मध्य प्रदेश सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। क्षेत्र में पर्यटन की असीम संभावनाओं को देखते हुए राज्य सरकार देवरी स्थित लगभग 400 साल पुराने ऐतिहासिक खंडेराव मंदिर को एक प्रमुख पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने जा रही है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर करीब 50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। हाल ही में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस विकास योजना को मंजूरी दी थी, जिसका खाका स्थानीय नगर पालिका ने क्षेत्रीय विधायक के साथ मिलकर तैयार किया है।
भीड़भाड़ से मिलेगी मुक्ति और सुगम होगा मंदिर का रास्ता
तेजी से बढ़ते शहरीकरण और लगातार हो रहे विस्तारीकरण के कारण यह प्राचीन खंडेराव मंदिर अब देवरी नगर के बीचों-बीच घिर गया है। इसके चलते यहां आने वाले श्रद्धालुओं को यातायात और संकरी गलियों की वजह से काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। लगातार होते निर्माण कार्यों के कारण मंदिर परिसर का दायरा भी सिमटता जा रहा था। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए मंदिर का संरक्षण करने और इसे एक भव्य पर्यटक स्थल के रूप में बदलने का फैसला लिया गया है ताकि इसकी ऐतिहासिक पहचान सुरक्षित रह सके।
50 करोड़ के बजट से संवरेगा खंडेराव लोक
इस परियोजना के तहत बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए कई बड़े काम किए जाएंगे। सबसे पहले मंदिर को सीधे नेशनल हाईवे 44 (NH 44) और अन्य मुख्य संपर्क मार्गों से जोड़ा जाएगा, ताकि भारी वाहनों और बाहरी पर्यटकों को आने-जाने में कोई असुविधा न हो। इसके अलावा मंदिर तक सुगम पहुंच के लिए एक विशेष खंडेराव लोक का निर्माण किया जाएगा।
श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए परियोजना के तहत निम्नलिखित निर्माण कार्य किए जाएंगे
- बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए एक आधुनिक भक्त निवास बनाया जाएगा।
- धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए एक विशाल सत्संग भवन का निर्माण होगा।
- मंदिर परिसर में एक सुंदर जलाशय (कुंड) और आकर्षक लाइटिंग वाला बगीचा (लाइटिंग गार्डन) विकसित किया जाएगा।
- परिसर के आसपास से सभी अवैध अतिक्रमणों को पूरी तरह हटाया जाएगा।
- युवाओं और पर्यटकों के लिए आकर्षक सेल्फी पॉइंट बनाए जाएंगे।
- भगवान खंडेराव की महिमा और मंदिर के गौरवशाली इतिहास को दर्शाने वाली एक विशेष गैलरी तैयार की जाएगी।
चंपा छठ पर दहकते अंगारों पर चलने की अनोखी परंपरा
खंडेराव भगवान का यह मंदिर मध्य प्रदेश का एकमात्र ऐसा मंदिर है, जहां देश के कोने-कोने से श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। यहां हर साल चंपा छठ के अवसर पर आयोजित होने वाला प्रसिद्ध अग्निकुंड मेला पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। इस मेले के दौरान मंदिर परिसर में विशेष अग्निकुंड तैयार किए जाते हैं। मान्यता है कि मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु दहकते हुए अंगारों पर नंगे पैर चलते हैं। यह अनोखी और साहसी परंपरा पिछले 400 वर्षों से बिना किसी रुकावट के लगातार चली आ रही है। इस 10 दिवसीय मेले में भाग लेने के लिए दूर-दूर से भारी भीड़ उमड़ती है, जिसे देखते हुए इस पूरे क्षेत्र का कायाकल्प किया जा रहा है।



















