डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय में आवास की चुनौती
देश के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों में से एक, डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय, सागर ने नए शैक्षणिक सत्र के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह विश्वविद्यालय अपने विशिष्ट पाठ्यक्रमों के लिए जाना जाता है और प्रतिवर्ष 20 से 25 राज्यों के छात्रों को आकर्षित करता है। हालांकि, इतने बड़े पैमाने पर छात्रों के आने से उनके लिए आवास की व्यवस्था करना एक बड़ी चुनौती रही है। विश्वविद्यालय वर्तमान में छह छात्रावासों के माध्यम से लगभग 1200 छात्रों को रहने की सुविधा प्रदान करता है, जिसका मासिक किराया बेहद किफायती, मात्र 250 रुपये है।
स्थानीय छात्रों के लिए सीमित अवसर
वर्तमान में, विश्वविद्यालय में उपलब्ध सीमित सीटों के कारण सागर, दमोह, कटनी, रायसेन और विदिशा जैसे आस-पास के जिलों के कई छात्र छात्रावास सुविधा का लाभ नहीं उठा पाते हैं। इन छात्रों को बाहर निजी आवासों में रहना पड़ता है, जो अक्सर महंगा होता है। छात्रावासों की संख्या बढ़ाने की मांग लंबे समय से उठाई जा रही थी ताकि दूर से आने वाले और स्थानीय दोनों ही छात्रों को कम लागत पर गुणवत्तापूर्ण आवास मिल सके।
विस्तार योजनाएं और नए छात्रावास
छात्रों की इस बढ़ती मांग और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने के लिए विश्वविद्यालय एक महत्वपूर्ण विस्तार योजना पर काम कर रहा है। छात्राओं के लिए निवेदिता हॉस्टल, रानी लक्ष्मीबाई हॉस्टल और सरस्वती हॉस्टल उपलब्ध हैं, जबकि छात्रों के लिए टैगोर हॉस्टल, विवेकानंद हॉस्टल, आर्यभट्ट हॉस्टल और रमन हॉस्टल मौजूद हैं, जिनकी कुल क्षमता लगभग 1200 सीटें हैं। इस वर्ष 500 सीटों वाला भाभा हॉस्टल भी बनकर तैयार हो जाएगा, जिसका आवंटन 2027 के नए सत्र से शुरू होगा।
केंद्र सरकार से मिला बड़ा बजट
विश्वविद्यालय के लिए एक बड़ी उपलब्धि यह है कि भारत सरकार ने 195 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत किया है, जिससे 2000 सीटों वाले दो नए छात्रावासों का निर्माण किया जाएगा। इनमें से 1000 सीटों वाला एक छात्रावास लड़कों के लिए और 1000 सीटों वाला दूसरा छात्रावास लड़कियों के लिए होगा। इन नए छात्रावासों के अगले दो वर्षों में बनकर तैयार होने की उम्मीद है।
भविष्य की आवास क्षमता
इस विस्तार के बाद, वर्ष 2028 तक डॉ. हरि सिंह गौर विश्वविद्यालय में छात्रावास सीटों की कुल संख्या बढ़कर 3700 से भी अधिक हो जाएगी। यह वृद्धि न केवल दूर-दराज से आने वाले छात्रों को लाभान्वित करेगी, बल्कि उन आस-पास के जिलों के छात्रों को भी आवास प्रदान करेगी जो पहले सीमित सीटों के कारण वंचित रह जाते थे। विश्वविद्यालय के मीडिया अधिकारी डॉ. विवेक जायसवाल ने बताया कि यह विस्तार नए पाठ्यक्रमों की बढ़ती संख्या को देखते हुए भी आवश्यक था, और विश्वविद्यालय के इस प्रस्ताव को भारत सरकार ने स्वीकार कर लिया है। यह कदम छात्रों के हितों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है और इससे विश्वविद्यालय की शैक्षिक सुविधाओं में भी सुधार होगा।













