महाराष्ट्र के लातूर क्षेत्र में अंधविश्वास के नाम पर एक अत्यंत दिल दहला देने वाली घटना सामने आने से हड़कंप मच गया है। उदगीर पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए एक 15 वर्ष की नाबालिग लड़की को गंभीर उत्पीड़न और अमानवीय अघोरी पूजा का शिकार होने से ऐन वक्त पर बचा लिया। कथित रूप से पैसों की बारिश कराने के लालच में कुछ लोगों ने मध्य रात्रि को एक खौफनाक तांत्रिक अनुष्ठान आयोजित करने का पूरा ताना-बाना बुन लिया था, जिसे पुलिस की सतर्कता से विफल कर दिया गया।
करडखेल पाटी के पास रची गई थी अमानवीय साजिश
यह पूरी वारदात लातूर और उदगीर को जोड़ने वाली मुख्य सड़क पर स्थित करडखेल पाटी के निकट की है। प्रारंभिक ब्योरे के अनुसार, तांत्रिक क्रियाओं के माध्यम से रातों-रात धनवान बनने की हवस में आरोपियों ने देवी लक्ष्मी को प्रसन्न करने के नाम पर एक घिनौनी योजना तैयार की थी। इस अनुष्ठान में एक अघोरी तांत्रिक समेत लगभग 15 लोगों के शामिल होने की तैयारी थी। तांत्रिक अनुष्ठान के लिए आधी रात को 15 वर्षीय किशोरी को मौका-ए-वारदात पर लाने का बंदोबस्त किया गया था।
नाबालिग को ढाल बनाकर तांत्रिक क्रिया का प्लान
पुलिस द्वारा उजागर किए गए विवरण के मुताबिक, आरोपियों की मंशा लड़की को पूजा स्थल पर एकत्रित सभी लोगों के समक्ष निर्वस्त्र करके लिटाने की थी। इसके पश्चात तांत्रिक मंत्रोच्चार और अघोरी अनुष्ठान के जरिए कथित रूप से पैसों की बारिश कराने की प्रक्रिया शुरू की जानी थी। हालांकि, इससे पहले कि आरोपी अपने इस घिनौने मकसद में कामयाब हो पाते और नाबालिग पर कोई अत्याचार हो पाता, उदगीर ग्रामीण पुलिस को इस साजिश की भनक लग गई और पुलिस टीम ने मौके पर धावा बोलकर पूरी योजना को निष्फल कर दिया।
पॉक्सो और अंधविश्वास विरोधी कानून में एफआईआर
घटना का पर्दाफाश होने के तुरंत बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 15 आरोपियों के विरुद्ध मामला दर्ज कर लिया है। इस केस में महाराष्ट्र नरबलि एवं अन्य अमानवीय, अनिष्ट व अघोरी प्रथा तथा जादूटोना प्रतिबंधक कानून की सख्त धाराओं के साथ-साथ यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण यानी पॉक्सो कानून (POCSO) के तहत केस दर्ज किया गया है।
व्यापक नेटवर्क की तलाश में जुटी पुलिस
उदगीर ग्रामीण पुलिस अब इस मामले की गहराई से जांच कर रही है ताकि घटना में शामिल प्रत्येक व्यक्ति की सटीक भूमिका का पता लगाया जा सके। पुलिस इस बात की भी पड़ताल कर रही है कि क्या इस अघोरी प्रथा के पीछे कोई अंतरराज्यीय या बड़ा संगठित गिरोह काम कर रहा है। जांच अधिकारियों को अंदेशा है कि आरोपियों ने इससे पहले भी किसी अन्य स्थान पर ऐसी तांत्रिक गतिविधियां संचालित की हो सकती हैं अथवा भविष्य में अन्य जगहों पर भी ऐसे अनुष्ठान कराने की उनकी योजना थी। पुलिस की विभिन्न टीमें आरोपियों की धरपकड़ और मामले के तमाम पहलुओं की कड़ियों को जोड़ने में जुटी हुई हैं।





















