शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष और पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल पर हुए जानलेवा हमले की गुत्थी सुलझाने के लिए जांच का दायरा अब महाराष्ट्र तक फैल चुका है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा दिए गए निर्देशों के बाद राज्य आतंकवाद विरोधी दस्ते (ATS) और पुणे पुलिस की टीमों ने संयुक्त रूप से मामले के मुख्य आरोपी जसपाल सिंह के पुणे स्थित आवास और उसके वकालत कार्यालय की तलाशी ली। जांच एजेंसियां इस समय आरोपी की पृष्ठभूमि, उसके स्थानीय नेटवर्क और हालिया गतिविधियों के तार जोड़ने में जुटी हुई हैं।
वकील से सेवादार बनने की कहानी और संभावित नाराजगी
पुलिस सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, आरोपी जसपाल सिंह का अतीत कानूनी पेशे से जुड़ा रहा है। वह पहले पुणे में एक पंजीकृत वकील के रूप में काम करता था, लेकिन बाद में उसने अपना पेशा छोड़कर नांदेड स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारे में एक सेवादार के रूप में धार्मिक सेवाएं देना शुरू कर दिया था। प्रारंभिक पूछताछ के दौरान आरोपी ने पंजाब में फैल रही नशे की समस्या पर अपनी गहरी चिंता और आक्रोश व्यक्त किया। उसने इस स्थिति के लिए सीधे तौर पर सुखबीर सिंह बादल और उनके राजनीतिक दल को उत्तरदायी ठहराया है। हालांकि, जांच में जुटी एजेंसियों ने साफ किया है कि हमला करने के पीछे के वास्तविक और ठोस कारणों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है। महाराष्ट्र पुलिस और ATS की अलग-अलग टीमें आरोपी को हिरासत में लेकर उसके संपर्कों की गहन जांच कर रही हैं।
हमले पर सुखबीर सिंह बादल का तीखा रुख
अपने ऊपर हुए इस हमले के बाद प्रतिक्रिया देते हुए पंजाब के पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल ने स्पष्ट किया कि ऐसे षड्यंत्र उनके हौसले को डिगा नहीं सकते। उन्होंने आरोप लगाया कि हमले के पीछे की मुख्य मंशा पंजाब के माहौल पर कब्जा जमाना और राज्य में स्थापित शांति व्यवस्था को छिन्न-भिन्न करना है। बादल ने जोर देकर कहा कि शिरोमणि अकाली दल के नेतृत्व के रूप में वह किसी भी कीमत पर पंजाब की शांति से खिलवाड़ नहीं होने देंगे।
अतीत की घटनाओं का उल्लेख करते हुए बादल ने कहा कि उन पर दोनों बार हमले सबसे पवित्र स्थलों पर किए गए। उन्होंने कहा, "मैं कभी नहीं डरा और न ही अब डरता हूं।" अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने कहा कि शिरोमणि अकाली दल पंजाब के गौरव, भाईचारे और राज्य की प्रगति के लिए हर तरह का बलिदान देने को तैयार है। उनके अनुसार, राज्य में सांप्रदायिक और धार्मिक सौहार्द बनाए रखना उनकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।





















