महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई स्थित वाई. बी. चव्हाण केंद्र के रंगस्वर सभागार में शनिवार को आयोजित एक जनसभा को संबोधित करते हुए शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने देश के मौजूदा राजनीतिक हालात पर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण द्वारा उठाए गए सत्ता परिवर्तन संबंधी विचार का स्पष्ट समर्थन किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि यदि नागरिकों से मतदान के जरिए अपनी असहमति दर्ज कराने और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार छीना जा रहा है, तो ऐसी हुकूमत को बदलना हर नागरिक का लोकतांत्रिक कर्तव्य बन जाता है।
नागरिक अधिकारों के दमन और दिल्ली की सुरक्षा पर कड़े सवाल
राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिसिया कार्रवाई को लेकर उद्धव ठाकरे ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सत्ता पक्ष पर तनिक भी सवाल उठाने वालों को तुरंत देशविरोधी करार दे दिया जाता है। दिल्ली की सड़कों पर भारी तादाद में पुलिस बल की मौजूदगी पर तंज कसते हुए उन्होंने पूछा कि क्या इतनी बड़ी संख्या में जवानों को किसी उत्सव में हिस्सा लेने के लिए बुलाया गया था। उनका कहना था कि जब शासन जनता की आवाज दबाने के लिए तंत्र का दुरुपयोग करने लगे, तो उस व्यवस्था के विरोध में संगठित होना अनिवार्य हो जाता है।
प्रशांत भूषण की टिप्पणी का समर्थन और विपक्ष का रुख
प्रशांत भूषण के बयान का हवाला देते हुए शिवसेना (UBT) नेता ने कहा कि यदि बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों पर पाबंदी लगाई जाएगी तो सत्ता परिवर्तन की मांग उठना बिल्कुल स्वाभाविक है। इस संदर्भ में अपना रुख साफ करते हुए उन्होंने सीधे तौर पर कहा,
"हां, हम सत्ता परिवर्तन के लिए ही खड़े हैं।"उन्होंने स्पष्ट किया कि जब आम लोगों के विरोध करने और राय जाहिर करने के संवैधानिक रास्ते बंद किए जाएंगे, तब मौजूदा शासन को उखाड़ फेंकने का संकल्प लेना ही एकमात्र विकल्प बचता है और इसमें कुछ भी अनुचित नहीं है।
लोकतंत्र की रक्षा को बताया सामूहिक दायित्व
सभागार में उपस्थित लोगों से एकजुट होने का आह्वान करते हुए उद्धव ठाकरे ने पौराणिक गोवर्धन पर्वत का दृष्टांत दिया। उन्होंने समझाया कि संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की पुनर्स्थापना किसी एक व्यक्ति या किसी एक राजनीतिक दल के सामर्थ्य की बात नहीं है। जिस प्रकार गोवर्धन को उठाने के लिए समाज के प्रत्येक व्यक्ति ने अपना सहयोग दिया था, उसी तरह आज देश के हर नागरिक को आगे आना होगा। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में आगाह किया कि यदि इस ऐतिहासिक संघर्ष में सबने मिलकर साझेदारी नहीं निभाई, तो पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था ही नष्ट हो जाएगी।
राज्य स्तर पर पहले से चल रहा है आंदोलन
यह पहला मौका नहीं है जब उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने सत्तारूढ़ दल के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया है। इससे पूर्व महाराष्ट्र में भी उनकी पार्टी ने मौजूदा फडणवीस सरकार की कार्यशैली और नीतियों के विरोध में 'तुमसे ना हो पाएगा' नाम से एक विस्तृत जनअभियान शुरू किया था। पार्टी लगातार यह संदेश दे रही है कि वह न केवल राज्य बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी सत्ता के जनविरोधी फैसलों के खिलाफ जनआंदोलन को धार देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।





















