महाराष्ट्र के गढ़चिरौली जिले ने विकास के पैमाने पर नया मुकाम हासिल करते हुए नीति आयोग के एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट प्रोग्राम के अंतर्गत अप्रैल-जून 2026 की तिमाही डेल्टा रैंकिंग में पूरे देश में शीर्ष स्थान प्राप्त किया है। कभी माओवादी उग्रवाद और बुनियादी पिछड़ेपन के साये में रहे इस सीमावर्ती जिले का देश में अव्वल आना एक अभूतपूर्व बदलाव को दर्शाता है। इस तिमाही सूची में जम्मू-कश्मीर के बारामुला जिले ने देश में दूसरा स्थान हासिल किया है। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने बुधवार 7 अक्टूबर 2026 को इस उपलब्धि पर गढ़चिरौली के प्रशासनिक अमले, सामाजिक संगठनों और स्थानीय निवासियों को सार्वजनिक रूप से बधाई दी।
प्रशासनिक सुधारों और जल संरक्षण से बदली सूरत
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट के माध्यम से इस सफलता के प्रमुख कारकों को साझा किया। उन्होंने बताया कि यह परिणाम किसी आकस्मिक घटनाक्रम का हिस्सा नहीं है, बल्कि लक्षित प्रशासनिक हस्तक्षेप और जमीनी स्तर पर लागू किए गए व्यापक संरचनात्मक सुधारों का नतीजा है। जिले में जल संरक्षण, स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे, महिला शिक्षा और औद्योगिक कौशल के मोर्चे पर ठोस कदम उठाए गए।
विशेष रूप से ग्रामीण जल संकट को दूर करने के लिए पुनर्जीवित जलयुक्त शिवार अभियान के साथ-साथ प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) को पूरी गति से जमीन पर उतारा गया। इन प्रमुख योजनाओं के तहत गढ़चिरौली जिले भर में 6,000 से अधिक जल भंडारण संरचनाओं का निर्माण पूरा किया गया। इस व्यापक कदम ने क्षेत्र के भूजल स्तर में उल्लेखनीय सुधार किया, जिसके सीधे परिणाम के रूप में कृषि उपज में वृद्धि दर्ज की गई और ग्रामीण परिवारों के लिए जल सुरक्षा सुनिश्चित हुई।
महिला शिक्षा और संस्थागत स्वच्छता पर विशेष जोर
मानव विकास सूचकांकों को मजबूत करने की रणनीति के तहत प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा में गंभीर बदलाव किए गए। मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि दूरदराज के आदिवासी अंचलों में संचालित प्राथमिक व माध्यमिक स्कूलों में छात्राओं के लिए अलग शौचालय सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया गया। इस बुनियादी व्यवस्था का सीधा उद्देश्य छात्राओं के स्कूल छोड़ने यानी ड्रॉपआउट दर में कमी लाना और विद्यालयों में संस्थागत स्वच्छता को बढ़ावा देना था।
इसके साथ ही कल्याणकारी योजनाओं की पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आधार आधारित बैंक खाता प्रमाणीकरण अभियान को बड़े पैमाने पर गति दी गई। इस तकनीकी कदम से डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डीबीटी) की प्रणाली पूरी तरह सुव्यवस्थित हुई, जिससे सरकारी सहायता बिना किसी बिचौलिए के सीधे लाभार्थियों के खातों तक पहुंची और ग्रामीण वित्तीय समावेशन को अभूतपूर्व मजबूती मिली।
कॉर्पोरेट भागीदारी और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा में बदलाव
युवाओं के भविष्य को संवारने के लिए गढ़चिरौली के औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (आईटीआई) में बड़े कॉर्पोरेट घरानों के सहयोग से तकनीकी कौशल प्रशिक्षण शुरू किया गया। महिंद्रा, लॉयड्स और टाटा ट्रस्ट्स जैसी प्रमुख संस्थाओं के साथ साझेदारी कर स्थानीय युवाओं के लिए एडवांस वोकेशनल कोर्स शुरू किए गए, ताकि उन्हें आधुनिक उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार किया जा सके।
स्वास्थ्य क्षेत्र में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों (पीएचसी) की कार्यप्रणाली में विशेष सुधार किए गए। स्वास्थ्य केंद्रों में सुविधाओं को आधुनिक बनाने के साथ-साथ गर्भवती महिलाओं के लिए व्यापक पोषण कार्यक्रम चलाए गए। मुख्यमंत्री ने इन पहलों को सफल बनाने के लिए जिला प्रशासन, आशा व जमीनी स्तर के स्वास्थ्य कर्मियों, गैर-सरकारी सामाजिक संगठनों, निजी साझीदारों और गढ़चिरौली की आम जनता के एकजुट प्रयासों की सराहना की।
50 एमटीपीए ग्रीन स्टील हब बनने की ओर कदम
नीति आयोग की इस मूल्यांकन रिपोर्ट में गढ़चिरौली का शीर्ष स्थान हासिल करना ऐसे दौर में सामने आया है, जब महाराष्ट्र सरकार जिले को भारत का अग्रणी ग्रीन स्टील हब बनाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। गढ़चिरौली प्राकृतिक रूप से उच्च गुणवत्ता वाले लौह अयस्क, मैंगनीज और चूना पत्थर जैसे प्रचुर खनिज भंडारों से समृद्ध है। सरकार इन प्रचुर संसाधनों का उपयोग पर्यावरण-अनुकूल और कम उत्सर्जन वाली आधुनिक तकनीकों के साथ करने की रूपरेखा तैयार कर चुकी है।
राज्य सरकार विदर्भ क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सतत औद्योगीकरण को आगे बढ़ा रही है, जिसका केंद्रीय लक्ष्य गढ़चिरौली को केंद्र बनाकर 50 एमटीपीए (मिलियन टन प्रति वर्ष) स्टील निर्माण क्षमता तैयार करना है। पर्यावरण-सम्मत स्टील उत्पादन की दिशा में यह कदम जिले को भारत की भावी ग्रीन स्टील क्रांति का प्रारंभिक केंद्र बनाने के लिए निर्धारित किया गया है, जिससे क्षेत्र का सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक सशक्तीकरण नई गति पकड़ सके।



















