हवाई सफर के दौरान जानलेवा संकट के बीच अडिग रहकर सैकड़ों मुसाफिरों की हिफाजत करने वाले भारतीय वैमानिक कैप्टन स्मित मच्छार के अदम्य साहस को इजरायल ने अनोखे अंदाज में सलाम किया है। इजरायली प्रशासन और वहां के नागरिकों की गहरी कृतज्ञता प्रदर्शित करने के मकसद से मुंबई में स्थित इजरायल के महावाणिज्य दूतावास ने शहर के मुख्य यातायात मार्गों पर एक विशेष जनसंपर्क मुहिम चलाई है। इस पहल के तहत महानगर के व्यस्ततम चौराहों और प्रमुख सेतुओं पर विशालकाय प्रचार पट्ट लगाए गए हैं, जिन पर जांबाज पायलट के प्रति शुक्रिया अदा करने के साथ ही उनके शीघ्र रोगमुक्त होने की दिली दुआएं लिखी गई हैं।
महानगर के प्रमुख चौराहों पर संदेश
इस सम्मान अभियान के अंतर्गत लगाए गए फलक मुंबई के कई व्यस्त इलाकों में लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। इन जगहों में नेपियन सी मार्ग और वॉर्डन रोड का मिलन स्थल, बांद्रा पूर्व स्थित वेस्टर्न एक्सप्रेस राजमार्ग पर प्रबोधनकर ठाकरे सेतु के निकटवर्ती भाग, बीकेसी को सायन से जोड़ने वाला संपर्क मार्ग, जोगेश्वरी और अंधेरी के मध्य बना फ्लाईओवर तथा माहिम क्षेत्र की तुलसी पाइपलाइन सड़क शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर प्रदर्शित किए गए संदेशों में इजरायली नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कैप्टन स्मित का आभार व्यक्त किया गया है और उनके स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना की गई है।
गंभीर चोटों के बाद भी संभाली कमान
बांद्रा में राष्ट्रीय राजमार्ग किनारे संदेश पट्टिका के अनावरण अवसर पर मौजूद इजरायल के महावाणिज्य दूत यानिव रेवाच ने भारतीय पायलट के असाधारण जज्बे को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि गर्दन तथा हाथों पर गहरे जख्म होने के बावजूद कैप्टन ने आपातकालीन चेतावनी प्रणाली को चालू किया और विमान के मुख्य नियंत्रण कक्ष का द्वार खोलने में कामयाबी हासिल की।
“कैप्टन स्मित भारत और इजरायल दोनों देशों में हीरो बन गए हैं।”
यानिव रेवाच के मुताबिक, कैप्टन के इस साहसिक कदम और विमान में मौजूद चार इजरायली मुसाफिरों के त्वरित सहयोग की बदौलत कुल 174 व्यक्तियों का जीवन सुरक्षित बच सका। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस समय सबकी सबसे बड़ी प्राथमिकता घायल पायलट का पूरी तरह स्वस्थ होना है, जिसके उपरांत उन्हें इजरायल आमंत्रित कर वहां आधिकारिक सम्मान प्रदान करने की योजना है।
26/11 की याद और साझी मानवीय विरासत
महावाणिज्य दूत ने इस वीरतापूर्ण प्रसंग की तुलना मुंबई में हुए 26/11 के आतंकी हमले से की, जब एक भारतीय दाई सैंड्रा सैमुअल ने अपनी जान की परवाह न करते हुए नन्हे मोशे होल्ट्जबर्ग को मौत के मुंह से खींच निकाला था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय चिंतन और यहूदी दर्शन दोनों ही बेकसूर जिंदगियों की रक्षा को सर्वोच्च मानवीय मूल्य स्वीकार करते हैं। राजनयिक ने आगाह किया कि यदि कॉकपिट का द्वार समय पर नहीं खुलता तो यह हादसा एक उलझे हुए अंतरराष्ट्रीय संकट में तब्दील हो सकता था। उन्होंने कुछ प्रसार माध्यमों द्वारा तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश की जा रही मनगढ़ंत बातों पर चिंता जताई और कहा कि आधारहीन चर्चाएं भारत, यूएई तथा इजरायल जैसे मित्र राष्ट्रों के सौहार्द को चोट पहुंचा सकती हैं। इसके अलावा उन्होंने कतर और अल-जजीरा द्वारा यहूदियों के खिलाफ नफरत फैलाने वाले रवैये पर भी सवाल उठाए।
जांच प्रक्रिया और परस्पर प्रगाढ़ संबंध
यूएई प्रशासन ने इस मामले की पड़ताल में इजरायली जांच दलों को भी सहभागिता का निमंत्रण दिया है। इस संदर्भ में महावाणिज्य दूत ने आशा व्यक्त की कि निष्पक्ष पड़ताल से पूरी हकीकत दुनिया के सामने आएगी, हालांकि किसी एकाकी चरमपंथी की भूमिका को पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता। उन्होंने इंटरनेट माध्यमों और डिजिटल सामग्री से पनप रहे वैचारिक उग्रवाद की रोकथाम के लिए राष्ट्रों के साझा प्रयासों को अनिवार्य बताया। बयान के समापन पर उन्होंने जानकारी दी कि वे स्वयं कैप्टन स्मित के परिजनों से भेंट कर अपनी संवेदनाएं और शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामनाएं साझा कर चुके हैं, जिससे दोनों मुल्कों के नागरिकों का आपसी आत्मीय रिश्ता और अधिक दृढ़ हुआ है।





















