उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित आवास एंटीलिया के बाहर मिले विस्फोटक और कारोबारी मनसुख हिरेन की मौत के मामले में आरोपी पूर्व पुलिसकर्मी सचिन वाजे की जेल से रिहाई पर कानूनी पेंच फंस गया है। स्पेशल एनआईए कोर्ट द्वारा वाजे को जमानत दिए जाने के ठीक अगले दिन बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस आदेश के अमल पर 7 अक्टूबर तक के लिए अस्थायी रोक लगा दी है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी की ओर से दाखिल आपातकालीन याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने यह अंतरिम निर्देश पारित किया, जिससे वाजे को फिलहाल जेल की सलाखों के पीछे ही रहना पड़ेगा।
जांच एजेंसी की अर्जी और दो पीठों का सुनवाई से अलग होना
स्पेशल एनआईए कोर्ट के जमानत संबंधी फैसले के खिलाफ राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने मंगलवार को बेहद तेजी दिखाते हुए बॉम्बे हाई कोर्ट का रुख किया था। जांच एजेंसी ने निचली अदालत के आदेश पर तुरंत प्रभाव से रोक लगाने की गुहार लगाई थी। हालांकि, इस मामले में कानूनी प्रक्रिया कई मोड़ों से होकर गुजरी। सबसे पहले जस्टिस सारंग कोतवाल ने इस याचिका की सुनवाई से स्वयं को अलग कर लिया और मामले को सुनने से इनकार कर दिया। इसके पश्चात एनआईए की इस अर्जी को जस्टिस भारती डांगरे की अध्यक्षता वाली खंडपीठ के सामने ले जाया गया।
बुधवार को यह मामला जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस आशीष चव्हाण की खंडपीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया गया था। इस पीठ ने भी याचिका पर आगे विचार करने से मना कर दिया और खुद को सुनवाई से अलग कर लिया। इस फैसले के पीछे कानूनी पृष्ठभूमि अहम रही, क्योंकि जस्टिस आशीष चव्हाण पूर्व में केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई के वकील के रूप में अदालतों में पैरवी कर चुके हैं। वहीं दूसरी ओर, जस्टिस भारती डांगरे ने सचिन वाजे से संबंधित अन्य प्रकरणों में सियासी हस्तियों से जुड़ी अर्जियों पर पूर्व में सुनवाई की थी।
मुख्य न्यायाधीश का हस्तक्षेप और अंतरिम स्थगन आदेश
लगातार दो अलग-अलग पीठों के पीछे हटने के बाद एनआईए के अधिवक्ताओं ने इस मामले को फौरन मुख्य न्यायाधीश के समक्ष प्रस्तुत किया। एजेंसी ने वाजे की संभावित रिहाई को देखते हुए त्वरित न्यायिक हस्तक्षेप और आवश्यक दिशानिर्देश जारी करने की मांग उठाई। मुख्य न्यायाधीश के प्रशासनिक आदेश के आधार पर याचिका को तत्काल जस्टिस गिरीश कुलकर्णी और जस्टिस नीला गोखले की खंडपीठ को सौंपा गया।
दोपहर के सत्र में जब इस मामले पर सुनवाई शुरू हुई, तब अदालत कक्ष में सचिन वाजे की तरफ से कोई भी अधिवक्ता पैरवी के लिए हाजिर नहीं हुआ। एनआईए के तर्कों को सुनने के बाद बॉम्बे हाई कोर्ट ने सचिन वाजे को मिली जमानत के आदेश पर 7 अक्टूबर तक के लिए अंतरिम रोक लगाने का फैसला सुनाया। इसके साथ ही खंडपीठ ने यह विशेष निर्देश भी दिया कि अदालत के इस रोक आदेश की प्रति तत्काल कारागार प्रशासन को भेजी जाए, ताकि वाजे की रिहाई की किसी भी कागजी प्रक्रिया को समय रहते रोका जा सके। इस पूरे प्रकरण पर अब अगली सुनवाई 7 अक्टूबर को नियत की गई है।
एंटीलिया केस और मनसुख हिरेन मौत की पूरी पृष्ठभूमि
यह पूरा कानूनी विवाद उस सनसनीखेज घटनाक्रम से जुड़ा है जब उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित निजी आवास एंटीलिया के नजदीक एक संदिग्ध एसयूवी लावारिस हालत में खड़ी पाई गई थी। इस वाहन की जांच करने पर उसके भीतर से भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री बरामद हुई थी। इस घटना के सामने आने के कुछ ही समय बाद उक्त वाहन से जुड़े कारोबारी मनसुख हिरेन की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी, जिसके बाद पूरे मामले में नया मोड़ आ गया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए जब केंद्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने जांच की कमान संभाली, तब साक्ष्यों के आधार पर मुंबई पुलिस के अधिकारी सचिन वाजे को गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी और गंभीर आपराधिक षड्यंत्र के आरोप तय होने के उपरांत मुंबई पुलिस ने सचिन वाजे को सेवा से बर्खास्त कर दिया था। इस पूरे प्रकरण ने न केवल देश भर में भारी सनसनी पैदा की थी, बल्कि महाराष्ट्र के प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में भी बड़ा भूचाल ला दिया था।



















