राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान देश की वर्तमान स्थिति और युवा पीढ़ी के संस्कारों को लेकर महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने कहा कि देश की स्वाधीनता के समय स्वतंत्रता सेनानियों ने जितनी मेहनत की थी, आज उससे भी अधिक परिश्रम करने की आवश्यकता है ताकि समाज को सही दिशा दी जा सके।
युवाओं को सही-गलत का ज्ञान
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि आज के दौर में नई पीढ़ी को उचित और अनुचित का भेद स्पष्ट रूप से समझाने की जरूरत है। बदलते दौर में नैतिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए बच्चों और युवाओं में सही संस्कारों का रोपण बेहद आवश्यक है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विस्तार
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना डॉ केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा 27 सितंबर 1925 को की गई थी। स्थापना के बाद से ही यह संगठन लगातार राष्ट्र निर्माण और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहा है। वर्तमान समय में देश भर में संघ की करीब 40 हजार से अधिक शाखाएं संचालित हो रही हैं, जो युवाओं को अनुशासन और देशभक्ति का पाठ पढ़ाती हैं।
वैश्विक स्तर पर उपस्थिति
भारतीय संस्कृति और विचारों का प्रसार करने वाली इन शाखाओं का दायरा अब केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर के 39 देशों में फैल चुकी हैं। विदेशों में भी इसके माध्यम से भारतीय मूल के लोग और अन्य नागरिक जुड़ रहे हैं।
























