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नई पीढ़ी को सिखाएं सही-गलत का भेद, नागपुर कार्यक्रम में बोले मोहन भागवतमहाराष्ट्र
20 अक्तू॰ 2026, 9:41 am (1 घंटे पहले)· 2

नई पीढ़ी को सिखाएं सही-गलत का भेद, नागपुर कार्यक्रम में बोले मोहन भागवत

मोहन भागवत ने नागपुर में कहा कि आज देश की आजादी के समय से भी ज्यादा मेहनत की आवश्यकता है। उन्होंने नई पीढ़ी को सही और गलत का अंतर समझाने पर जोर दिया।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में एक कार्यक्रम के दौरान देश की वर्तमान स्थिति और युवा पीढ़ी के संस्कारों को लेकर महत्वपूर्ण विचार रखे। उन्होंने कहा कि देश की स्वाधीनता के समय स्वतंत्रता सेनानियों ने जितनी मेहनत की थी, आज उससे भी अधिक परिश्रम करने की आवश्यकता है ताकि समाज को सही दिशा दी जा सके।

युवाओं को सही-गलत का ज्ञान

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मोहन भागवत ने इस बात पर जोर दिया कि आज के दौर में नई पीढ़ी को उचित और अनुचित का भेद स्पष्ट रूप से समझाने की जरूरत है। बदलते दौर में नैतिक मूल्यों को बनाए रखने के लिए बच्चों और युवाओं में सही संस्कारों का रोपण बेहद आवश्यक है।

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ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और विस्तार

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना डॉ केशव बलिराम हेडगेवार द्वारा 27 सितंबर 1925 को की गई थी। स्थापना के बाद से ही यह संगठन लगातार राष्ट्र निर्माण और सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहा है। वर्तमान समय में देश भर में संघ की करीब 40 हजार से अधिक शाखाएं संचालित हो रही हैं, जो युवाओं को अनुशासन और देशभक्ति का पाठ पढ़ाती हैं।

वैश्विक स्तर पर उपस्थिति

भारतीय संस्कृति और विचारों का प्रसार करने वाली इन शाखाओं का दायरा अब केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दुनिया भर के 39 देशों में फैल चुकी हैं। विदेशों में भी इसके माध्यम से भारतीय मूल के लोग और अन्य नागरिक जुड़ रहे हैं।

सवाल-जवाब

मोहन भागवत ने नागपुर में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि देश की स्वाधीनता के समय स्वतंत्रता सेनानियों ने जितनी मेहनत की थी, आज समाज को उससे भी ज्यादा मेहनत करने की जरूरत है।
आरएसएस की स्थापना कब और किसने की थी?
आरएसएस की स्थापना 27 सितंबर 1925 को डॉ केशव बलिराम हेडगेवार ने की थी।
पूरे देश में संघ की कितनी शाखाएं हैं?
पूरे देश में आरएसएस की करीब 40 हजार से ज्यादा शाखाएं चलती हैं।
संघ की शाखाएं कितने देशों में फैली हैं?
संघ की शाखाएं वर्तमान में 39 देशों में मौजूद हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Michael Anderson@michael-anderson·7 मिनट पहले

नैतिक मूल्य सिखाना अच्छी बात है, पर आज की आज़ादी के बाद उससे भी ज़्यादा मेहनत की बात कुछ ज़्यादा लगती है। हालात अलग हैं, तुलना थोड़ी मुश्किल है।

Ravikash Gupta@ravikash·24 मिनट पहले

आज के समय में नैतिक मूल्यों और संस्कारों की बात बिल्कुल सही है। जिस तरह स्टार्टअप्स और कॉर्पोरेट जगत में सही दिशा और गवर्नेंस की कमी से कंपनियां भटक जाती हैं, वैसा ही समाज के साथ भी हो रहा है। जब तक नई पीढ़ी को सही और गलत का अंतर साफ समझ नहीं आएगा, तब तक मजबूत बुनियाद नहीं बन सकती।

Aisha Khan@aisha-khan·24 मिनट पहले

रविकश जी, आपकी बात तो सही है लेकिन क्या सच में आज के युवाओं को सही-गलत समझाने के लिए सिर्फ भाषण काफी हैं?

Rohan Verma@rohan-verma·47 मिनट पहले

आज की पीढ़ी को सही-गलत समझाना सच में बहुत जरूरी हो गया है, हालात तेजी से बदल रहे हैं।

Karan Malhotra@karan-malhotra·46 मिनट पहले

रोहन जी, बात सही है। आजकल किशोरों के अपराधों में आने की बड़ी वजह यही फर्क न समझ पाना है।

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