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सर्वोच्च अदालत के सख्त रुख के बाद बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने हटाए सारे अवैध निर्माणमहाराष्ट्र
4 नव॰ 2026, 7:55 pm (1 दिन पहले)· 0

सर्वोच्च अदालत के सख्त रुख के बाद बृहन्मुंबई महानगर पालिका ने हटाए सारे अवैध निर्माण

सुप्रीम कोर्ट की कड़ी चेतावनी और कमिश्नर का वेतन रोकने के आदेश के बाद बीएमसी ने सभी अवैध निर्माण गिराकर आदेश का पालन पूरा कर लिया है।

सुप्रीम कोर्ट द्वारा सख्त रुख अपनाए जाने के बाद बृहन्मुंबई नगर निगम (बीएमसी) ने सभी अवैध निर्माणों को पूरी तरह से हटा दिया है। बुधवार को अदालत में हुई सुनवाई के दौरान नगर निगम की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ वकील आरपी भट्ट ने पीठ को यह जानकारी दी कि न्यायिक निर्देशों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित कर दिया गया है। इस बात की जानकारी मिलने पर मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने वकील की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि आपके दखल के बिना यह काम संभव नहीं हो पाता।

वरिष्ठ वकील ने अदालत से व्यक्तिगत तौर पर मांगी माफी

सुनवाई की कार्यवाही के दौरान बीएमसी के वरिष्ठ अधिवक्ता आरपी भट्ट ने पीठ के समक्ष व्यक्तिगत स्तर पर क्षमा याचना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले वह नगर निगम के अधिकारियों का बचाव कर रहे थे, परंतु अब उनको अपनी त्रुटि का भलीभांति एहसास हो गया है। उन्होंने जजों के सामने स्वीकार किया कि वह सभी न्यायमूर्तियों से व्यक्तिगत रूप से माफी मांगते हैं। इसके साथ ही उन्होंने अदालत को यह आश्वासन भी दिया कि अतिक्रमण हटाने और आदेश के क्रियान्वयन से संबंधित औपचारिक अनुपालन हलफनामा बुधवार या गुरुवार तक रिकॉर्ड पर पेश कर दिया जाएगा।

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कमिश्नर का वेतन रोकने और जुर्माने के बाद बदला रुख

इस पूरे मामले की पृष्ठभूमि मंगलवार को हुई तीखी सुनवाई से जुड़ी है, जब सुप्रीम कोर्ट ने अतिक्रमण हटाने से संबंधित अपने पुराने निर्देशों की अनदेखी पर नगर निगम के रवैये के खिलाफ बेहद कड़ी नाराजगी प्रकट की थी। शीर्ष अदालत ने आदेश की अवहेलना को देखते हुए बीएमसी कमिश्नर का वेतन रोकने का कड़ा निर्देश सुनाया था और साथ ही कमिश्नर के खिलाफ अवमानना का नोटिस जारी कर दिया था।

समय मांगने पर ठोका गया था 5 लाख का जुर्माना

अदालत ने केवल प्रशासनिक कार्रवाई की चेतावनी ही नहीं दी, बल्कि जब बीएमसी ने पूर्व में दिए गए आदेश के अनुपालन के लिए अतिरिक्त मोहलत की मांग रखी, तो सुप्रीम कोर्ट ने निगम पर 5 लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगा दिया था। अदालत के इस कड़े वित्तीय और प्रशासनिक प्रहार का ही परिणाम रहा कि नगर निगम ने आनन-फानन में कार्रवाई करते हुए सभी चिन्हित अवैध ढांचों को जमींदोज कर दिया और अदालत को इसकी लिखित पुष्टि देने की तैयारी पूरी कर ली।

सवाल-जवाब

सुप्रीम कोर्ट ने बीएमसी के खिलाफ क्या कड़े आदेश दिए थे?
अदालत ने बीएमसी कमिश्नर का वेतन रोकने का आदेश दिया था, अवमानना नोटिस जारी किया था और समय मांगने पर 5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया था।
बीएमसी की तरफ से अदालत में क्या जानकारी दी गई?
वरिष्ठ वकील आरपी भट्ट ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए सभी अवैध निर्माण हटा दिए गए हैं।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने वकील से क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश ने वकील का धन्यवाद करते हुए कहा कि उनके दखल के बिना यह काम संभव नहीं हो पाता।
वरिष्ठ वकील आरपी भट्ट ने अदालत में क्या स्वीकार किया?
उन्होंने कहा कि पहले वह अधिकारियों का बचाव कर रहे थे, लेकिन गलती का एहसास होने के बाद उन्होंने पीठ से व्यक्तिगत माफी मांगी।
बीएमसी अदालत में अनुपालन हलफनामा कब दाखिल करेगी?
वकील ने भरोसा दिलाया कि आदेश के पालन से संबंधित हलफनामा बुधवार या गुरुवार को दाखिल कर दिया जाएगा।
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टिप्पणियाँ 5

Vikram Yadav@vikram-yadav·16 घंटे पहले

पाँच लाख के जुर्माने और सैलरी रोकने की धमकी के बाद ही अक्कल ठिकाने आई।

Ravikash Gupta@ravikash·23 घंटे पहले

सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बिना ये सिस्टम सुधरने वाला नहीं था, कमिश्नर का वेतन रुकते ही सब ठीक हो गया।

Tanvi Desai@tanvi-desai·23 घंटे पहले

रविकेश जी, बिल्कुल सही कहा आपने! जब तक कानून का डंडा और जेब पर असर न पड़े, ये अधिकारी अपनी मर्जी से कुछ नहीं करते।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

अरे भाई, अदालत ने जब तक डंडा नहीं चलाया, तब तक अधिकारी टस से मस नहीं हुए। कमिश्नर का वेतन रुकते ही सारा अवैध निर्माण रातों-रात साफ हो गया। कानून का डर हो तो काम ऐसे ही तुरंत होता है।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। लखनऊ में भी जब तक बुलडोजर का पहिया नहीं घूमता, सरकारी बाबू अपनी कुर्सी से हिलते तक नहीं हैं।

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