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आईएनएस ब्रह्मपुत्र हादसे में दो नौसेना अफसरों पर कोर्ट मार्शल शुरू, कैप्टन पर जहाज खतरे में डालने का आरोपमहाराष्ट्र
4 नव॰ 2026, 1:13 pm (1 घंटे पहले)· 0

आईएनएस ब्रह्मपुत्र हादसे में दो नौसेना अफसरों पर कोर्ट मार्शल शुरू, कैप्टन पर जहाज खतरे में डालने का आरोप

मुंबई डॉकयार्ड में आईएनएस ब्रह्मपुत्र के पलटने की घटना के बाद भारतीय नौसेना ने जहाज के कैप्टन और लेफ्टिनेंट कमांडर के खिलाफ कोर्ट मार्शल की कार्रवाई शुरू कर दी है।

मुंबई स्थित नेवल डॉकयार्ड में युद्धपोत आईएनएस ब्रह्मपुत्र के पलट जाने की भीषण घटना के करीब दो साल बाद भारतीय नौसेना ने सख्त अनुशासनात्मक कदम उठाया है। नौसेना ने मामले में शामिल दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ औपचारिक कोर्ट मार्शल की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जिन अधिकारियों पर यह कार्रवाई की जा रही है, उनमें उस समय जहाज की कमान संभाल रहे कमांडिंग ऑफिसर (कैप्टन) और ड्यूटी पर तैनात ऑफिसर ऑफ द डे (लेफ्टिनेंट कमांडर) शामिल हैं। दोनों अधिकारियों पर ड्यूटी के दौरान गंभीर लापरवाही बरतने का आरोप लगाया गया है। इसके साथ ही कैप्टन पर नौसैनिक पोत को खतरे में डालने का अतिरिक्त गंभीर आरोप भी दर्ज किया गया है।

जुलाई 2024 की आग और संतुलन बिगड़ने की त्रासदी

यह भीषण हादसा 21 जुलाई 2024 को उस वक्त हुआ था, जब मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में आईएनएस ब्रह्मपुत्र का नियमित मरम्मत कार्य चल रहा था। मरम्मत के दौरान अचानक युद्धपोत में आग भड़क उठी थी। आग की लपटों पर काबू पाने के लिए राहत एवं बचाव दल ने जहाज के भीतर भारी मात्रा में पानी की बौछारें कीं। आग बुझाने के दौरान जहाज के अंदरूनी हिस्सों में इतना अधिक पानी भर गया कि पोत का संतुलन पूरी तरह बिगड़ गया। स्थिरता खोने के बाद युद्धपोत पोर्ट साइड की तरफ झुकता चला गया और अंततः पलट गया।

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हादसे के समय पोत पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया था। जहाज पर मौजूद कई नौसैनिकों ने गैंगवे के सहारे भागकर किसी तरह अपनी जान बचाई, जबकि कुछ कर्मियों को आपात स्थिति में सीधे गहरे समुद्र में छलांग लगानी पड़ी। इस पूरे घटनाक्रम में लीडिंग सीमैन सितेंद्र सिंह की दुखद मौत हो गई। घटना के बाद नौसेना ने सघन तलाशी अभियान चलाया, जिसके बाद मुख्य नाविक सितेंद्र सिंह का पार्थिव शरीर पानी से बरामद किया गया था।

सघन जांच और बचाव अभियान

हादसे के बाद सामने आए तथ्यों से स्पष्ट हुआ था कि आग और अत्यधिक पानी के जमाव के कारण युद्धपोत बंदरगाह की दिशा में झुक गया था। तमाम तकनीकी प्रयासों और बचाव दलों की कोशिशों के बावजूद पोत को सीधा खड़ा नहीं रखा जा सका था। नौसेना ने इस पूरी घटना के कारणों और जिम्मेदारियों को तय करने के लिए विस्तृत जांच के आदेश दिए थे, जिसकी पड़ताल के आधार पर ही अब अधिकारियों पर लापरवाही के तहत कोर्ट मार्शल की कार्रवाई तय की गई है।

लंबा साल्वेज ऑपरेशन और 2027 में वापसी की उम्मीद

पलटे हुए युद्धपोत आईएनएस ब्रह्मपुत्र को वापस सीधा करने के लिए भारतीय नौसेना को एक बेहद जटिल और महीनों लंबा साल्वेज ऑपरेशन चलाना पड़ा था। कई महीनों की कड़ी मशक्कत के बाद जब पोत को पानी में सीधा खड़ा किया गया, तब जाकर इसके नुकसान का आकलन और व्यापक मरम्मत व बहाली का कार्य शुरू हो सका। वर्तमान में युद्धपोत के विभिन्न तकनीकी ट्रायल चल रहे हैं। नौसेना ने अभी तक आईएनएस ब्रह्मपुत्र को औपचारिक रूप से सक्रिय सेवा में शामिल नहीं किया है। अधिकारियों का मानना है कि मरम्मत, तकनीकी उन्नयन और सभी परीक्षण पूरे होने के बाद यह युद्धपोत 2027 तक समुद्र में दोबारा परिचालन के लिए तैयार हो सकेगा।

सवाल-जवाब

आईएनएस ब्रह्मपुत्र के किन अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट मार्शल शुरू हुआ है?
जहाज के पूर्व कमांडिंग ऑफिसर (कैप्टन) और घटना के समय तैनात ऑफिसर ऑफ द डे (लेफ्टिनेंट कमांडर) के खिलाफ कोर्ट मार्शल शुरू हुआ है।
दोनों अधिकारियों पर मुख्य आरोप क्या हैं?
दोनों पर ड्यूटी के दौरान लापरवाही का आरोप है, जबकि कैप्टन पर युद्धपोत को खतरे में डालने का अतिरिक्त आरोप लगा है।
आईएनएस ब्रह्मपुत्र के साथ यह हादसा कब और कहां हुआ था?
यह हादसा 21 जुलाई 2024 को मुंबई के नेवल डॉकयार्ड में नियमित मरम्मत कार्य के दौरान हुआ था।
युद्धपोत पलटने की मुख्य वजह क्या बनी?
आग बुझाने के लिए जहाज में डाले गए भारी मात्रा में पानी के कारण इसका संतुलन बिगड़ गया और यह पोर्ट साइड की तरफ झुककर पलट गया।
इस हादसे में किस नौसैनिक की जान गई थी?
इस दुर्घटना में लीडिंग सीमैन सितेंद्र सिंह की मृत्यु हो गई थी, जिनका शव बाद में बरामद किया गया था।
आईएनएस ब्रह्मपुत्र दोबारा नौसेना की सेवा में कब तक शामिल होगा?
फिलहाल युद्धपोत के ट्रायल जारी हैं और इसके 2027 तक पुनः सक्रिय संचालन के लिए तैयार होने की उम्मीद है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·51 मिनट पहले

लापरवाही की कीमत बहुत भारी पड़ी, एक जवान की जान भी चली गई और देश का युद्धपोत भी दो साल से बेकार पड़ा है। सही हुआ कि अब जिम्मेदारी तय हो रही है।

Rohan Verma@rohan-verma·51 मिनट पहले

करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। मुझे वो दिन अच्छे से याद है जब मुंबई डॉकयार्ड के पास से गुजरते हुए वो धुआं देखा था और मन बैठ गया था कि कुछ बहुत बुरा हुआ है।

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