यह शेयर बाजार का एक बड़ा विरोधाभास है कि जब कोई कंपनी शानदार नतीजे पेश करती है, तो उसके शेयरों में तेज उछाल की उम्मीद की जाती है। खास तौर पर ग्रीन एनर्जी सेक्टर में, जहां खुदरा निवेशक भविष्य के विकास की बड़ी उम्मीदें लगाकर बैठते हैं। लेकिन गुरुवार के कारोबारी सत्र में इसके बिल्कुल उलट दृश्य देखने को मिला। देश की जानी-मानी रिन्यूएबल पावर कंपनी, अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के शेयरों में निवेशकों ने भारी बिकवाली की। इंट्राडे ट्रेडिंग के दौरान कंपनी के शेयर की कीमत लगभग 6.54 प्रतिशत तक गिर गई। बाजार के जानकारों के लिए यह अचानक आई गिरावट इसलिए भी बेहद हैरानी भरी थी क्योंकि ठीक एक दिन पहले ही कंपनी के प्रबंधन ने अपने मजबूत वित्तीय नतीजों का ऐलान किया था। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर बताया था कि वित्तीय वर्ष 2026-27 की चौथी तिमाही के दौरान उनके समेकित शुद्ध मुनाफे में सालाना आधार पर 19 प्रतिशत का जबरदस्त उछाल आया है। आम तौर पर मुनाफे में इस तरह की तेज बढ़ोतरी किसी भी शेयर को नई ऊंचाइयों पर ले जाने का काम करती है, लेकिन यहां आई भारी गिरावट ने संस्थागत निवेशकों की सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बीएसई पर गुरुवार के कारोबार का पूरा हाल
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) पर गुरुवार को हुई ट्रेडिंग के आंकड़ों पर नजर डालें, तो दोपहर से ही स्टॉक में भारी दबाव साफ नजर आ रहा था। दोपहर 2:30 बजे तक, शेयरों में 6.77 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की जा चुकी थी और यह गिरकर 1,373.15 रुपये प्रति शेयर के स्तर पर कारोबार कर रहा था। हालांकि, इस बड़ी इंट्राडे बिकवाली के बावजूद कंपनी का कुल बाजार मूल्यांकन बहुत बड़े स्तर पर बना रहा। आंकड़ों के अनुसार, उस वक्त कंपनी का मार्केट कैप 2,26,181.99 करोड़ रुपये पर मजबूती से टिका हुआ था। पूरे दिन के कारोबार में इस स्टॉक में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। बाजार खुलने के बाद कुछ समय के लिए इसमें थोड़ी तेजी आई थी और स्टॉक ने 1,471.90 रुपये प्रति शेयर का अपना इंट्राडे हाई भी छुआ था। लेकिन यह शुरुआती तेजी ज्यादा देर तक टिक नहीं सकी और जल्द ही बिकवाली के भारी दबाव ने इसे नीचे धकेल दिया, जिसके चलते यह 1,373.15 रुपये प्रति शेयर के अपने इंट्राडे लो स्तर तक लुढ़क गया।
मुनाफे, राजस्व और एबिटा के शानदार आंकड़े
अगर हम कंपनी द्वारा जारी किए गए बुनियादी वित्तीय आंकड़ों का विस्तार से विश्लेषण करें, तो विकास की कहानी बेहद मजबूत दिखाई देती है। प्रबंधन द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक, Q1FY27 की अवधि के दौरान उनके समेकित शुद्ध मुनाफे में 19.3 प्रतिशत की भारी सालाना वृद्धि दर्ज की गई है। इस उछाल के साथ कंपनी का मुनाफा 983 करोड़ रुपये के शानदार स्तर पर पहुंच गया है। यह आंकड़ा पिछले 2025-26 के अप्रैल-जून तिमाही में दर्ज किए गए 824 करोड़ रुपये के मुनाफे के मुकाबले काफी बड़ा है। सकारात्मक रुझान केवल मुनाफे तक ही सीमित नहीं रहा। कंपनी के कामकाज से होने वाले राजस्व में भी काफी अच्छी बढ़ोतरी देखी गई है। वार्षिक आधार पर इसमें 16.6 प्रतिशत का उछाल आया है, जिसके बाद राजस्व बढ़कर 4,431 करोड़ रुपये हो गया है। एक साल पहले इसी अवधि में यह 3,800 करोड़ रुपये था। इसके अलावा, कंपनी की मुख्य परिचालन क्षमता भी बेहद मजबूत नजर आ रही है, जिसे EBITDA के आंकड़ों से आसानी से समझा जा सकता है। EBITDA किसी भी कंपनी की उस मूल कमाई को दर्शाता है जो कर और मूल्यह्रास को घटाने से पहले की होती है। इस तिमाही के दौरान कंपनी का EBITDA 3,985 करोड़ रुपये रहा। वित्तीय वर्ष 26 की जून तिमाही में दर्ज किए गए 3,042 करोड़ रुपये के मुकाबले इसमें भी सालाना आधार पर 9.88 प्रतिशत की शानदार वृद्धि हुई है।
बर्नस्टीन का सतर्क रुख और अंडरपरफॉर्म रेटिंग
इतने बेहतरीन वित्तीय प्रदर्शन के बावजूद शेयर की कीमत में आई इस गिरावट को समझने के लिए बड़ी ब्रोकरेज फर्मों के अलग-अलग नजरिए को देखना बहुत जरूरी है। ग्लोबल ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन ने इस शेयर को लेकर काफी सतर्क रुख अपनाया हुआ है। फर्म ने आधिकारिक तौर पर इस स्टॉक के लिए अपनी 'अंडरपरफॉर्म' रेटिंग को बरकरार रखा है। दिलचस्प बात यह है कि ब्रोकरेज ने यह नकारात्मक रेटिंग तब दी है, जब वे खुद कंपनी की परिचालन क्षमताओं की जमकर तारीफ कर रहे हैं। फर्म ने अपने नोट में स्पष्ट रूप से कहा है कि रिन्यूएबल सेक्टर में अडानी ग्रीन एनर्जी सबसे बेहतरीन तरीके से काम करने वाली कंपनी बनी हुई है। रणनीति से जुड़े खास कदमों पर प्रकाश डालते हुए, इस रिसर्च रिपोर्ट में बताया गया है कि कंपनी अपनी पूरी मर्चेंट जनरेशन को आवंटित कर रही है, जिसमें 4 गीगावॉट की चालू और नियोजित क्षमता दोनों शामिल हैं। इसके साथ ही, वे अपनी बैटरी स्टोरेज क्षमता को लेकर भी बहुत आक्रामक तरीके से आगे बढ़ रहे हैं, जिसके तहत इस साल के अंत तक 10 गीगावॉट घंटे (GWh) की विशाल क्षमता के ऑनलाइन होने की उम्मीद जताई गई है।
मुनाफे का ट्रांसफर और आईसीआईसीआई डायरेक्ट का अलग नजरिया
बर्नस्टीन ने अपने विस्तृत सेक्टर विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए यह स्वीकार किया है कि नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में यह कंपनी लगातार अपनी मजबूत और बेहद लाभप्रद स्थिति का आनंद ले रही है। अगर इसकी तुलना उद्योग की अन्य प्रतिस्पर्धी कंपनियों से की जाए, तो इसका पलड़ा भारी नजर आता है। विश्लेषकों का मानना है कि तेजी से बढ़ते हरित ऊर्जा बाजार में एक बड़े हिस्से पर कब्जा जमाने के लिए कंपनी अभी भी बहुत मजबूत स्थिति में है। हालांकि, उनकी मुख्य चिंता, जो इस सतर्क रेटिंग का आधार बनी है, वह इसके ढांचे को लेकर है। रिपोर्ट का तर्क है कि इन सभी सकारात्मक कारकों से जो आर्थिक लाभ मिल रहा है, उसका एक उचित हिस्सा वास्तव में उनकी एक और कंपनी, अडानी एनर्जी सॉल्यूशंस को ट्रांसफर किया जा रहा है। इस संरचनात्मक गतिशीलता ने ही बड़े निवेशकों के उत्साह को थोड़ा कम कर दिया है। दूसरी तरफ, घरेलू ब्रोकरेज फर्म आईसीआईसीआई डायरेक्ट सिक्योरिटीज का नजरिया इससे बिल्कुल उलट है। वे इस स्टॉक के भविष्य को लेकर लगातार बहुत ज्यादा बुलिश बने हुए हैं। इस फर्म ने अपनी मजबूत उम्मीदों का प्रदर्शन करते हुए हाल ही में इस शेयर के लिए अपने लक्ष्य मूल्य में 25 प्रतिशत की बड़ी बढ़ोतरी की है।
शेयर का पिछला प्रदर्शन और तकनीकी कमजोरी
अगर हम थोड़ा पीछे जाकर शेयर के ऐतिहासिक प्रदर्शन पर नजर डालें, तो हालिया गिरावट एक लंबे समय से चली आ रही तकनीकी कमजोरी के पैटर्न से मेल खाती है। गुरुवार को यह स्टॉक बुनियादी तौर पर निचले स्तर पर ही खुला था, जिसने पहले ही सौदे से बाजार में नकारात्मक माहौल बना दिया था। हालिया रिपोर्टों में दिए गए पुराने आंकड़ों के अनुसार, इस शेयर की कीमत में बहुत ज्यादा अस्थिरता देखी गई है। 14 जुलाई 2026 को इस शेयर ने 1,631.35 रुपये प्रति शेयर का अपना 52 सप्ताह का निचला स्तर छुआ था। इससे पहले, एक और बड़ी गिरावट के दौरान, 23 जनवरी 2026 को यह शेयर 767.00 रुपये प्रति शेयर के अपने एक और 52 सप्ताह के निचले स्तर तक गोता लगा चुका था। जहां तक बुनियादी रिटर्न की बात है, तो इसका ROE (रिटर्न ऑन इक्विटी) 6.86 प्रतिशत पर खड़ा है। हालांकि, छोटी और मध्यम अवधि में शेयर की कीमतों में आई तबाही ही सबसे ज्यादा ध्यान खींच रही है। सिर्फ एक हफ्ते के भीतर इसके शेयर की कीमत में 10 प्रतिशत की भारी गिरावट आ चुकी है। लंबी अवधि के निवेशकों के लिए चिंता की बात यह है कि पिछले छह महीनों के दौरान इस शेयर का मूल्यांकन लगभग 78 प्रतिशत तक गिर चुका है। इतनी बड़ी गिरावट किसी भी मजबूत पोर्टफोलियो को नुकसान पहुंचा सकती है। यह इस बात का स्पष्ट संकेत है कि व्यावसायिक सफलताओं के बावजूद बाजार की धारणा इस स्टॉक को लगातार नीचे धकेल रही है।

















