राजस्थान के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल सीकर का हर्ष पर्वत अब आस्था के साथ-साथ प्रकृति प्रेमियों के लिए भी एक बड़ा आकर्षण का केंद्र बनता जा रहा है। हरी-भरी पहाड़ियों के बीच 50 हेक्टेयर के विशाल क्षेत्र में विकसित की गई लव-कुश वाटिका पर्यटकों को खूब भा रही है। इस खूबसूरत जगह पर रोजाना 500 से अधिक पर्यटक पहुंच रहे हैं। परिवार के साथ आने वाले लोग और युवा यहां प्रकृति की गोद में सुकून भरे पल बिताने के लिए बड़ी संख्या में आ रहे हैं।
इस वाटिका की सबसे खास बात इसकी भौगोलिक स्थिति है, जो इसे धार्मिक स्थलों के बिल्कुल करीब रखती है। यह वाटिका प्रसिद्ध लालोलाव बालाजी मंदिर और ऐतिहासिक हर्षनाथ मंदिर के बीच स्थित है। इन मंदिरों में दर्शन पूजन के लिए आने वाले श्रद्धालु अब अपनी धार्मिक यात्रा को थोड़ा और विस्तार देते हुए यहां प्रकृति के बीच कुछ शांत समय बिताते हैं। आध्यात्मिक यात्रा के साथ-साथ पर्यटन और प्राकृतिक सुंदरता का यह अनूठा मेल लोगों को अपनी ओर खींच रहा है।
लव-कुश वाटिका के भीतर बनाए गए तीन व्यू-पॉइंट यहां आने वाले पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। इन ऊंचे स्थानों से अरावली पर्वतमाला की मनमोहक और ऊंची-नीची पहाड़ियां, दूर-दूर तक फैला हुआ घना जंगल और आसपास का पूरा प्राकृतिक परिदृश्य साफ दिखाई देता है। सुबह के वक्त उगते सूरज यानी सूर्योदय और शाम के समय ढलते सूरज यानी सूर्यास्त का नजारा यहां से बेहद अद्भुत और दर्शनीय होता है। इस प्राकृतिक सौंदर्य को देखने के लिए इन खास समयों पर लोगों की काफी भीड़ जुटती है।
इस शांत और प्राकृतिक वातावरण के बीच पर्यटकों को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए वाटिका में कई विश्राम स्थल भी तैयार किए गए हैं। यहां पारंपरिक शैली के झोपे, बैठने के लिए पक्के चबूतरे और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। परिसर में पीने के पानी की उचित व्यवस्था होने से बच्चों और परिवार के साथ आने वाले लोगों को काफी राहत मिलती है। परिवार के सभी सदस्य, चाहे वे बच्चे हों या बुजुर्ग, यहां बिना किसी जल्दबाजी के बैठकर कुदरती माहौल का आनंद ले सकते हैं।
लव-कुश वाटिका में विभिन्न वन्यजीवों की आकर्षक प्रतिकृतियां भी स्थापित की गई हैं, जो छोटे बच्चों और विद्यार्थियों का विशेष ध्यान खींचती हैं। इन कलाकृतियों और प्रतिकृतियों के माध्यम से बच्चों को जंगलों के वन्यजीवों और उनके संरक्षण के प्रति जागरूक करने का सार्थक प्रयास किया गया है। प्रकृति के खुले वातावरण में वन्यजीवों को करीब से समझने का यह नायाब तरीका बच्चों के लिए खेल-खेल में सीखने का एक बेहतरीन माध्यम साबित हो रहा है।
इस पूरी वाटिका में पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी व्यवस्थाओं पर भी विशेष जोर दिया गया है। वर्षा के पानी को सहेजने यानी वाटर हार्वेस्टिंग और मिट्टी के कटाव को रोकने के लिए विशेष गेवियन संरचनाएं बनाई गई हैं। धार्मिक पर्यटन के साथ-साथ ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने में यह लव-कुश वाटिका अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। हर्ष पर्वत पर आने वाले श्रद्धालुओं और सैलानियों के लिए यह स्थान भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर एक शांत माहौल में वक्त बिताने का नया और पसंदीदा ठिकाना बन चुका है।


















