अंतरराष्ट्रीय फॉरेक्स बाजार में न्यू ज़ीलैंड डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी (NZD/USD) 0.5860 के स्तर के आसपास सीमित दायरे में कारोबार कर रही है। हालांकि अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावनाएं बनी हुई हैं, फिर भी अमेरिकी डॉलर दबाव में नजर आ रहा है। वैश्विक वित्तीय बाजारों की नजरें अब शुक्रवार को जारी होने वाले संयुक्त राज्य अमेरिका के अगस्त उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आंकड़ों पर टिकी हैं। फिलहाल प्रमुख छह मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर का मूल्य मापने वाला डॉलर इंडेक्स (DXY) 0.2% गिरकर 98.65 के आसपास कारोबार कर रहा है। ताजा करेंसी हीट मैप और दैनिक उतार-चढ़ाव के आंकड़ों से पता चलता है कि जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर में सबसे ज्यादा कमजोरी दर्ज की गई है।
NZD/USD का तकनीकी विश्लेषण और प्रमुख स्तर
तकनीकी नजरिए से देखें तो NZD/USD की जोड़ी इस समय 0.5860 पर कारोबार कर रही है। 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 0.5889 के स्तर पर बना हुआ है, जिसके नीचे रहने के कारण इस करेंसी पेयर का अल्पकालिक रुझान हल्का मंदी (बेयरिश) की ओर झुका हुआ है। 20-दिवसीय EMA के नीचे बने रहने से यह स्पष्ट होता है कि ऊपरी स्तरों पर बिकवाली का दबाव बना हुआ है। इसके अलावा, रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) वर्तमान में 45 के आसपास बना हुआ है, जो यह दर्शाता है कि तेजी का जोर कम हो रहा है, लेकिन करेंसी पेयर अभी ओवर्सोल्ड क्षेत्र में नहीं पहुंचा है।
ऊपरी स्तरों पर NZD/USD के लिए पहला मुख्य प्रतिरोध 20-दिवसीय EMA यानी 0.5890 के पास स्थित है। यदि दैनिक चार्ट पर कीमत इस स्तर से ऊपर बंद होने में सफल रहती है, तो तात्कालिक गिरावट का दबाव कम हो सकता है और हालिया उच्च स्तरों की ओर बढ़त का रास्ता खुल सकता है। दूसरी तरफ, नीचे की ओर गिरावट आने पर सितंबर का निचला स्तर 0.5802 सबसे महत्वपूर्ण सपोर्ट लेवल के रूप में देखा जा रहा है। लाइव मार्केट आंकड़ों के मुताबिक, 52-हफ्तों का दायरा 0.5584 से 0.6093 के बीच रहा है, जबकि सपोर्ट S1 0.5848 और रेजिस्टेंस R1 0.5863 पर मौजूद है।
अमेरिकी मुद्रास्फीति दृष्टिकोण: अगस्त CPI से बाजार की उम्मीदें
वित्तीय विश्लेषकों और टीडी सिक्योरिटीज़ के अर्थशास्त्रियों के अनुसार, अगस्त महीने के आगामी अमेरिकी CPI आंकड़े यह संकेत दे सकते हैं कि मुख्य मुद्रास्फीति नियंत्रण में बनी हुई है। टीडी सिक्योरिटीज़ का अनुमान है कि कोर CPI में महीने-दर-महीने (m/m) आधार पर 0.19% की वृद्धि हो सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि सेवा क्षेत्र मुद्रास्फीति का मुख्य चालक रहेगा, जबकि कोर वस्तुओं की कीमतों में मामूली मासिक गिरावट दर्ज की जा सकती है जो मुद्रास्फीति पर दबाव कम करने का काम करेगी।
वार्षिक आधार पर, टीडी सिक्योरिटीज़ का अनुमान है कि कोर CPI 2.3% y/y पर रह सकता है, जो जुलाई की तुलना में 10 बेसिस पॉइंट कम है। वहीं मुख्य (हेडलाइन) मुद्रास्फीति 3.4% y/y पर अपरिवर्तित रहने की संभावना जताई गई है। हालांकि, वित्तीय संस्थान ने आगाह किया है कि शुल्क (टैरिफ) से प्रभावित वस्तु श्रेणियों में कीमतों में बड़ी गिरावट के अनुमानों को देखते हुए इस पूर्वानुमान के ऊपर जाने का जोखिम बना हुआ है।
मुद्रास्फीति, CPI और करेंसी मूल्यांकन के मूल सिद्धांत
मुद्रास्फीति किसी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की प्रतिनिधि टोकरी की कीमतों में वृद्धि को मापती है। इसे आमतौर पर महीने-दर-महीने (MoM) और साल-दर-साल (YoY) प्रतिशत परिवर्तन के रूप में दर्शाया जाता है। हेडलाइन मुद्रास्फीति में सभी वस्तुएं शामिल होती हैं, जबकि कोर मुद्रास्फीति में भोजन और ईंधन जैसे अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाले घटकों को बाहर रखा जाता है। भू-राजनीतिक और मौसमी कारणों से भोजन तथा ईंधन की कीमतें जल्दी बदलती हैं, इसलिए अर्थशास्त्री और केंद्रीय बैंक कोर मुद्रास्फीति पर ही मुख्य रूप से ध्यान केंद्रित करते हैं। केंद्रीय बैंकों का लक्ष्य आमतौर पर मुद्रास्फीति को 2% के आसपास प्रबंधनीय स्तर पर रखना होता है।
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) समय के साथ वस्तुओं और सेवाओं की टोकरी के मूल्य में बदलाव का सटीक आंकलन करता है। जब कोर CPI 2% के लक्षित स्तर से ऊपर जाता है, तो केंद्रीय बैंक अक्सर मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरों में वृद्धि करते हैं। इसके विपरीत, जब यह 2% से नीचे गिरता है, तो ब्याज दरों में कटौती की संभावना बढ़ जाती है। क्योंकि उच्च ब्याज दरें वैश्विक निवेशकों को अधिक रिटर्न की तलाश में आकर्षित करती हैं, इसलिए उच्च मुद्रास्फीति के कारण आमतौर पर किसी देश की मुद्रा मजबूत होती है, जबकि कम मुद्रास्फीति से मुद्रा का मूल्य घटता है।
मुद्रास्फीति का सोने और सुरक्षित संपत्तियों पर प्रभाव
ऐतिहासिक रूप से, अत्यधिक मुद्रास्फीति के समय निवेशक सोने को सुरक्षित संपत्ति मानकर उसमें निवेश करते थे क्योंकि यह अपना मूल्य बनाए रखता है। हालांकि, आधुनिक बाजारों में यह व्यवस्था बदल गई है। जब मुद्रास्फीति बढ़ती है, तो केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाते हैं। उच्च ब्याज दरों के कारण सोना रखने की अवसर लागत (ऑपर्चुनिटी कॉस्ट) बढ़ जाती है क्योंकि सोना कोई ब्याज नहीं देता, जबकि बॉन्ड या बैंक डिपॉजिट में पैसा रखने पर निश्चित रिटर्न मिलता है। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति घटती है और ब्याज दरें गिरती हैं, तो सोने में निवेश अधिक आकर्षक हो जाता है।
वैश्विक फॉरेक्स, कमोडिटी और क्रिप्टो बाजार की हलचल
वैश्विक बाजार के अन्य हिस्सों की बात करें तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) की जोड़ी एशियाई सत्र के दौरान 0.7200 के स्तर से ऊपर समेकित हो रही है। चीन के मजबूत CPI और PPI आंकड़ों तथा रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा दरें बढ़ाने की उम्मीदों से इसे समर्थन मिल रहा है। दूसरी ओर, USD/JPY की जोड़ी यूरोपीय कारोबारी घंटों के दौरान 153.50 के आसपास बेयरिश बनी हुई है। मजबूत रॉयटर्स तानकन व्यापार सर्वेक्षण ने बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा नीति सामान्यीकरण की प्रक्रिया जारी रखने के संकेतों को बल दिया है, जिससे जापानी येन को मजबूती मिली है।
कमोडिटी बाजार में, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सोना $4,400 प्रति औंस के स्तर को पार कर गया है और तीन दिनों की गिरावट के सिलसिले को समाप्त कर चुका है। वहीं क्रिप्टोकरेंसी सेगमेंट में, पाई नेटवर्क (PI) अपने 50-दिवसीय EMA के पास समर्थन पाने के बाद पुनर्प्राप्ति दर्ज करते हुए $0.098 से ऊपर कारोबार कर रहा है। ऊर्जा बाजार में, अमेरिकी डीजल क्रैक स्प्रेड में ऐतिहासिक उछाल देखा गया है और यह प्रति बैरल $100 के स्तर को पार करते हुए $102.00 के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है।



















