अमेरिकी अर्थव्यवस्था से जारी हुए हालिया आंकड़ों ने मुद्रा बाजार में हलचल बढ़ा दी है, जिसके चलते ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग में तेज गिरावट दर्ज की गई। पाउंड-डॉलर जोड़ी (जीबीपी/यूएसडी) सत्र के उच्चतम स्तर 1.3650 से लगभग 55 पिप्स फिसलकर 1.3600 के ठीक नीचे कारोबार कर रही है। बुधवार के कारोबारी सत्र में यह मुद्रा जोड़ी करीब 0.4 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद होने की ओर बढ़ी। यूरोपीय कारोबारी घंटों के दौरान पाउंड एक सीमित दायरे में बना रहा, लेकिन 12:30 जीएमटी पर जारी अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों के बाद दो घंटे के भीतर इसने करीब 50 पिप्स गंवा दिए। इसके बाद से बाजार का रुख निचले स्तरों पर स्थिर बना हुआ है, जो गुरुवार के सत्र में कदम रखने वाले ट्रेडर्स के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी संकेत साबित हो सकता है।
तकनीकी संकेत और अगस्त महीने की रैली का विश्लेषण
अगस्त के महीने में पाउंड की चाल बेहद मजबूत और स्पष्ट रही थी। महीने के पहले सप्ताह में 1.3300 के करीब निचले स्तर से शुरू हुई यह बढ़त 1.3700 के ठीक नीचे तक पहुंच गई थी। हालिया गिरावट के बावजूद, पाउंड का मौजूदा भाव 1.3450 के ठीक ऊपर स्थित 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (ईएमए) और 1.3400 के ऊपर स्थित 200-दिवसीय ईएमए से काफी ऊपर बना हुआ है। दोनों ही मूविंग एवरेज ऊपर की ओर इशारा कर रहे हैं, जो दीर्घावधि में एक तेजी के रुझान (बुलिश स्ट्रक्चर) को दर्शाते हैं। हालांकि, दैनिक स्टोकेस्टिक रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (स्टोकेस्टिक आरएसआई) 93 के स्तर के करीब पहुंच चुका है, जो इस बात का संकेत है कि पाउंड में हाल की रैली तकनीकी रूप से अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच चुकी थी और ओवरबॉट स्थिति में थी। इसके अलावा, लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार आरएसआई (14) वर्तमान में 60 पर है और 20-दिवसीय बोलिंजर बैंड्स 1.34 से 1.37 के बीच बने हुए हैं, जो यह स्पष्ट करते हैं कि कीमत अभी भी अपनी सामान्य वोलेटिलिटी सीमा के भीतर ही है।
अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों ने बिगाड़ा पाउंड का खेल
पाउंड की इस गिरावट का मुख्य कारण ब्रिटेन का कोई घरेलू आंकड़ा न होकर वॉशिंगटन से आए आर्थिक आंकड़े रहे। अमेरिका में दूसरी तिमाही के संशोधित कोर पीसीई मूल्य सूचकांक के आंकड़े 3.4 प्रतिशत से बढ़कर 3.7 प्रतिशत (तिमाही-दर-तिमाही) दर्ज किए गए। वहीं, हेडलाइन पीसीई कीमतें 5.1 प्रतिशत से बढ़कर 5.3 प्रतिशत हो गईं और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) मूल्य सूचकांक भी 6.3 प्रतिशत से बढ़कर 6.4 प्रतिशत पर पहुंच गया। इस दौरान अमेरिका की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 1.5 प्रतिशत (वार्षिक) पर स्थिर रही, जो बाजार के अनुमानों के बिल्कुल अनुरूप थी। दूसरी ओर, अमेरिका के टिकाऊ सामानों के ऑर्डर (ड्यूरेबल गुड्स ऑर्डर्स) में 0.7 प्रतिशत के अनुमान के मुकाबले 1.1 प्रतिशत की बढ़त देखी गई, जबकि व्यक्तिगत आय में 0.3 प्रतिशत के अनुमान के विपरीत 0.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई। इन आंकड़ों से साफ जाहिर होता है कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में महंगाई का दबाव बढ़ा है, जिसके कारण अमेरिकी डॉलर को चौतरफा मजबूती मिली और पाउंड को बढ़त गंवानी पड़ी।
फ़ेडरल रिजर्व और जैक्सन होल सम्मेलन पर केंद्रित निगाहें
पाउंड की भावी दिशा तय करने में ब्रिटेन से अधिक अमेरिका की केंद्रीय बैंक नीतियों की भूमिका रहने वाली है। शुक्रवार को 14:00 जीएमटी पर फ़ेडरल रिजर्व के प्रमुख केविन वॉरश जैक्सन होल सम्मेलन में अपना पहला मुख्य भाषण (कीनोट एड्रेस) देने वाले हैं। केंद्रीय बैंक की नीतियों में हालिया बदलावों के कारण अब फ़ेड प्रमुख के भाषणों पर बाजार की निर्भरता अत्यधिक बढ़ गई है। वॉरश का घोषित नीतिगत दृष्टिकोण यह रहा है कि जब श्रम बाजार संतुलन के करीब हो और अंतर्निहित मुद्रास्फीति बढ़े, तो मौद्रिक नीति को सख्त (रेट हाइक) किया जाना चाहिए। हालांकि, जुलाई के महीने में अमेरिकी गैर-कृषि रोजगार (नॉनफार्म पेरोल) में 23 हजार नौकरियों की कटौती दर्ज की गई थी, जिससे स्पष्ट होता है कि श्रम बाजार पूरी तरह संतुलित नहीं है। ऐसे में फ़ेड प्रमुख अपने भाषण में किस कारक को प्राथमिकता देते हैं, इसी से डॉलर और पाउंड का भावी रुझान तय होगा। शुक्रवार को ही यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन का उपभोक्ता भावना सूचकांक (अनुमान 51) तथा 1-वर्षीय (4.3 प्रतिशत) और 5-वर्षीय (3.3 प्रतिशत) मुद्रास्फीति प्रत्याशा आंकड़े भी जारी होने हैं।
बैंक ऑफ़ इंग्लैंड और ब्रिटेन की वित्तीय स्थिति
ब्रिटेन के अपने आर्थिक घटनाक्रमों की बात करें तो वहां की स्थिति फिलहाल पूरी तरह ठहरी हुई है। जुलाई महीने में ब्रिटेन की मुद्रास्फीति दर 2.9 प्रतिशत दर्ज की गई थी, जबकि 30 जुलाई की मौद्रिक नीति बैठक में बैंक ऑफ़ इंग्लैंड (बीओई) ने अपनी ब्याज दर को 3.75 प्रतिशत पर बनाए रखने का फैसला किया था। यह फैसला 6-3 के बहुमत से हुआ था, जिसमें नीति समिति के तीन सदस्य दरों को बढ़ाकर 4.00 प्रतिशत करने के पक्ष में थे। बैंक ऑफ़ इंग्लैंड का अगला नीतिगत फैसला 17 सितंबर को होना है। बाजार में ऐसी संभावनाएं बन रही हैं कि बीओई आगामी महीनों में दरों में कटौती के बजाय बढ़ोतरी कर सकता है और नवंबर तक दरें 4.00 प्रतिशत तक जा सकती हैं। दूसरी ओर, ब्रिटेन का बॉन्ड बाजार (गिल्ट मार्केट) वित्तीय चिंताओं से जूझ रहा है। 30-वर्षीय गिल्ट प्रतिफल 5.80 प्रतिशत के करीब है, जबकि 10-वर्षीय प्रतिफल 5.00 प्रतिशत से ऊपर बना हुआ है। फरवरी के बाद से गिल्ट यील्ड में हुई इस बढ़त के कारण चांसलर हीली के आगामी 28 अक्टूबर के बजट में उपलब्ध वित्तीय गुंजाइश (फिस्कल हेडरूम) 10 अरब से 12 अरब पाउंड तक घट गई है, जो अब केवल 10 अरब से 15 अरब पाउंड के बीच रहने का अनुमान है।
तकनीकी स्तर और अल्पकालिक ट्रेडिंग रणनीति
वर्तमान बाजार संरचना को देखते हुए अल्पकालिक दृष्टिकोण गिरावट (बेयरिश) का दिखाई दे रहा है। तकनीकी चार्ट पर महत्वपूर्ण स्तर इस प्रकार हैं
- प्रतिरोध स्तर (रेजिस्टेंस): ऊपरी स्तरों पर 1.3650 का क्षेत्र सबसे मजबूत रेजिस्टेंस के रूप में उभरा है, जिसने इस सप्ताह हर तेजी के प्रयास को नाकाम किया है। यदि पाउंड 1.3650 से ऊपर दैनिक बंद (डेली क्लोज) देने में सफल रहता है, तभी 1.3700 के अगस्त शिखर की ओर तेजी का रास्ता खुलेगा।
- समर्थन स्तर (सपोर्ट): नीचे की ओर पहला तात्कालिक सपोर्ट 1.3550 के स्तर पर मौजूद है। यदि यह स्तर टूटता है, तो 1.3500 का मनोवैज्ञानिक गोल स्तर (राउंड नंबर) अगला पड़ाव होगा, जो अगस्त के ब्रेकआउट का शुरुआती बिंदु था। 1.3450 के ठीक ऊपर स्थित 50-दिवसीय ईएमए वह अंतिम सीमा है जहां पाउंड के मुख्य अपट्रेंड पर सवाल उठने लगेंगे।
वैश्विक बाजारों की हलचल: सोना, यूरो और एनवीडिया
पाउंड के अलावा वैश्विक वित्तीय बाजारों में भी अन्य संपत्तियों पर डॉलर की मजबूती का प्रभाव देखा गया है। यूरो-डॉलर (ईयूआर/यूएसडी) जोड़ी 1.1600 के मध्य स्तरों पर वापस फिसल गई है, जहां ट्रेडर्स यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) की आगामी बैठकों के ब्योरे का इंतजार कर रहे हैं। वहीं, सोने (गोल्ड) की कीमतों में भी तीन दिनों की तेजी के बाद गिरावट आई है और यह 4,700 डॉलर के हालिया उच्च स्तर से घटकर 4,600 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के महत्वपूर्ण स्तर के आसपास आ गया है। टेक क्षेत्र की दिग्गज कंपनी एनवीडिया भी अपने पिछली तिमाही के वित्तीय परिणाम घोषित करने जा रही है, जिसमें 92 अरब डॉलर से अधिक के राजस्व और 2.09 डॉलर प्रति शेयर की कमाई (ईपीएस) का अनुमान लगाया जा रहा है।
ब्रिटिश पाउंड: दुनिया की सबसे पुरानी मुद्रा का मौलिक परिचय
फॉरेक्स बाजार को गहराई से समझने के लिए पाउंड स्टर्लिंग की बुनियादी संरचना को जानना आवश्यक है। 886 ईस्वी से चली आ रही स्टर्लिंग दुनिया की सबसे पुरानी जीवित मुद्रा है और ब्रिटेन की आधिकारिक करेंसी है। 2022 के वैश्विक आंकड़ों के अनुसार, विदेशी मुद्रा बाजार में 12 प्रतिशत हिस्सेदारी और 630 अरब डॉलर के दैनिक औसत कारोबार के साथ पाउंड दुनिया की चौथी सबसे ज्यादा ट्रेड होने वाली मुद्रा है। इसके मुख्य ट्रेडिंग पेयर्स में जीबीपी/यूएसडी शामिल है जिसे 'केबल' कहा जाता है (कुल फॉरेक्स का 11 प्रतिशत), जीबीपी/जेपीवाई जिसे 'ड्रैगन' कहा जाता है (3 प्रतिशत), और ईयूआर/जीबीपी (2 प्रतिशत) शामिल हैं। बैंक ऑफ़ इंग्लैंड का प्राथमिक उद्देश्य 2 प्रतिशत के आसपास मुद्रास्फीति दर को बनाए रखना है, जिसके लिए वह ब्याज दरों का उपयोग मुख्य हथियार के रूप में करता है। जब अर्थव्यवस्था में निर्यात बढ़ता है और व्यापार संतुलन (ट्रेड बैलेंस) सकारात्मक होता है, तो विदेशी मांग के कारण पाउंड को स्वाभाविक रूप से मजबूती मिलती है।


















