अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में कीमती धातुओं पर भालुओं की पकड़ लगातार मजबूत होती जा रही है। मंगलवार के शुरुआती कारोबार में पीली धातु अपने हालिया गिरावट के सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए 4,100 डॉलर प्रति औंस के बेहद संवेदनशील स्तर के करीब पहुंच गई। बीते कुछ सत्रों में 4,200 डॉलर के दायरे से फिसलने के बाद धातु पर बिकवाली का दबाव गहराया है। वैश्विक वित्तीय बाजारों में इस समय अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिभूतियों की यील्ड में उछाल और ग्रीनबैक की मजबूती का दोहरा असर दिख रहा है, जिससे निवेशकों का रुझान गैर-ब्याज देने वाली संपत्तियों से हटकर डॉलर की तरफ स्थानांतरित हो रहा है।
केंद्रीय बैंकों के समर्थन के बीच अल्पकालिक तकनीकी दबाव
सोने के दीर्घकालिक महत्व को लेकर यूरोपीय केंद्रीय बैंकों के दो शीर्ष अधिकारियों ने सोमवार को स्पष्ट किया कि सरकारी कर्ज के बढ़ते बोझ और भू-राजनीतिक अस्थिरता के दौर में यह धातु अब भी रणनीतिक विदेशी मुद्रा भंडार का अभिन्न अंग बनी हुई है। संकट के समय पूंजी संरक्षण के एक भरोसेमंद साधन के रूप में इसकी साख बरकरार है। इसके बावजूद, हाजिर बाजार में सटोरियों और संस्थागत निवेशकों का ध्यान फिलहाल निकट भविष्य के आर्थिक आंकड़ों पर टिका हुआ है।
बाजार भागीदार अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) द्वारा अक्टूबर की नीतिगत बैठक में ब्याज दरें न बढ़ाने की पूरी संभावना जता रहे हैं। इसके बावजूद अमेरिकी मुद्रा और सरकारी बॉन्ड यील्ड की मजबूती सोने के लिए सबसे बड़ी बाधा साबित हो रही है। हालांकि, तकनीकी शेयरों पर आधारित नैस्डैक सूचकांक के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने से इक्विटी बाजार का माहौल कुछ सुधरा था, जिसने डॉलर की एकतरफा तेजी पर थोड़ी लगाम लगाई। इसी वजह से सोने को 4,170 डॉलर के स्तर से लुढ़कने के बाद निचले स्तरों पर कुछ समय के लिए सहारा मिला था। इसके बाद भी मंगलवार को कच्चे तेल की कीमतों में आई उछाल और डॉलर की नई लिवाली ने गिरावट के रुख को फिर सक्रिय कर दिया।
दैनिक चार्ट पर तकनीकी संकेत और प्रमुख स्तर
दैनिक तकनीकी चार्ट पर नजर डालें तो XAU/USD का भाव 4,139.80 डॉलर के आसपास घूम रहा है। लाइव बाजार आंकड़ों के मुताबिक, सोने का वर्तमान स्तर 4,156 डॉलर दर्ज किया गया है, जो अपने पिछले बंद भाव 4,157 डॉलर से 0.01% नीचे है। पिछले 52 हफ्तों के दौरान सोने ने 3,901 डॉलर से 5,586 डॉलर का विस्तृत दायरा देखा है। फिलहाल 20-दिवसीय औसत ट्रेडिंग वॉल्यूम के मुकाबले केवल 0.12 गुना वॉल्यूम देखने को मिल रहा है, जो बाजार में सतर्कता को दर्शाता है।
सोने का चार्ट ढांचा कई महत्वपूर्ण मूविंग एवरेज के नीचे बने रहने के कारण स्पष्ट तौर पर कमजोर दिख रहा है। यह 50-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) 4,330.10 डॉलर, 100-दिवसीय SMA 4,271.35 डॉलर और 200-दिवसीय SMA 4,531.81 डॉलर से नीचे कारोबार कर रहा है। लाइव तकनीकी संकेतकों में 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 4,331 डॉलर पर और 200-दिवसीय EMA 4,439 डॉलर पर है। 50-दिवसीय EMA का 200-दिवसीय EMA से नीचे फिसलना एक क्लासिक डेथ क्रॉस का निर्माण करता है, जो दीर्घकालिक मंदी की प्रवृत्ति की पुष्टि करता है। इसके अलावा 20-दिवसीय EMA 4,281 डॉलर और 50-दिवसीय SMA 4,370 डॉलर पर स्थित है, जबकि 200-दिवसीय SMA 4,551 डॉलर पर बना हुआ है।
मोमेंटम इंडिकेटर्स की बात करें तो 14-पीरियड रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) दैनिक चार्ट पर 38 के कमजोर स्तर पर है, जबकि लाइव आंकड़ों में यह 34 पर दर्ज किया गया है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि बिकवाल पूरी तरह हावी हैं, हालांकि बाजार अभी तकनीकी रूप से अत्यधिक बिकवाली (ओवरसोल्ड) की सीमा में दाखिल नहीं हुआ है। इसके साथ ही एमएसीडी (MACD) इंडिकेटर -69.50 पर है जो इसके -49.38 के सिग्नल लाइन से नीचे है, जिसका हिस्टोग्राम -20.12 पर नकारात्मक बना हुआ है। 14-दिवसीय एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) 20 पर है, जो प्रवृत्ति में कमजोरी या एक सीमित दायरे की ओर इशारा करता है। स्टोकेस्टिक इंडिकेटर की फास्ट लाइन 8 और सिग्नल लाइन 6 पर चल रही है। 14-दिवसीय एवरेज ट्रू रेंज (ATR) 90.07 डॉलर पर है, जो दैनिक उतार-चढ़ाव के लिए स्टॉप-लॉस का अच्छा दायरा पेश करता है। बॉलिंगर बैंड्स (20,2) के तहत निचला स्तर 4,097 डॉलर और ऊपरी स्तर 4,511 डॉलर है, जिसका मध्य स्तर 4,304 डॉलर है।
कीमतों के ऊपर की ओर बढ़ने की स्थिति में पहला महत्वपूर्ण प्रतिरोध 100-दिवसीय SMA 4,271.35 डॉलर और उसके बाद 50-दिवसीय SMA 4,330.10 डॉलर पर होगा। दीर्घकालिक बाधा 200-दिवसीय SMA 4,531.81 डॉलर पर है। लाइव पिवट स्तरों के अनुसार, 4,156 डॉलर का पिवट पॉइंट है, जिसके ऊपर पहला प्रतिरोध R1 4,180 डॉलर और दूसरा प्रतिरोध R2 4,204 डॉलर पर स्थित है। यदि गिरावट जारी रहती है, तो तत्काल समर्थन S1 4,131 डॉलर पर है, जो 20-दिवसीय समर्थन स्तर भी है। इसके बाद अगला प्रमुख स्तर S2 4,107 डॉलर और फिर 3,999.65 डॉलर की ट्रेंड-लाइन है, जहां खरीदार किसी बड़े रिवर्सल का प्रयास कर सकते हैं। ऊपर की तरफ 20-दिवसीय प्रतिरोध 4,480 डॉलर के करीब है।
मुद्रास्फीति, ब्याज दरें और सोने का समीकरण
मुद्रास्फीति किसी अर्थव्यवस्था में वस्तुओं और सेवाओं की एक प्रतिनिधि टोकरी की कीमतों में होने वाली वृद्धि को मापती है। हेडलाइन मुद्रास्फीति को आमतौर पर महीने-दर-महीने (MoM) और साल-दर-साल (YoY) आधार पर प्रतिशत परिवर्तन के रूप में मापा जाता है। वहीं कोर मुद्रास्फीति में भोजन और ईंधन जैसे अत्यधिक उतार-चढ़ाव वाले घटकों को बाहर रखा जाता है, क्योंकि वे भू-राजनीतिक और मौसमी कारणों से तेजी से बदलते हैं। केंद्रीय बैंक मुख्य रूप से कोर आंकड़ों पर ध्यान केंद्रित करते हैं और उनका लक्ष्य इसे करीब 2% के आसपास प्रबंधनीय स्तर पर बनाए रखना होता है।
कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) समय के साथ उपभोक्ता वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में होने वाले बदलावों को दर्शाता है। जब कोर CPI 2% से ऊपर जाता है, तो केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए नीतिगत दरों में बढ़ोतरी करते हैं। उच्च ब्याज दरें आम तौर पर संबंधित देश की मुद्रा को मजबूती प्रदान करती हैं क्योंकि वे वैश्विक पूंजी को आकर्षित करती हैं। इसके विपरीत, मुद्रास्फीति कम होने पर ब्याज दरों में कटौती की जाती है, जिससे मुद्रा में कमजोरी आ सकती है।
पारंपरिक रूप से सोने को मुद्रास्फीति से बचाव के एक उत्कृष्ट उपकरण के रूप में देखा जाता रहा है क्योंकि यह अपनी क्रय शक्ति बनाए रखता है। हालांकि, आधुनिक बाजारों में परिदृश्य थोड़ा अलग है। जब मुद्रास्फीति अनियंत्रित होती है और केंद्रीय बैंक ब्याज दरें बढ़ाते हैं, तो सोना रखने की अवसर लागत (ऑपर्च्युनिटी कॉस्ट) काफी बढ़ जाती है। निवेशक सोने की तुलना में फिक्स्ड डिपॉजिट या सरकारी बॉन्ड जैसी ब्याज देने वाली संपत्तियों को प्राथमिकता देने लगते हैं। इसके विपरीत, जब मुद्रास्फीति नरम पड़ती है और केंद्रीय बैंक दरें घटाते हैं, तो सोने की आकर्षण क्षमता बढ़ जाती है।
वैश्विक मुद्राओं और केंद्रीय बैंकों का रुख
विदेशी मुद्रा बाजार में अन्य प्रमुख जोड़ियों में भी मिश्रित रुझान देखा जा रहा है। एशियाई कारोबारी सत्र में AUD/USD में नरमी दर्ज की गई, जिससे पिछले सप्ताह दो महीने के निचले स्तर से शुरू हुई दो दिवसीय रिकवरी थम गई। फिक्स्ड इनकम बाजार में बिकवाली के कारण अमेरिकी यील्ड बहु-वर्षीय उच्च स्तर पर टिकी हुई है। इसने भू-राजनीतिक अनिश्चितता के साथ मिलकर अमेरिकी डॉलर के रुख को सकारात्मक बनाए रखा है। हालांकि, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा चालू महीने में संभावित दर वृद्धि की उम्मीदें ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को थोड़ा सहारा दे सकती हैं।
दूसरी ओर, USD/JPY 158.00 के नीचे दायरे में कारोबार कर रहा है। बैंक ऑफ जापान (BoJ) द्वारा सख्त नीति अपनाने की अटकलों और मुद्रा बाजार में संभावित सरकारी हस्तक्षेप के डर ने जापानी येन को समर्थन दिया है। फिर भी, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और डॉलर की मजबूती व्यापारियों को किसी बड़े एकतरफा दांव से रोक रही है। इस बीच, यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) के समक्ष एक अलग चुनौती खड़ी है। सामान्य परिस्थितियों में लक्ष्य से दोगुनी महंगाई पर ब्याज दरें बढ़ाना सीधा कदम होता है, लेकिन वर्तमान में बॉन्ड बाजार खुद मौद्रिक सख्ती कर रहा है, जिससे यूरोपीय नीति निर्माताओं के लिए दुविधा बढ़ गई है।























