अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की तेज मजबूती के सामने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर दबाव में आ गया है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर टूटकर अगस्त के शुरुआती दिनों के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। बाजार में इस समय 0.7000 के बेहद संवेदनशील मनोवैज्ञानिक स्तर के पास कारोबार देखा जा रहा है। बीती रात 200 दिनों के सिंपल मूविंग एवरेज यानी 200-डे SMA के नीचे फिसलने के बाद ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा तकनीकी तौर पर काफी कमजोर स्थिति में नजर आ रही है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि बिकवाली का दबाव ऐसे ही बना रहा, तो आने वाले सत्रों में यह गिरावट 0.6970 के स्तर तक भी खिंच सकती है।
मुद्रा बाजार में चौतरफा बिकवाली और तकनीकी स्तर
अल्पकालिक ट्रेडिंग आउटलुक को देखें तो दो दिन पहले की तेज गिरावट के बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने अपनी कमजोरी को और आगे बढ़ाया और 0.7006 का निचला स्तर छुआ। दैनिक आधार पर अभी कमजोरी पूरी तरह थमी नहीं है, हालांकि तकनीकी चार्ट पर पॉजिटिव डाइवर्जेंस के संकेत भी उभर रहे हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि नीचे की तरफ फिसलने की गति में कुछ ठहराव आ सकता है और ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में बहुत भारी गिरावट की आशंका सीमित हो सकती है। मौजूदा कारोबारी दायरे की बात करें तो इसके 0.6995 से 0.7035 के बीच सीमित रहने की संभावना अधिक है। लाइव बाजार आंकड़ों के अनुसार, AUD/USD 0.7029 के आसपास कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 0.7034 से 0.07 प्रतिशत नीचे है। इसका 14-दिवसीय RSI 34 पर दर्ज किया गया है, जबकि मूल्य बोलिंजर बैंड के निचले दायरे 0.7037 के नीचे बना हुआ है।
मध्यम अवधि यानी अगले 1 से 3 सप्ताह के परिदृश्य पर नजर डालें तो बाजार का नजरिया नकारात्मक बना हुआ है। मंगलवार यानी 22 सितंबर को जब स्पॉट रेट 0.7120 पर था, तब यह संकेत मिला था कि 0.7050 तक पहुंचने की संभावना घट रही है। इसके तुरंत बाद मुद्रा 0.7050 के स्तर को तोड़ते हुए 0.7006 तक गिर गई। पिछले दो हफ्तों के दौरान आई भारी गिरावट के बावजूद यह गुंजाइश बनी हुई है कि ऑस्ट्रेलियाई डॉलर 0.6970 के समर्थन स्तर का परीक्षण कर सकता है। हालांकि, यदि कीमत में सुधार आता है और यह 0.7075 के स्तर को पार कर जाती है, तो इसे गिरावट के थमने और स्थिरता आने का पहला स्पष्ट संकेत माना जाएगा। वर्तमान में पिवट स्तर 0.7025 है, जिसमें पहला प्रतिरोध R1 0.7043 और दूसरा R2 0.7056 पर है, जबकि पहला समर्थन S1 0.7011 और दूसरा S2 0.6994 पर स्थित है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की तेजी का असर
अमेरिकी डॉलर को इस समय कई व्यापक आर्थिक कारकों से जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख की पृष्ठभूमि में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दो दिनों से जारी तेजी ने वैश्विक स्तर पर महंगाई की चिंताओं को फिर से हवा दे दी है। ईंधन की ऊंची कीमतें मुद्रास्फीति को लंबे समय तक ऊंचा बनाए रख सकती हैं, जिसकी वजह से अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड कई वर्षों के अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक भू-राजनीतिक जोखिमों ने भी सुरक्षित निवेश के रूप में अमेरिकी डॉलर की मांग को बढ़ाकर दो महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। इन वैश्विक दबावों ने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी RBA की ओर से ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी के अनुमानों पर पानी फेर दिया है और AUD/USD जोड़ी को भारी दबाव में ला दिया है।
येन, सोना और क्रिप्टोकरेंसी का बाजार रुझान
अमेरिकी डॉलर की इस तेजी का असर अन्य प्रमुख मुद्राओं और संपत्तियों पर भी साफ देखा जा रहा है। एशियाई सत्र में USD/JPY जोड़ी में थोड़ी नरमी आई और यह 159.00 के अपने तीन सप्ताह के उच्च स्तर पर रुक गई। जापानी मुद्रा में यह ठहराव संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंका के कारण आया है, जिससे येन में बिकवाली करने वाले ट्रेडर सतर्क हो गए हैं। हालांकि, बैंक ऑफ जापान यानी BoJ ने हाल ही में 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर का लक्ष्य 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है, जो नीति सामान्यीकरण की दिशा में एक कदम है। इसके बावजूद अमेरिकी डॉलर का बुलिश रुख जापानी येन पर भारी पड़ रहा है।
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में शुक्रवार को थोड़ा सुधार हुआ और यह 4,230 डॉलर के समर्थन स्तर से उछलकर 4,300 डॉलर के ठीक नीचे कारोबार करता दिखा। हालांकि, अमेरिकी केंद्रीय बैंक द्वारा दरों को ऊंचा रखे जाने की संभावना और लंबी अवधि के अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड के 5 प्रतिशत से ऊपर बने रहने के कारण कीमती धातुओं पर मंदी का व्यापक दबाव कायम है। दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी स्थिरता की कोशिशें जारी हैं। बिटकॉइन 84,000 डॉलर के स्तर के ठीक ऊपर अपने नुकसान की भरपाई करता नजर आया, जबकि एथेरियम भी बिटकॉइन की तर्ज पर कमजोर हुआ है। इसके विपरीत, रिपल यानी XRP का रुख कुछ अलग दिशा में देखने को मिला है।
अमेरिका और चीन के बीच व्यापार समझौते का विस्तार
मुद्रा और वित्तीय बाजारों के लिए भू-राजनीतिक मोर्चे पर भी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम सामने आया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने 24 सितंबर को वॉशिंगटन में एक अहम बैठक की। यह मुलाकात बीजिंग में हुई उनकी पिछली बातचीत के लगभग चार महीने बाद हुई है। इस द्विपक्षीय बैठक में दोनों नेताओं ने अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध विराम को दो महीने के लिए आगे बढ़ाते हुए 10 जनवरी 2027 तक जारी रखने पर सहमति व्यक्त की है। इसके साथ ही दोनों शीर्ष नेताओं ने यह स्पष्ट संकेत भी दिया है कि दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता आगे भी जारी रहेगी, जिससे वैश्विक व्यापार में कुछ समय के लिए अनिश्चितता टलती दिखाई दे रही है।

















