स्वीडन की अर्थव्यवस्था इस समय एक अनोखे मोड़ से गुजर रही है, जहां सरकारी राजकोषीय कदमों ने मुद्रास्फीति को कृत्रिम रूप से नीचे बनाए रखा है। केंद्रीय बैंक, रिक्सबैंक, ने अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर को 1.75 प्रतिशत पर स्थिर रखने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही किसी आक्रामक बयानबाजी से परहेज किया गया है, जो पड़ोसी नॉर्वे के केंद्रीय बैंक, नॉर्गेस बैंक, के कड़े रुख से बिल्कुल अलग दिखता है। हालांकि, बाजार विश्लेषकों का स्पष्ट अनुमान है कि साल के अंत तक रिक्सबैंक को ब्याज दरों में बढ़ोतरी की राह पकड़नी पड़ सकती है। माइकल फिस्टर और नॉर्मन लिबके जैसे विश्लेषकों के आकलन के अनुसार, ऊर्जा व खाद्य रियायतों का असर कम होते ही छिपी हुई महंगाई अचानक सिर उठा सकती है।
स्वीडिश सरकार की राजकोषीय छूट और कीमतों पर असर
यूक्रेन में संघर्ष की शुरुआत के बाद स्वीडिश प्रशासन ने आम नागरिकों को महंगाई से बचाने के लिए कई बड़े नीतिगत फैसले लिए थे। इनमें सबसे अहम कदम खाद्य पदार्थों पर लगने वाले मूल्य वर्धित कर (वैट) में भारी कटौती थी, जिसे अप्रैल महीने से 12 प्रतिशत से घटाकर 6 प्रतिशत कर दिया गया था। उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़े दर्शाते हैं कि रिटेल कारोबारियों ने इस टैक्स कटौती का पूरा फायदा ग्राहकों तक पहुंचाया, जिससे खाने-पीने की चीजों के दाम काफी नीचे आ गए।
इसके अलावा पेट्रोल और डीजल पर भी प्रत्यक्ष राहत दी गई। मई महीने में गैस स्टेशनों पर पेट्रोल की कीमतों में प्रति लीटर 1 क्रोना और डीजल में 0.4 क्रोना की कटौती लागू की गई थी। इसके बाद जुलाई में ईंधन दरों में 3 क्रोना प्रति लीटर की और भी बड़ी राहत दी गई। इन सिलसिलेवार कटौतियों का ही नतीजा है कि स्वीडन में मुद्रास्फीति अत्यधिक निचले स्तरों पर दर्ज की जा रही है, जो युद्ध शुरू होने के बाद के समय में कभी-कभी और भी नीचे फिसलती देखी गई है।
छिपी हुई महंगाई और रिक्सबैंक की भावी रणनीति
सतह पर दिख रही कम महंगाई के बावजूद अंदरूनी दबाव लगातार बना हुआ है। यदि इन अस्थायी सरकारी प्रोत्साहनों और सब्सिडी को हटाकर गणना की जाए, तो स्वीडन की वास्तविक अंतर्निहित महंगाई दर पहले ही लगभग 2 प्रतिशत के आसपास घूम रही है। रिक्सबैंक का आकलन है कि आगामी वसंत ऋतु तक कीमतों में दोबारा उछाल आना शुरू हो जाएगा। इसी कारण नीति-निर्माता मौजूदा आंकड़ों की बजाय भविष्य की संभावित मूल्य वृद्धि पर कड़ी निगाह बनाए हुए हैं।
साल के अंत तक ब्याज दरों में इजाफा करने का फैसला उन संभावित जोखिमों से निपटने के लिए तार्किक माना जा रहा है। विश्लेषकों का कहना है कि "वर्तमान में अस्थायी उपायों के बिना मुद्रास्फीति लगभग 2% रहने के कारण, आसन्न मूल्य जोखिमों का मुकाबला करने के लिए साल के अंत में प्रमुख ब्याज दर बढ़ाने के अच्छे कारण हैं।" सवाल केवल यह उठता है कि क्या अगले 12 महीनों में करीब 120 आधार अंकों की ब्याज दर वृद्धि का बाजार का मौजूदा अनुमान व्यावहारिक है। स्वीडिश क्रोना पहले से ही ब्याज दर बढ़ोतरी की उम्मीदों पर जटिल प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहा है, जिससे मुद्रा बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है।
करेंसी बाजार में तकनीकी तस्वीर और वैश्विक रुझान
मुद्रा विनिमय बाजार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले स्वीडिश क्रोना (USD/SEK) का ताजा कारोबार 9.90 पर दर्ज किया गया, जो पिछले बंद स्तर 9.92 की तुलना में 0.13 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्शाता है। इस मुद्रा जोड़ी का 52 हफ्तों का दायरा 8.77 से 9.95 के बीच रहा है, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम 20 दिनों के औसत के 1.00 गुना पर सामान्य बना हुआ है। तकनीकी संकेतकों में 14 दिवसीय आरएसआई 71 पर है, जो ओवरबॉट स्थिति का संकेत देता है, जबकि एमएसीडी 0.09 पर सिग्नल लाइन 0.06 से ऊपर रहकर 0.02 का सकारात्मक हिस्टोग्राम प्रस्तुत कर रहा है। मूविंग एवरेज के मोर्चे पर, 20-दिवसीय ईएमए 9.74, 50-दिवसीय ईएमए 9.65 और 200-दिवसीय ईएमए 9.46 पर हैं, जो गोल्डन क्रॉस के साथ दीर्घकालिक तेजी की पुष्टि करते हैं। बोलिंजर बैंड्स 9.46 से 9.96 के बीच फैले हैं और एडीएक्स 32 का मान ट्रेंडिंग मोमेंटम दिखाता है। स्टोकैस्टिक का फास्ट इंडिकेटर 87 और सिग्नल 85 पर बना हुआ है, जबकि दैनिक वोलैटिलिटी का एटीआर 0.08 दर्ज किया गया है। ट्रेडिंग के लिए पिवट पॉइंट 9.91 पर है, जिसके ऊपर रेजिस्टेंस R1 9.93 और R2 9.95 पर स्थित हैं, तथा सपोर्ट S1 9.89 और S2 9.87 के स्तर पर हैं।
अन्य अंतरराष्ट्रीय मुद्राओं और कमोडिटी का रुख
वैश्विक मंच पर, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) 200-दिवसीय एसएमए के नीचे खिसकने के बाद 0.7000 के करीब कमजोर नजर आ रहा है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड्स के बहु-वर्षीय उच्च स्तर और भू-राजनीतिक तनावों के बीच डॉलर इंडेक्स दो महीने के शिखर पर पहुंच गया है, जिसने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (आरबीए) की ब्याज दर उम्मीदों को पीछे धकेल दिया है। दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) 159.00 के तीन हफ्तों के शीर्ष स्तर से थोड़ा सुस्त हुआ है, क्योंकि निवेशकों में टोक्यो के संभावित करेंसी हस्तक्षेप को लेकर सतर्कता बढ़ गई है। बैंक ऑफ जापान ने हाल ही में 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया है, जो उसकी नीतिगत सामान्यीकरण की दिशा में अपेक्षित कदम था।
सोने के बाजार में भी उतार-चढ़ाव जारी है। कीमती धातु $4,230 के सपोर्ट स्तर से संभलकर $4,300 के ठीक नीचे कारोबार करती दिखी, लेकिन अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति और 5 प्रतिशत से ऊपर बनी ट्रेजरी यील्ड के दबाव में समग्र रुझान मंदी का ही बना हुआ है। उधर क्रिप्टो बाजार में बिटकॉइन संभलते हुए $84,000 के ऊपर टिका हुआ है, जिसके साथ एथेरियम में भी नरमी देखी गई, जबकि एक्सआरपी का प्रदर्शन इनसे अलग दिशा में रहा। इसके साथ ही, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वाशिंगटन में अपनी चार महीने पुरानी बीजिंग वार्ता के बाद 24 सितंबर को बैठक की, जहां दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय व्यापार युद्ध विराम को दो महीने और बढ़ाकर 10 जनवरी 2027 तक जारी रखने तथा वार्ता जारी रखने का ऐलान किया है।


















