अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव गहरा गया है और यह 0.7000 के बेहद नाजुक स्तर के ठीक ऊपर कारोबार करता दिखाई दे रहा है। पूरे सप्ताह के दौरान इसमें 1.3 प्रतिशत की भारी गिरावट दर्ज की गई है। दूसरी तरफ अमेरिकी डॉलर ने अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अपने प्रदर्शन को काफी मजबूत किया है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक मौद्रिक रुख और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में आई जोरदार तेजी ने डॉलर को व्यापक स्तर पर सहारा दिया है। वहीं, निवेशकों की निगाहें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई उच्चस्तरीय बैठक पर टिकी थीं, लेकिन वहां से किसी ठोस नतीजे का संकेत न मिलने से जोखिम वाली मुद्राओं को भारी झटका लगा है।
ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात में कोई ठोस सफलता नहीं
दुनिया की दो सबसे बड़ी महाशक्तियों के शीर्ष नेताओं ने आपसी संबंधों में सद्भावना तो दिखाई, मगर किसी भी निर्णायक समझौते की घोषणा नहीं हो सकी। दोनों नेताओं ने एक दूसरे की सराहना की और पारस्परिक लाभ वाले सहयोग की आवश्यकता दोहराई। दोनों नेताओं ने गुरुवार को एक साथ भोजन किया और शुक्रवार को चाय पर चर्चा करने की योजना बनाई। इन औपचारिक मुलाकातों और अच्छी बातों के बावजूद बाजार की उम्मीदों के अनुरूप कोई बड़ा नीतिगत समझौता सामने नहीं आया। ताइवान और पश्चिम एशिया के टकराव जैसे बेहद संवेदनशील और अहम मुद्दे अभी भी ठंडे बस्ते में पड़े हुए हैं। इस बेनतीजा बातचीत ने यह पूरी तरह साफ कर दिया है कि दुनिया की दो सबसे बड़ी ताकतों के बीच आपसी अविश्वास की खाई अभी भी काफी गहरी बनी हुई है, जिससे वैश्विक व्यापार धारणा कमजोर हुई है।
अगस्त के शुरुआती स्तर के बाद ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में नया निचला स्तर
एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर शुक्रवार को अगस्त की शुरुआत के बाद के अपने सबसे निचले स्तर तक लुढ़क गया। रात भर के कारोबार में 200 दिनों के सरल मूविंग एवरेज यानी 200-डे SMA के नीचे फिसलने के बाद यह मुद्रा 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के आसपास काफी कमजोर नजर आ रही है। बाजार के ताजा तकनीकी आंकड़ों के मुताबिक, AUD/USD जोड़ी का मौजूदा भाव 0.7032 पर चल रहा है, जो पिछले बंद स्तर 0.7034 से 0.03 प्रतिशत नीचे है। इसका 52 हफ्तों का दायरा 0.6422 से 0.7277 के बीच रहा है। तकनीकी संकेतकों में 14 दिनों का रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स यानी RSI 34 पर आ गया है, जबकि एमएसीडी यानी MACD मंदी के रुझान का संकेत दे रहा है। 20 दिनों का घातीय मूविंग एवरेज यानी EMA20 स्तर 0.7118 और EMA50 स्तर 0.7102 पर है, जबकि 200 दिनों का SMA स्तर 0.7021 पर दर्ज है। मुद्रा जोड़ी का भाव 20 दिनों के बॉलिंजर बैंड के निचले दायरे 0.7038 के नीचे फिसल चुका है। 14 दिनों का एडीएक्स यानी ADX 26 पर ट्रेंडिंग स्थिति दिखा रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक संकेतक पर फास्ट लाइन 11 और सिग्नल लाइन 20 पर है। कारोबारियों के लिए पिवट पॉइंट 0.7025 बना हुआ है, जबकि तात्कालिक रेजिस्टेंस R1 0.7044 और R2 0.7057 पर हैं। वहीं समर्थन स्तर S1 0.7013 और S2 0.6994 पर स्थित हैं।
कच्चे तेल की तेजी और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड ने बढ़ाया मुद्रास्फीति का डर
फेडरल रिजर्व के सख्त ब्याज दर दृष्टिकोण के बीच, कच्चे तेल की कीमतों में लगातार दो दिनों से जारी तेजी ने महंगाई बढ़ने की आशंकाओं को फिर से हवा दे दी है। इसके प्रभाव से अमेरिकी बॉन्ड यील्ड उछलकर कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई है। वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिमों ने अमेरिकी डॉलर को दो महीने के शिखर पर पहुंचा दिया है। डॉलर की इस चौतरफा मजबूती ने रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया यानी RBA द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की सभी उम्मीदों और दांवों पर पानी फेर दिया है, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी पर बिकवाली का भारी दबाव बना हुआ है।
जापानी येन और सोने की चाल पर भी डॉलर की तेजी का असर
विदेशी मुद्रा बाजार में केवल ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ही नहीं, बल्कि अन्य संपत्तियां भी डॉलर के बढ़ते दबदबे से जूझ रही हैं। शुक्रवार को एशियाई सत्र में USD/JPY जोड़ी में हल्की नरमी देखी गई, जिससे तीन सप्ताह के उच्च स्तर 159.00 की ओर इसका हालिया जोरदार उछाल कुछ हद तक थम गया। जापानी अधिकारियों द्वारा मुद्रा बाजार में संभावित हस्तक्षेप के डर से येन के मंदड़ियों ने सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है। हालांकि, फेड के सख्त रुख और तेल की कीमतों से उपजी महंगाई के कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के बहु-वर्षीय शिखर पर टिके रहने से डॉलर को अभी भी जोरदार समर्थन मिल रहा है। इसके अतिरिक्त, बैंक ऑफ जापान यानी BoJ ने हाल ही में 7-2 के बहुमत से अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत किया था। हालांकि यह मौद्रिक नीति सामान्यीकरण की दिशा में एक कदम था, लेकिन यह बाजार की पुरानी उम्मीदों के पूरी तरह अनुकूल रहा और इसका रुख नरम माना गया, जिससे येन की तेजी सीमित रह सकती है।
दूसरी ओर, पीली धातु यानी सोना भी किसी बड़ी बढ़त को हासिल करने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहा है। शुक्रवार को यूरोपीय सत्र की शुरुआत तक सोना साप्ताहिक निचले स्तरों के करीब एक सीमित दायरे में फंसा रहा। हालांकि अमेरिकी डॉलर में दो महीने के शिखर से आई मामूली तकनीकी गिरावट ने सोने को कुछ निचला सहारा जरूर दिया, लेकिन अमेरिकी फेडरल रिजर्व के आक्रामक दृष्टिकोण, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड के ऊंचे स्तरों और वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बने रहने से डॉलर के खरीदारों का पलड़ा भारी दिख रहा है, जिससे सोने में किसी बड़े सुधार की गुंजाइश सीमित हो गई है।
















