अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में लंबे समय से जारी अमेरिकी डॉलर की बढ़त अब थमती नजर आ रही है। हाल ही में सामने आए अमेरिका के रोजगार आंकड़ों में नरमी दर्ज की गई है, जिससे विदेशी मुद्रा बाजार में डॉलर पर मामूली दबाव बना है। हालांकि श्रम बाजार अब भी लचीला बना हुआ है और इसमें न तो अत्यधिक तेजी है और न ही भारी गिरावट की स्थिति, लेकिन ब्याज दरों को लेकर बाजार का आक्रामक रुख अब अपने उच्चतम स्तर को छू चुका माना जा रहा है। विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में अमेरिका और यूरोप दोनों ही क्षेत्रों में दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदें नरम पड़ सकती हैं, जिसके चलते डॉलर में किसी नई ऊंचाई के बजाय हर तेजी पर बिकवाली की रणनीति अधिक प्रभावी साबित हो रही है।
मुद्रा बाजारों में उतार-चढ़ाव और प्रमुख जोड़ियों की स्थिति
अमेरिकी डॉलर अपने 17 महीने के उच्च स्तर से पीछे हट गया है, क्योंकि निवेशक और ट्रेडर महत्वपूर्ण गैर-कृषि पेरोल (एनएफपी) रिपोर्ट के विस्तृत पहलुओं के सामने आने से पहले अपना मुनाफा समेटने में जुटे हैं। इस उठापटक के बीच ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) एशियाई सत्र के दौरान शुक्रवार को सुधरकर 0.6950 की ओर बढ़ता दिखा। वैश्विक स्तर पर बांड यील्ड में बढ़ोतरी और मुद्रास्फीति के बढ़ते जोखिमों के मद्देनजर नवंबर में ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक की ओर से संभावित ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदों ने इस मुद्रा को निचली सतह से मजबूत सहारा दिया है।
दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) 158.00 के आसपास संघर्षरत बना हुआ है। टोक्यो में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) के आंकड़े अनुमान से अधिक गर्म रहने और डॉलर में व्यापक सुस्ती आने के कारण यह जोड़ी अपनी साप्ताहिक सीमा के ऊपरी दायरे से नीचे खिसक गई है। मुद्रा व्यापारी नए रोजगार और आर्थिक आंकड़ों के मद्देनजर अपनी रणनीतियों को दोबारा संतुलित कर रहे हैं।
यूरो में ऐतिहासिक गिरावट और ऊर्जा संकट का दबाव
यूरोपीय साझा मुद्रा यूरो (EUR/USD) की हालत काफी नाजुक बनी हुई है। यह मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है। बुधवार के कारोबारी सत्र में यह जोड़ी 1.1312 तक लुढ़क गई थी, जो जनवरी में दर्ज किए गए 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। इस गिरावट की मुख्य वजह डॉलर की मजबूत स्थिति, वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं और यूरोप का महंगे ऊर्जा संसाधनों के प्रति संवेदनशील होना है। ऊर्जा संकट और चढ़ती बांड यील्ड शांत कारोबारी सप्ताह के दौरान भी बाजार की दिशा तय करने में मुख्य भूमिका निभा रहे हैं।
सोने की चाल और डिजिटल परिसंपत्तियों में सुधार
कीमती धातुओं के बाजार में सोना गैर-कृषि पेरोल के बाद शुरू हुई तेजी को 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के पार बरकरार रखने में असमर्थ रहा। सप्ताहांत के नजदीक आते ही यह कीमती धातु 4,180 डॉलर के दायरे में वापस फिसल गई। अमेरिकी डॉलर में ताजा बिकवाली के बावजूद सोने की चाल अनिर्णायक बनी हुई है क्योंकि निवेशक पेरोल आंकड़ों के दीर्घकालिक प्रभावों का आकलन कर रहे हैं।
इसके विपरीत, डिजिटल परिसंपत्तियों यानी क्रिप्टोकरेंसी बाजार में शुक्रवार को व्यापक सुधार देखने को मिला। बिटकॉइन 86,000 डॉलर के पार निकल गया है, जिससे पूरे क्षेत्र में धारणा बेहतर हुई। एथेरियम ने भी 2,700 डॉलर के ऊपर चढ़कर अपना सकारात्मक रुख मजबूत किया है, हालांकि 2,800 डॉलर के पास इसका तात्कालिक प्रतिरोध बना हुआ है। इस बीच रिपल लगभग 1.54 डॉलर के आसपास कारोबार कर रहा है।
आगामी आर्थिक घटनाक्रम और नीतिगत संकेत
वित्तीय बाजारों की नजर अब फेडरल रिजर्व की आगामी बैठकों के कार्यवृत्त (मिनट्स) पर टिकी है, क्योंकि अक्टूबर में ब्याज दर वृद्धि की संभावनाओं में उल्लेखनीय कमी आई है। इसके अतिरिक्त, आईएसएम सर्विसेज पीएमआई और अमेरिकी ट्रेजरी की नीलामी पर भी करीबी नजर रखी जाएगी। अंतरराष्ट्रीय मोर्चे पर कनाडा के रोजगार आंकड़े, जापान में वेतन वृद्धि के आंकड़े और यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ईसीबी) की नीतिगत बैठकों के ब्योरे भी अगले कुछ दिनों में वैश्विक मुद्रा प्रवाह और ब्याज दरों के भविष्य की दिशा तय करेंगे।

















