ऑस्ट्रेलिया में उपभोक्ता मुद्रास्फीति के नवीनतम अनुमान बताते हैं कि देश में महंगाई का दबाव बना हुआ है, जिससे केंद्रीय बैंक द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना पर चर्चा तेज हो गई है। टीडी सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का मानना है कि कोर मुद्रास्फीति के आंकड़े ऊंचे स्तर पर बने रह सकते हैं, जिसमें मुख्य योगदान आवास लागत और श्रम बाजार की मजबूती का है।
कोर मुद्रास्फीति का अनुमान और आधिकारिक लक्ष्य
रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया देश की अर्थव्यवस्था में अंतर्निहित मूल्य वृद्धि को मापने के लिए ट्रिम्ड मीन इंडिकेटर का उपयोग करता है। दूसरी तिमाही (Q2) के लिए, कोर कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) में तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 0.9% की बढ़ोतरी का अनुमान जताया गया है। यह आंकड़ा बाजार के आम सहमति अनुमान 0.9% के बिल्कुल बराबर है और पहली तिमाही (Q1) में दर्ज की गई 0.8% की दर से थोड़ा अधिक है।
यदि दूसरी तिमाही के ये अनुमान सही साबित होते हैं, तो सालाना कोर मुद्रास्फीति दर 3.7% पर पहुंच जाएगी। हालांकि यह आंकड़ा रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया के मई मॉनेटरी पॉलिसी स्टेटमेंट में लगाए गए 3.8% के अनुमान से मामूली रूप से कम है, फिर भी यह दिखाता है कि मुद्रास्फीति का दबाव अभी भी बना हुआ है। इसके अलावा, जून महीने के लिए हेडलाइन CPI के सालाना आधार पर 4.2% रहने का अनुमान है, जो 4.0% के बाजार सर्वसम्मति अनुमान से अधिक है।
आवास लागत और मजबूत लेबर मार्केट से बढ़ा दबाव
ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था में कई ऐसे क्षेत्र हैं जो महंगाई की दर को ऊपर बनाए रखने में योगदान दे रहे हैं। बढ़ते किराए और नए मकानों की खरीदारी पर आने वाली ऊंची लागत को मुद्रास्फीति अनुमानों के लिए सबसे बड़ा जोखिम माना जा रहा है। ये स्थानीय कारक केंद्रीय बैंक के लिए मौद्रिक नीतियों के जरिए मांग को नियंत्रित करने की चुनौती को और बढ़ा रहे हैं।
इसके साथ ही, देश में लेबर मार्केट की मजबूती भी महंगाई में नरमी आने से रोक रही है। मजबूत रोजगार आंकड़ों की वजह से आम उपभोक्ताओं की क्रय क्षमता बनी हुई है, जिससे कीमतों पर दबाव कम नहीं हो रहा। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगर कोर मुद्रास्फीति के आंकड़े ज्यादा गर्म आते हैं, तो आने वाले समय में रिजर्व बैंक द्वारा ब्याज दरों में एक और बढ़ोतरी करने की बहस काफी तेज हो सकती है।
अमेरिकी डॉलर की मजबूती और वैश्विक बाजारों की स्थिति
एक तरफ जहां ऑस्ट्रेलिया के घरेलू आंकड़े ब्याज दरों के रुख को प्रभावित कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय मुद्रा और कमोडिटी बाजारों में वैश्विक मौद्रिक नीतियों को लेकर सतर्कता देखी जा रही है। अमेरिका में दो दिवसीय फेडरल रिजर्व पॉलिसी मीटिंग से पहले निवेशकों की सतर्कता की वजह से अमेरिकी डॉलर एक महीने के उच्चतम स्तर पर बना हुआ है। इसके अलावा शेयर बाजारों में बिकवाली की वजह से सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों की मांग बढ़ी है, जिससे डॉलर को समर्थन मिल रहा है।
अमेरिकी डॉलर की इस चौतरफा मजबूती से दुनिया भर के प्रमुख करेंसी पेयर्स और गोल्ड की कीमतों पर दबाव देखा गया है
- GBP/USD: ब्रिटिश पाउंड 1.3270 के स्तर के आसपास जुलाई के नए निचले स्तर पर दबाव में कारोबार कर रहा है, क्योंकि फेडरल रिजर्व के फैसले से पहले निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया हुआ है।
- EUR/USD: यूरोपियन ट्रेडिंग सेशन के दौरान यूरो भी अपने मासिक निचले स्तर mid-1.1300s के पास ही स्थिर बना हुआ है और ट्रेडर्स किसी भी बड़ी पोजीशन से बचते दिख रहे हैं।
- गोल्ड (XAU/USD): सोने की हाजिर कीमतें $4000 के मनोवैज्ञानिक स्तर की ओर नीचे झुकती दिख रही हैं। $4100 से ऊपर टिकने में मिली नाकामी के बाद अमेरिकी डॉलर में आई तेजी से गोल्ड में गिरावट का रुझान बना हुआ है।



















