अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय बाजार में बुधवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन के बीच का विनिमय भाव लगभग स्थिर बना रहा। यह मुद्रा युग्म 110.55 के स्तर के आस-पास कारोबार करता दिखाई दिया, जिसमें कारोबारी दिन के दौरान कोई विशेष बदलाव दर्ज नहीं हुआ। इस मुद्रा विनिमय दर का संतुलन दो प्रमुख केंद्रीय बैंकों के आगामी फैसलों के बीच फंसा हुआ है। एक तरफ जहां जापान में मौद्रिक नीति को और कड़ा किए जाने की पूरी तैयारी है, वहीं दूसरी तरफ ऑस्ट्रेलिया में भी नीतिगत ब्याज दरों में संभावित बढ़ोतरी की उम्मीदें इस विनिमय दर को आधार प्रदान कर रही हैं। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय बाजार में ऊर्जा की बढ़ती कीमतें जापानी अर्थव्यवस्था के लिए नई चुनौतियां खड़ी कर रही हैं, क्योंकि देश अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर करता है।
जापानी केंद्रीय बैंक की आगामी बैठक पर टिकी निगाहें
वैश्विक वित्तीय बाजारों का पूरा ध्यान इस शुक्रवार को होने वाले बैंक ऑफ जापान के मौद्रिक नीति निर्णय पर लगा हुआ है। मुद्रा विनिमय बाजारों ने इस बैठक में नीतिगत ब्याज दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि की पूरी संभावना को पहले ही अपने अनुमानों में शामिल कर लिया है। यदि यह कदम उठाया जाता है, तो जापान में नीतिगत ब्याज दर वर्तमान 1% से बढ़कर 1.25% के स्तर पर पहुंच जाएगी। जापानी वित्तीय प्रणाली के लिए यह निर्णय ऐतिहासिक महत्व रखेगा, क्योंकि ब्याज दरों में इतनी बढ़ोतरी होने पर देश में ऋण लेने की लागत अप्रैल 1995 के बाद से अपने सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच जाएगी।
एक दशक से भी अधिक समय तक जापान की अत्यधिक कम ब्याज दरों ने वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में प्रमुख भूमिका निभाई थी। इसी नीति के कारण जापानी येन पूरी दुनिया में वित्तपोषण के सबसे सस्ते स्रोतों में से एक बन गया था। लंबे समय तक जहां दुनिया की अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं महंगाई से निपटने के लिए ब्याज दरों में लगातार इजाफा कर रही थीं, वहीं जापान इस दौड़ से पूरी तरह बाहर बना हुआ था। अब जब बैंक ऑफ जापान द्वारा अपनी मौद्रिक नीतियों को फिर से कड़ा करने की उम्मीद जताई जा रही है, तब यह सस्ता वित्तपोषण लाभ एक नए चरण में प्रवेश कर सकता है।
ऊर्जा कीमतों का दबाव और भू-राजनीतिक तनाव
ब्याज दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों के बावजूद जापानी येन को ऊर्जा की बढ़ती कीमतों के कारण विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है। मध्य पूर्व में जारी संघर्ष और बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल और ईंधन की कीमतों में तेजी का दौर बना हुआ है। जापान बड़े पैमाने पर ऊर्जा संसाधनों के आयात पर निर्भर रहता है, जिसके चलते तेल की कीमतों में लगातार हो रही यह वृद्धि देश के कुल आयात बिल को बहुत तेजी से बढ़ा देती है। इसका सीधा प्रतिकूल असर जापान के व्यापार संतुलन पर पड़ता है, जो घरेलू मुद्रा पर अतिरिक्त दबाव बनाता है।
दूसरी ओर अमेरिकी डॉलर और जापानी येन के बीच के कारोबार में भी तेज उतार-चढ़ाव देखा गया है। एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान यह विनिमय दर 155.00 के स्तर को पार करते हुए एक सप्ताह के नए उच्च स्तर पर पहुंच गई। तेल से उत्पन्न महंगाई की आशंकाएं और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा संभावित दर वृद्धि की उम्मीदों ने अमेरिकी बॉन्ड यील्ड को कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है। इसके अतिरिक्त, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अमेरिकी डॉलर की वैश्विक आरक्षित मुद्रा की स्थिति को मजबूती दी है। हालांकि, फेडरल रिजर्व के फैसले और गुरुवार से शुरू होने वाली बैंक ऑफ जापान की बैठक से पहले यह विनिमय दर 155.50 के स्तर से नीचे ही बनी रही।
ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक का रुख और डॉलर का प्रदर्शन
मुद्रा युग्म के ऑस्ट्रेलियाई हिस्से की बात करें तो वहां की घरेलू मौद्रिक नीति संबंधी अपेक्षाएं ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को मजबूती प्रदान कर रही हैं। रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया ने साल की शुरुआत में लगातार तीन बार ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने के बाद, अपनी पिछली तीन बैठकों में आधिकारिक नकद दर को 4.35% पर यथावत बनाए रखा है। हालांकि, देश में लगातार बनी हुई मुद्रास्फीति के दबाव के चलते बाजार में दरों को और कड़ा किए जाने की उम्मीदें फिर से मजबूत होने लगी हैं।
आरबीए रेट ट्रैकर के आंकड़ों के अनुसार, वित्तीय बाजार इस बात की लगभग 78% संभावना मान रहे हैं कि ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक की अगली बैठक में आधिकारिक नकद दर को बढ़ाकर 4.6% किया जा सकता है। इन आक्रामक अनुमानों के कारण ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और जापानी येन के विनिमय भाव में भारी गिरावट सीमित रहने में मदद मिल रही है। इसके बावजूद, इस मुद्रा जोड़ी की अल्पावधि दिशा पूरी तरह से शुक्रवार को बैंक ऑफ जापान द्वारा दिए जाने वाले नीतिगत संदेश पर टिकी रहेगी।
वैश्विक मुद्राओं का तुलनात्मक परिदृश्य और अमेरिकी बाजार के आंकड़े
बुधवार के कारोबारी सत्र में प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के प्रदर्शन में मिला-जुला रुख देखने को मिला। प्रमुख मुद्राओं की सूची में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने ब्रिटिश पाउंड के मुकाबले सबसे अधिक मजबूती दर्ज की। विभिन्न मुद्राओं के आपसी प्रतिशत बदलाव को दर्शाने वाले हीट मैप के अनुसार, आधार मुद्रा और कोट मुद्रा के बीच सापेक्षिक संतुलन में निरंतर उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया।
वहीं अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का रुख लगातार तीसरे कारोबारी दिन नकारात्मक बना रहा। एशियाई सत्र में यह मुद्रा 0.7100 के स्तर की रक्षा करते हुए लगभग एक महीने के निचले स्तर के करीब कारोबार करती देखी गई। मजबूत होता अमेरिकी डॉलर दो सप्ताह के उच्च स्तर के करीब बना हुआ है। अमेरिकी आर्थिक परिदृश्य की बात करें तो अगस्त महीने की रोजगार रिपोर्ट काफी मजबूत रही थी, जिसने दरों को लेकर बाजार में आक्रामक उम्मीदें जगाई थीं। हालांकि, हाल ही में जारी अगस्त महीने के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के आंकड़ों का प्रभाव बाजार पर अधिक महत्वपूर्ण माना गया। मध्य पूर्व के तनाव ने भी सुरक्षित निवेश माने जाने वाले अमेरिकी डॉलर को सहारा दिया है और जोखिम-संवेदनशील ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव डाला है।
सोने के भाव और निवेशकों की सतर्कता
यूरोपीय कारोबारी सत्र के पहले हिस्से में सोने की कीमतों में मामूली इंट्राडे बढ़त देखी गई, लेकिन यह बढ़त मजबूत खरीदारी में तब्दील नहीं हो सकी और भाव 4,350 डॉलर के स्तर से नीचे ही बने रहे। दो सप्ताह के उच्च स्तर से अमेरिकी डॉलर में हुए कुछ मुनाफे की वसूली ने सोने को हल्का समर्थन जरूर दिया। इसके बावजूद प्रमुख केंद्रीय बैंकों के नीतिगत निर्णयों से जुड़े जोखिमों को देखते हुए कारोबारी किसी भी दिशा में बड़े सौदे करने से बचते नजर आए और बाजार में प्रतीक्षा की मुद्रा बनी रही।



















