अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में शुक्रवार, 18 सितंबर को भारी हलचल देखने को मिली, जहां अमेरिकी डॉलर प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले मजबूती के साथ टिका रहा। एक तरफ बैंक ऑफ जापान ने अपनी नीतिगत ब्याज दर में 25 आधार अंकों की वृद्धि कर इसे 1.25% कर दिया, जो 1995 के बाद का इसका उच्चतम स्तर है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिकी फेडरल रिजर्व की आगामी बैठकों को लेकर सख्त उम्मीदों ने डॉलर को भारी सहारा दिया। जापानी येन के खिलाफ डॉलर ने खासी बढ़त हासिल की और यह एशियाई तथा यूरोपीय सत्रों के दौरान 157.00 के स्तर के पार निकल गया। वैश्विक विनिमय बाजार में यह उलटफेर ऐसे समय सामने आया है जब निवेशक ब्याज दरों में आगे होने वाले बदलावों और मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अपनी रणनीतियों का पुनर्मूल्यांकन कर रहे हैं।
फेडरल रिजर्व की संभावित दर वृद्धि और सीएमई फेडवॉच का गणित
अमेरिकी मुद्रा को मजबूती देने वाला सबसे बड़ा कारक ब्याज दरों में नई बढ़ोतरी की लगातार बढ़ती उम्मीदें हैं। सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के अनुसार, मुद्रा बाजार अब अक्टूबर में होने वाली फेडरल रिजर्व की अगली बैठक में दर वृद्धि की लगभग 53.1% संभावना मानकर चल रहा है। केवल एक दिन पहले तक यह संभावना लगभग 44% के आसपास आंकी जा रही थी। इस तेज बदलाव ने डॉलर के पक्ष में माहौल तैयार किया है, क्योंकि ऋण की ऊंची लागत अंतरराष्ट्रीय पूंजी को आकर्षित करती है।
फेड फंड्स दर वह रातों-रात की ब्याज दर होती है जिस पर अमेरिकी वाणिज्यिक बैंक एक-दूसरे को धन उधार देते हैं। यह मानक दर फेडरल रिजर्व की फेडरल ओपन मार्केट कमेटी द्वारा अपनी नीतिगत बैठकों में एक दायरे के रूप में तय की जाती है, जैसे कि 4.75%-5.00% का दायरा, जहां अक्सर ऊपरी सीमा यानी 5.00% को मुख्य संदर्भ के रूप में उद्धृत किया जाता है। जब सीएमई फेडवॉच टूल के जरिए निवेशक इन दरों में आगे और इजाफे का अनुमान लगाते हैं, तो इसका सीधा असर वैश्विक वित्तीय परिसंपत्तियों, सरकारी बॉन्ड यील्ड और विदेशी मुद्रा दरों पर पड़ता है।
बैंक ऑफ जापान का ऐतिहासिक फैसला और आंतरिक मतभेद
बैंक ऑफ जापान ने व्यापक बाजार अपेक्षाओं के अनुरूप अपनी बेंचमार्क नीतिगत दर को 1.00% से 25 आधार अंक बढ़ाकर 1.25% करने का फैसला किया। यह कदम जापानी अर्थव्यवस्था के लिए ऐतिहासिक माना जा रहा है क्योंकि 1995 के बाद से देश में ब्याज दरें इस ऊंचाई पर कभी नहीं पहुंची थीं। हालांकि, नीति निर्धारण बोर्ड के भीतर इस कदम को लेकर सर्वसम्मति नहीं थी और यह फैसला 7-2 के बहुमत से पारित हुआ। बोर्ड के दो सदस्यों, तोइचिरो असादा और अयानो सातो ने इस दर वृद्धि का विरोध किया और अपनी असहमति दर्ज कराई।
केंद्रीय बैंक ने स्पष्ट किया कि जापान में अंतर्निहित मुद्रास्फीति के 2% के तय लक्ष्य से ऊपर निकल जाने का वास्तविक जोखिम बना हुआ है। बैंक ऑफ जापान ने मूल्य स्थिरता के लक्ष्य को स्थायी रूप से हासिल करने के लिए ब्याज दरों में आगे भी बढ़ोतरी जारी रखने और मौद्रिक समर्थन की सीमा को समायोजित करने की प्रतिबद्धता दोहराई। बैंक ने स्वीकार किया कि मध्य पूर्व के भू-राजनीतिक जोखिम, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से जुड़ी मांग और विदेशी मुद्रा बाजार की तेज अस्थिरता लगातार निगरानी की मांग कर रहे हैं। हालांकि बोर्ड में तोइचिरो असादा और अयानो सातो की असहमति ने मौद्रिक सामान्यीकरण की गति को लेकर आंतरिक बहस को उजागर किया, फिर भी मध्यम आर्थिक सुधार और 2% के आसपास महंगाई स्थिर रहने का मूल परिदृश्य नीतिगत रुख को सख्त बनाए रखता है।
मुद्राओं का हीट मैप और येन पर बना भारी दबाव
शुक्रवार को प्रमुख मुद्राओं के बीच हुए उतार-चढ़ाव में अमेरिकी डॉलर विशेष रूप से जापानी येन के मुकाबले सबसे मजबूत बनकर उभरा। वैश्विक विनिमय हीट मैप पर जब आधार मुद्रा के रूप में अमेरिकी डॉलर और कोट मुद्रा के रूप में जापानी येन के अनुपात को देखा गया, तो इसमें डॉलर की व्यापक मजबूती परिलक्षित हुई। आमतौर पर जब कोई केंद्रीय बैंक ब्याज दर बढ़ाता है, तो उसकी मुद्रा में उछाल आना चाहिए, लेकिन नीतिगत दर 1.25% होने और सख्त नीतिगत बयान के बावजूद जापानी येन बिकवाली के भारी दबाव में आ गया।
दशकों से जापान की शून्य या बेहद कम ब्याज दरों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों में खरबों डॉलर के निवेश को वित्तपोषित करने में मदद की है, जिसने जापानी येन को दुनिया भर में पूंजी जुटाने का सबसे सस्ता स्रोत यानी कैरी ट्रेड का मुख्य साधन बना दिया था। जहां अधिकांश बड़ी अर्थव्यवस्थाओं ने महंगाई से निपटने के लिए ब्याज दरों में आक्रामक बढ़ोतरी की थी, वहीं जापान लंबे समय तक अपवाद बना रहा। अब जब बैंक ऑफ जापान धीरे-धीरे मौद्रिक सख्ती के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है, तब भी दो बोर्ड सदस्यों की असहमति और वैश्विक स्तर पर अमेरिकी दरों के और ऊंचे बने रहने की संभावनाओं ने येन की बढ़त को रोक दिया। यूरोपीय और एशियाई सत्रों में यूएसडी/जेपीवाई 157.00 से ऊपर उछलने के बाद ताजा लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार 156.85 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले 156.13 के बंद भाव से 0.46% अधिक है।
यूओबी ग्रुप की चेतावनी: एशियाई मुद्राओं पर पूंजी बहिर्वाह का खतरा
यूओबी ग्रुप के रणनीतिकारों ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि एशियाई विदेशी मुद्राएं एक बार फिर नए दबाव में आ सकती हैं। उनका विश्लेषण है कि बाजार जिस तरह फेड द्वारा आगे और दरें बढ़ाए जाने का मूल्य निर्धारण कर रहे हैं, वह स्थिति इस पूरे क्षेत्र से संस्थागत पोर्टफोलियो के भारी बहिर्वाह को भड़का सकती है। रणनीतिकारों का मानना है कि यदि पूंजी बाहर निकलती है, तो इस वर्ष एशिया डॉलर इंडेक्स में दर्ज की गई बढ़त और सुधार गंभीर खतरे में पड़ जाएगा।
यूओबी ग्रुप के विश्लेषकों ने यह भी रेखांकित किया कि अगस्त के महीने में अमेरिकी ट्रेजरी का बायबैक कार्यक्रम एशियाई मुद्राओं के लिए एक अप्रत्याशित अनुकूल सहारा बनकर आया था, जिसने डॉलर के अवमूल्यन के व्यापार को पुनर्जीवित किया था। लेकिन वर्तमान परिस्थितियों में विश्लेषकों का मानना है कि इस ट्रेजरी बायबैक का प्रभाव अब फेडरल रिजर्व के आक्रामक और सख्त रुख के आगे पूरी तरह गौण हो चुका है। अमेरिकी ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे बने रहने की संभावनाओं ने क्षेत्रीय एशियाई मुद्राओं को गिरावट के प्रति अत्यधिक संवेदनशील और असुरक्षित बना दिया है।
भू-राजनीतिक अनिश्चितता: ट्रंप का ईरान पर बड़ा फैसला
मुद्रा बाजार केवल केंद्रीय बैंकों के ब्याज दर निर्णयों से ही संचालित नहीं हो रहे, बल्कि भू-राजनीतिक तनाव भी सुरक्षित निवेश वाली संपत्तियों की मांग तय कर रहा है। एक्सियोस के हवाले से सामने आए विवरण के अनुसार, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को कहा कि वह इस बात पर एक बड़ा निर्णय लेने के करीब पहुंच रहे हैं कि क्या ईरान पर बड़े पैमाने पर हमलों को फिर से शुरू किया जाए। वाशिंगटन इस बात का आकलन करने में जुटा है कि महीनों से चल रहे इस युद्ध को किस तरह समाप्त किया जाए।
युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के बढ़ते खतरे अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को सतर्क रुख अपनाने पर मजबूर कर रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में डॉलर एक सुरक्षित निवेश विकल्प के रूप में उभरा है, जिससे अन्य उभरती और प्रमुख मुद्राओं के लिए डॉलर के दबाव का मुकाबला करना और अधिक कठिन हो जाता है।
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का लचीलापन और बॉन्ड यील्ड की स्थिति
जहां येन पर दबाव दिखा, वहीं ऑस्ट्रेलियाई डॉलर ने शुक्रवार को एशियाई सत्र के दौरान कुछ सकारात्मक गति बनाए रखी। एयूडी/यूएसडी लगातार दूसरे दिन बढ़त के रुझान के साथ कारोबार करता दिखा और 0.7100 के स्तर से ऊपर टिका रहा। इस जोड़ी को अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आई नरमी से सहारा मिला, जिसने डॉलर के खरीदारों को कुछ हद तक पीछे धकेला।
इसके साथ ही, रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की गवर्नर बुलॉक की सख्त टिप्पणियों ने वहां भी दर वृद्धि की उम्मीदों को हवा दी, जिससे ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को आवश्यक समर्थन प्राप्त हुआ। हालांकि, फेडरल रिजर्व का सख्त नीतिगत दृष्टिकोण और ईरान को लेकर बनी वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताएं डॉलर की किसी भी बड़ी गिरावट को सीमित कर रही हैं, जिसने इस मुद्रा जोड़ी की बढ़त पर एक ऊपरी दायरा तय कर दिया है।
ब्याज दर तंत्र, डॉलर की ताकत और सोने का बाजार
ब्याज दरें वित्तीय तंत्र का वह बुनियादी पहिया हैं जो उधारकर्ताओं से ऋण के बदले वसूला जाता है और बचतकर्ताओं तथा जमाकर्ताओं को ब्याज के रूप में दिया जाता है। वाणिज्यिक बैंकों की ये दरें सीधे तौर पर केंद्रीय बैंकों द्वारा तय की जाने वाली आधार उधारी दरों से प्रभावित होती हैं, जिनका उपयोग आर्थिक परिस्थितियों को संतुलित रखने के लिए किया जाता है। आमतौर पर केंद्रीय बैंकों का प्राथमिक दायित्व मूल्य स्थिरता बनाए रखना होता है, जिसका मानक लक्ष्य लगभग 2% की मुख्य मुद्रास्फीति दर हासिल करना होता है।
यदि किसी अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति 2% के लक्ष्य से नीचे गिरती है, तो केंद्रीय बैंक ऋण वितरण को प्रोत्साहित करने और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए आधार दरों में कटौती करता है। इसके विपरीत, जब महंगाई 2% के स्तर से काफी ऊपर निकल जाती है, तो केंद्रीय बैंक मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने के लिए दरें बढ़ाता है। उच्च ब्याज दरें आमतौर पर किसी देश की मुद्रा को मजबूत बनाती हैं, क्योंकि वे वैश्विक निवेशकों को अपना पैसा वहां लगाने के लिए अधिक आकर्षक प्रतिफल प्रदान करती हैं।
दूसरी ओर, उच्च ब्याज दरों का सीधा नकारात्मक असर सोने की कीमतों पर पड़ता है। ऊंची दरों के कारण उन संपत्तियों को अपने पास रखने की अवसर लागत बढ़ जाती है जो कोई ब्याज नहीं देतीं, जैसे कि सोना। निवेशक सोने के बजाय ब्याज देने वाली संपत्तियों या बैंक जमा में पूंजी लगाना अधिक लाभदायक मानते हैं। इसके अलावा, ऊंची दरें अमेरिकी डॉलर को मजबूत करती हैं, और चूंकि सोने का अंतरराष्ट्रीय मूल्य डॉलर में आंका जाता है, इसलिए मजबूत डॉलर सोने की मांग और कीमतों को दबाने का काम करता है। शुक्रवार को सुबह के कारोबार में सोना $4,350 के आसपास अपनी पिछली रिकवरी को बनाए रखने में सफल रहा, हालांकि खरीदार सतर्क बने रहे। गुरुवार को सोने का भाव अपने 100-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज के ऊपर लगभग $4,320 पर बंद हुआ था, जहां इसका दैनिक आरएसआई तटस्थ बना हुआ था। कच्चे तेल की गिरती कीमतों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में ठहराव के कारण डॉलर की सीमित चाल ने सोने को कुछ सुरक्षा प्रदान की।
तकनीकी संकेतक और विनिमय बाजार का आगामी परिदृश्य
यूएसडी/जेपीवाई के तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो ताजा लाइव बाजार विश्लेषण के अनुसार इसकी कीमत 156.85 पर स्थित है, जो 146.61 से 163.98 के 52-सप्ताह के दायरे में आती है। मुद्रा जोड़ी का 14-दिवसीय आरएसआई 49 पर है, जो पूरी तरह तटस्थ स्थिति को दर्शाता है। एमएसीडी सूचकांक -1.05 पर है जबकि सिग्नल लाइन -1.24 पर है, जिसका 0.19 का सकारात्मक हिस्टोग्राम तेजी का संकेत दे रहा है। 20-दिवसीय ईएमए 156.47, 50-दिवसीय ईएमए 158.10 और 200-दिवसीय ईएमए 157.62 दर्ज किया गया है, जिसमें 50-दिवसीय और 200-दिवसीय ईएमए के बीच गोल्डन क्रॉस बना हुआ है, हालांकि मध्यम अवधि का मूल्य व्यवहार दबाव में रहा है।
20-दिवसीय बोलिंजर बैंड 151.92 के निचले और 161.61 के ऊपरी स्तर के बीच फैला हुआ है, जबकि मध्य बैंड 156.76 पर है और मौजूदा भाव बैंड के भीतर है। 14-दिवसीय एडीएक्स 39 पर होने से बाजार में मजबूत ट्रेंडिंग गति दिखाई देती है, जबकि स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 53 और सिग्नल लाइन 46 पर है। 1.47 का 14-दिवसीय एटीआर दैनिक उतार-चढ़ाव की सीमा को दर्शाता है, जिसमें 20-दिवसीय समर्थन स्तर लगभग 152.90 और प्रतिरोध लगभग 160.38 पर स्थित है। दैनिक पिवट स्तर 156.85 पर बना हुआ है। अब विनिमय बाजार के सभी प्रतिभागियों की नजरें बैंक ऑफ जापान के गवर्नर उएदा की प्रेस कॉन्फ्रेंस पर टिकी हैं, जहां से मिलने वाले संकेत तय करेंगे कि येन अपनी गिरावट को थाम पाता है या डॉलर का दबदबा आगे भी कायम रहेगा।



















