वैश्विक मुद्रा बाजार इस समय केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीतियों, कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक बदलावों के बीच तालमेल बैठाने में जुटे हैं। जापानी येन पर ऊर्जा दरों में हालिया उछाल के कारण दबाव बना हुआ है, लेकिन देश के मजबूत व्यापक आर्थिक आंकड़े आने वाले हफ्तों में इसकी संभावित रिकवरी की ओर संकेत करते हैं। दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर में देखी जा रही व्यापक कमजोरी से ब्रिटिश पौंड और यूरो जैसी यूरोपीय मुद्राओं को बढ़त हासिल करने का मौका मिला है।
जापान की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों में बढ़ोतरी का गणित
बैंक ऑफ जापान द्वारा जून में ब्याज दरों में की गई बढ़ोतरी के बाद अपनी नीतिगत दर को 1.00% पर बरकरार रखने का अनुमान जताया जा रहा है। जापान में मुद्रास्फीति की दर अभी भी केंद्रीय बैंक के तय लक्ष्य से नीचे बनी हुई है, जिसके कारण वित्तीय बाजार भविष्य में दर वृद्धि की धीमी गति का अनुमान लगा रहे हैं। ब्राउन ब्रदर्स हैरीमैन के विशेषज्ञ इलियास हदाद के अनुसार, मनी मार्केट में इस साल के अंत तक दरों में 25bps की बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा, अगले 12 महीनों के दौरान कुल मिलाकर 60bps की बढ़ोतरी का अनुमान है, जिससे जापान की नीतिगत दर 1.50% से 1.75% के बीच पहुंच सकती है।
अगर यह दर वृद्धि अनुमानों के अनुरूप होती है, तो जापान की बेंचमार्क ब्याज दर बैंक ऑफ जापान द्वारा अनुमानित 1.10% से 2.50% के न्यूट्रल रेंज के बिल्कुल मध्य में आ जाएगी। यह नीतिगत बदलाव ऐसे समय में देखा जा रहा है जब जापान की अर्थव्यवस्था अपनी वास्तविक क्षमता से ऊपर काम कर रही है। आमतौर पर जब कोई अर्थव्यवस्था अपनी क्षमता से बेहतर प्रदर्शन करती है और ब्याज दरों में बढ़ोतरी होती है, तो इससे राष्ट्रीय मुद्रा को मजबूती मिलती है।
कच्चे तेल की कीमतों का झटका और USD/JPY की स्थिति
जापान के मजबूत आंतरिक आर्थिक आंकड़ों के बावजूद, पिछले हफ्ते USD/JPY की विनिमय दर में जोरदार तेजी देखी गई और यह लगभग 40 साल के उच्चतम स्तर के करीब पहुंच गई। इस विनिमय दर में आई तेजी का मुख्य कारण अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में दर्ज की गई तेज बढ़ोतरी है। जापान ऊर्जा संसाधनों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर रहता है, इसलिए वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल के दाम बढ़ने से देश के व्यापार संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है और येन पर गिरावट का दबाव बनता है।
इलियास हदाद का मानना है कि यदि कच्चे तेल का यह नया झटका नहीं लगा होता, तो जापान का व्यापक आर्थिक परिदृश्य आने वाले हफ्तों में जापानी येन (JPY) की मजबूती के पक्ष में होता। अगर वैश्विक ऊर्जा बाजार में स्थिरता आती है, तो जापानी येन को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले फिर से बढ़त हासिल करने में मदद मिल सकती है।
पौंड और यूरो में मजबूती, डॉलर पर दिखा दबाव
एशियाई बाजारों से इतर, यूरोपीय सत्र के दौरान प्रमुख यूरोपीय मुद्राओं में अच्छी तेजी देखी गई। ब्रिटिश पौंड ने शुक्रवार को अपने तीन हफ्ते के निचले स्तर से हुई मामूली रिकवरी को आगे बढ़ाया और सप्ताह की शुरुआत में GBP/USD 1.3350 के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया। पौंड में लगातार दूसरे दिन यह तेजी दर्ज की गई, जिसे मिडल ईस्ट में जारी संघर्ष के थमने और अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी से सहारा मिला।
मुद्रा बाजार के निवेशक इस सप्ताह के अंत में होने वाली फेड और बैंक ऑफ इंग्लैंड की नीतिगत घोषणाओं का भी बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। इन दोनों प्रमुख केंद्रीय बैंकों के फैसले आगामी दिनों में वैश्विक फॉरेक्स बाजार की दिशा तय करेंगे।
दूसरी तरफ, EUR/USD ने भी यूरोपीय सत्र के दौरान 1.1400 के महत्वपूर्ण स्तर के पास अपनी बढ़त बनाए रखी। यूरो में दर्ज की गई इस तेजी को कमजोर पड़ते अमेरिकी डॉलर से समर्थन मिला। अमेरिका और ईरान के बीच पिछले पांच महीनों से चल रहे युद्ध को कूटनीतिक रास्ते से समाप्त करने की नई उम्मीदों ने निवेशकों के रुझान को सकारात्मक बनाया है। जैसे-जैसे भू-राजनीतिक तनाव में नरमी के संकेत मिल रहे हैं और केंद्रीय बैंकों की बैठकें करीब आ रही हैं, व्यापारी डॉलर की चाल पर पैनी नजर बनाए हुए हैं।



















