मैक्सिको के केंद्रीय बैंक बैंक्सिको (Banco de México) ने व्यापक वित्तीय बाजार की उम्मीदों के अनुरूप अपनी ओवरनाइट नीतिगत ब्याज दर को 6.50% के स्तर पर स्थिर बनाए रखने का फैसला किया है। केंद्रीय बैंक के गवर्निंग बोर्ड ने अपने ताजा मौद्रिक नीति बयान में अपनी आगे की रणनीति यानी फॉरवर्ड गाइडेंस में उल्लेखनीय बदलाव दर्ज किए हैं। इस नए रुख के तहत बैंक ने संकेत दिया है कि मैक्सिको की नीतिगत दिशा अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के संभावित कदमों से सीधे तौर पर नहीं जुड़ी रहेगी, जिससे दोनों देशों की मौद्रिक नीतियों के बीच एक स्पष्ट डिकपलिंग देखने को मिल रही है।
फेडरल रिजर्व से अलग नीतिगत रुख की रूपरेखा
केंद्रीय बैंक के नीतिगत बयान के विश्लेषण से स्पष्ट होता है कि मैक्सिको की घरेलू व्यापक आर्थिक स्थितियां संयुक्त राज्य अमेरिका से काफी भिन्न हैं। इसी कारण से बैंक के गवर्निंग बोर्ड का मानना है कि मैक्सिको की मौद्रिक नीति को अमेरिकी फेडरल फंड्स दर में होने वाले अनुमानित बदलावों पर यांत्रिक या स्वचालित तरीके से प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता नहीं है। बैंक अपने प्राथमिक अधिदेश पर अडिग रहते हुए देश में कम और स्थिर मुद्रास्फीति का वातावरण तैयार करने के प्रयासों को जारी रखेगा।
बैंक्सिको के नीति निर्माताओं ने स्पष्ट किया है कि भविष्य के फैसलों में चल रही डिसइन्फ्लेशन प्रक्रिया और उसके प्रमुख निर्धारकों के व्यवहार को गहराई से परखा जाएगा। इसमें उपभोक्ता कीमतों पर विनिमय दर का प्रभाव, अर्थव्यवस्था में मौजूदा सुस्ती की स्थिति और समग्र मुद्रास्फीति की प्रत्याशाएं शामिल हैं। बोर्ड का यह भी मानना है कि मौजूदा 6.50% की ब्याज दर वर्तमान वृहद आर्थिक चुनौतियों और अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का सामना करने के लिए पूरी तरह अनुकूल है।
मुद्रास्फीति का दृष्टिकोण और उभरते जोखिम
मुद्रास्फीति के मोर्चे पर बैंक्सिको का अनुमान अधिकांशतः स्थिर बना हुआ है, हालांकि चालू वर्ष की तीसरी और चौथी तिमाही (Q3 और Q4) के लिए कोर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के अनुमानों में मामूली बढ़ोतरी की गई है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण बैंक के मुद्रास्फीति परिदृश्य में ऊपर की ओर जाने वाले जोखिमों में इजाफा हुआ है। हालांकि घरेलू अर्थव्यवस्था में सुस्ती का कुछ प्रभाव कीमतों को नीचे खींचने में मददगार है, लेकिन बैंक ने जोर देकर कहा है कि पूर्वानुमानित अवधि के भीतर मुद्रास्फीति के प्रक्षेपवक्र के लिए जोखिमों का संतुलन अब भी ऊपर की ओर झुका हुआ है। वित्तीय विश्लेषकों का मानना है कि बैंक दरें स्थिर रखने के पक्ष में है, परंतु यदि जोखिम बढ़ते हैं तो भविष्य में दर वृद्धि की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता।
वैश्विक मुद्रा और बॉन्ड बाजारों की हलचल
वैश्विक विनिमय बाजारों में भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों और बढ़ती अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का गहरा असर देखा जा रहा है। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) में लगातार चौथे दिन गिरावट दर्ज की गई और यह अपने महत्वपूर्ण 200-दिवसीय एसएमए के नीचे फिसलते हुए 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब पहुंच गया। अमेरिकी डॉलर के मजबूत होने से अन्य प्रमुख मुद्राओं पर भी भारी दबाव देखने को मिल रहा है।
दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) तीन सप्ताह के उच्च स्तर से पीछे हटकर 158.00 के करीब ठहराव दिखाता नजर आया। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, USD/JPY 158.86 पर कारोबार कर रहा है जो पिछले बंद 158.26 से 0.37% अधिक है। 52-सप्ताह के 149.41 से 163.98 के दायरे में यह मुद्रा जोड़ी दीर्घकालिक अपट्रेंड में बनी हुई है, जहां 14-दिवसीय आरएसआई 59 और स्टोकेस्टिक फास्ट लाइन 97 पर है। जापानी सरकारी बॉन्ड यील्ड में तेजी और संभावित बाजार हस्तक्षेप के जोखिमों ने येन को सहारा दिया, लेकिन फेड की दर वृद्धि के दांव से डॉलर दो महीने के उच्चतम स्तर के करीब टिका रहा। इस बीच बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण की दिशा में एक और कदम उठाते हुए अपनी अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 7-2 के बहुमत से 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है, जो बाजार के पूर्व अनुमानों के अनुरूप रहा।
सोने की कीमतों पर अमेरिकी यील्ड का दबाव
सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की कीमतों में भी नरमी का रुख देखा गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना बुधवार की गिरावट को आगे बढ़ाते हुए कुछ समय के लिए 4,250 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नीचे फिसल गया, जिसके बाद इसमें सीमित सुधार का प्रयास हुआ। अमेरिकी डॉलर की मजबूती, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में निरंतर उछाल और फेडरल रिजर्व द्वारा अतिरिक्त दर वृद्धि की संभावनाओं ने कीमती धातु पर दबाव बनाए रखा है।



















