सिंगापुर की अर्थव्यवस्था में अगस्त के महीने में हेडलाइन और कोर मुद्रास्फीति दोनों में दर्ज की गई तेजी ने केंद्रीय बैंक की अनुमानित सीमा के ऊपरी स्तर को छू लिया है। इसके बावजूद आने वाले महीनों में वेतन से जुड़े दबावों में नरमी आने की संभावना को देखते हुए यह माना जा रहा है कि मौद्रिक प्राधिकरण अपनी आगामी समीक्षा में मौजूदा नीतिगत रुख को बरकरार रख सकता है। सेवा क्षेत्र, खुदरा उत्पादों, खानपान की वस्तुओं और जनोपयोगी सेवाओं की कीमतों में हुए इजाफे ने इस मूल्य वृद्धि में मुख्य भूमिका निभाई है। यदि वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल व ऊर्जा की कीमतों में उछाल के कारण आयातित महंगाई और अधिक व्यापक नहीं होती है, तो नीति निर्माताओं को ब्याज दरों अथवा मौद्रिक सख्ती में कोई त्वरित बदलाव करने की आवश्यकता महसूस नहीं होगी।
मुद्रास्फीति के ताजा आंकड़े और अनुमानित दायरा
अगस्त के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार सिंगापुर की हेडलाइन मुद्रास्फीति सालाना आधार पर 2.3% दर्ज की गई, जबकि पिछले महीने यानी जुलाई में यह 2.2% के स्तर पर थी। यह वृद्धि बाजार के विश्लेषकों के अनुमानों के बिल्कुल अनुरूप रही है। लगातार तीसरे महीने तेज होती यह दर जुलाई 2024 के बाद का उच्चतम स्तर दर्शाती है। वहीं निजी परिवहन और आवास खर्च को अलग रखकर आंकी जाने वाली कोर उपभोक्ता मूल्य सूचकांक दर अगस्त में बढ़कर 2.2% पर पहुंच गई, जो जुलाई में 2.0% दर्ज की गई थी। कोर मुद्रास्फीति का यह स्तर ब्लूमबर्ग के सर्वसम्मति अनुमान 2.2% के सटीक बराबर है।
सिंगापुर का मौद्रिक प्राधिकरण यानी मॉनेटरी अथॉरिटी ऑफ सिंगापुर वर्ष 2026 के लिए महंगाई दर का अनुमानित दायरा 1.5% से 2.5% के बीच तय किए हुए है। अगस्त के आंकड़ों के साथ ही हेडलाइन और कोर दोनों ही महंगाई दरें लगातार दूसरे महीने इस तय दायरे के ऊपरी हिस्से में बनी हुई हैं। हालांकि यह सीमा के भीतर ही स्थित हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि कीमतें अधिक ऊंचाई पर होने के बावजूद फिलहाल अनुमानित दायरे के बाहर नहीं भटकी हैं।
अक्टूबर की मौद्रिक नीति समीक्षा और रुख
अगस्त के मजबूत आंकड़ों के बावजूद मौद्रिक नीति के मोर्चे पर किसी नई सख्ती की तात्कालिक जरूरत सीमित नजर आ रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि महंगाई अब भी प्राधिकरण के आधिकारिक लक्ष्य दायरे के अंदर सीमित है। आने वाले महीनों में कर्मचारियों के वेतन में होने वाली बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी पड़ने का अनुमान है, जिससे कंपनियों पर लागत बढ़ाने का दबाव घटेगा और केंद्रीय बैंक के लिए नीति को और सख्त करने की जल्दबाजी कम होगी।
अक्टूबर में निर्धारित मौद्रिक समीक्षा के दौरान नीति को यथावत रखने के लिए पर्याप्त गुंजाइश बनी हुई है। हालांकि नीति निर्माताओं की नजर इस बात पर टिकी रहेगी कि क्या समग्र अर्थव्यवस्था में मूल्य वृद्धि का फैलाव गंभीर रूप ले रहा है या फिर वैश्विक ऊर्जा बाजार में हालिया हलचल से आयातित लागतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं। जब तक ये जोखिम विकराल रूप नहीं लेते, तब तक नीतिगत दरों में किसी हस्तक्षेप की संभावना बेहद कम है।
विदेशी मुद्रा बाजार में सिंगापुर डॉलर की चाल
मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर की चौतरफा मजबूती के चलते हाल ही में USD/SGD विनिमय दर में 0.4% की बढ़त देखी गई और यह 1.2800 के स्तर पर पहुंच गई। यह 13 अगस्त के बाद का इसका उच्चतम बंद स्तर रहा। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में मजबूती और फेडरल रिजर्व की ओर से सख्त मौद्रिक रुख की अटकलों ने ग्रीनबैक को व्यापक समर्थन दिया है।
इसके बावजूद अगर लंबी अवधि के प्रदर्शन पर नजर डालें तो सिंगापुर डॉलर इस वर्ष पूरे एशिया में तीसरा सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला देश बन चुका है। चालू वर्ष में अब तक अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सिंगापुर डॉलर में 0.4% की मजबूती दर्ज की गई है। इसके उलट जापान को छोड़कर अन्य एशियाई देशों की मुद्राओं में इस वर्ष औसतन 1.71% की गिरावट आई है, जो सिंगापुर डॉलर की अंतर्निहित मजबूती और स्थिरता को स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
एशियाई बाजारों और प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में हलचल
एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर 0.7000 के स्तर की तरफ फिसलता नजर आया। ऑस्ट्रेलिया के अगस्त रोजगार आंकड़ों में बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6% हो गई, जबकि अर्थशास्त्रियों ने इसके 4.5% रहने की उम्मीद जताई थी। हालांकि इसी अवधि में रोजगार परिवर्तन का आंकड़ा 39.5K रहा, जिसने पूर्व अनुमानों को पीछे छोड़ दिया। मुद्रा बाजार के कारोबारी डोनाल्ड ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच होने वाली अहम बैठक को लेकर भी सतर्क बने हुए हैं।
दूसरी ओर USD/JPY तीन हफ्तों के अपने उच्च स्तर से नीचे गिरकर 158.00 के आसपास कारोबार करता दिखा। जापानी सरकारी बॉन्ड यील्ड में उछाल और बैंक ऑफ जापान द्वारा संभावित हस्तक्षेप के जोखिम ने येन को सहारा दिया। वहीं फेडरल रिजर्व के आक्रामक रुख और अमेरिकी ट्रेजरी प्रतिफल में तेजी के बल पर डॉलर इंडेक्स दो महीने के उच्च स्तर पर टिका रहा। बैंक ऑफ जापान ने एक अहम कदम उठाते हुए 7-2 के बहुमत से अपनी अल्पकालिक ब्याज दर का लक्ष्य 1.00% से बढ़ाकर 1.25% कर दिया है, जो मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में बाजार की उम्मीदों के अनुरूप उठाया गया कदम है।
सोने की कीमतों पर अमेरिकी दरों का दबाव
वैश्विक कमोडिटी बाजार में सोने के भाव में बुधवार की गिरावट के बाद सुस्ती बनी रही। गुरुवार को उत्तरी अमेरिकी सत्र के उत्तरार्ध में सोने की कीमत प्रति ट्रॉय औंस 4,250 डॉलर से नीचे लुढ़क गई और इसके बाद आने वाला सुधार काफी कमजोर रहा। अमेरिकी डॉलर का मजबूत रुख, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़त और फेडरल रिजर्व द्वारा आगे और ब्याज दरें बढ़ाए जाने की संभावनाओं ने कीमती धातु पर दबाव बनाए रखा है।



















