मेक्सिको के केंद्रीय बैंक, जिसे बैंक्सिको के नाम से जाना जाता है, ने अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दर को बिना किसी बदलाव के 6.50 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया है। नीति निर्धारण समिति के सभी सदस्यों ने इस निर्णय का एकमत से समर्थन किया। बैंक का मुख्य उद्देश्य देश की घरेलू मुद्रा, मैक्सिकन पेसो (MXN) के मूल्य की रक्षा करना और मुद्रास्फीति को नियंत्रित स्तरों पर बनाए रखना है। संस्थान का लक्ष्य महंगाई दर को 3 प्रतिशत के लक्षित बिंदु के करीब स्थिर रखना है, जिसके लिए 2 प्रतिशत से 4 प्रतिशत का टॉलरेंस बैंड निर्धारित किया गया है।
मौद्रिक नीति और मुद्रा के बीच संतुलन
बैंक्सिको अर्थव्यवस्था को दिशा देने के लिए मुख्य रूप से ब्याज दरों के समायोजन का उपयोग करता है। जब महंगाई निर्धारित सीमा से बाहर निकलती है, तो केंद्रीय बैंक दरों में वृद्धि करता है। इस कदम से आम परिवारों और कारोबारी संस्थानों के लिए कर्ज लेना महंगा हो जाता है, जिससे आर्थिक गतिविधियों की गति धीमी होती है और मांग घटने से मूल्य वृद्धि पर रोक लगती है। आमतौर पर ऊंची ब्याज दरें मैक्सिकन पेसो के लिए सकारात्मक मानी जाती हैं, क्योंकि इससे निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलता है और देश में विदेशी पूंजी का आकर्षण बढ़ता है। इसके विपरीत, ब्याज दरों में कटौती से पेसो पर दबाव बनता है और वह कमजोर पड़ सकता है। अमेरिकी डॉलर (USD) और मैक्सिकन पेसो के बीच ब्याज दर का यह अंतर, विशेष रूप से अमेरिकी फेडरल रिजर्व (फेड) की नीतियों की तुलना में, विनिमय दर को तय करने वाला एक अत्यंत संवेदनशील पहलू साबित होता है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के निर्णयों का सीधा असर
बैंक्सिको की गवर्निंग काउंसिल एक कैलेंडर वर्ष के दौरान कुल आठ बार मौद्रिक समीक्षा के लिए बैठक करती है। इसकी नीतियां काफी हद तक अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा उठाए जाने वाले कदमों से जुड़ी रहती हैं। इसी कारण से बैंक्सिको की निर्णय समिति आमतौर पर फेड की बैठक के ठीक एक सप्ताह बाद समीक्षा के लिए जुटती है। इस व्यवस्था के माध्यम से मेक्सिको का केंद्रीय बैंक अमेरिकी कदमों पर त्वरित प्रतिक्रिया देने के साथ-साथ कई मौकों पर उससे पहले ही सुरक्षात्मक कदम उठाता है। उदाहरण के लिए, कोविड-19 महामारी के दौर के बाद जब अमेरिकी फेड ने दरों में बढ़ोतरी शुरू नहीं की थी, तब बैंक्सिको ने पहले ही अपनी ब्याज दरों को बढ़ाना शुरू कर दिया था। इस शुरुआती पहल का मकसद मैक्सिकन पेसो में भारी गिरावट के जोखिम को कम करना और देश से अचानक पूंजी पलायन को रोकना था, जिससे राष्ट्रीय वित्तीय स्थिरता प्रभावित हो सकती थी।
वैश्विक मुद्रा बाजारों में डॉलर का दबाव और उतार-चढ़ाव
केंद्रीय बैंकों के इन फैसलों और व्यापक आर्थिक आंकड़ों के बीच गुरुवार को एशियाई सत्र के दौरान अन्य प्रमुख संपत्तियों में भी स्पष्ट उतार-चढ़ाव देखा गया। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) की विनिमय दर 0.7000 के स्तर की ओर फिसलती नजर आई। ऑस्ट्रेलिया के अगस्त महीने के रोजगार आंकड़ों के अनुसार बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत हो गई, जबकि बाजार को इसके 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान था। हालांकि, रोजगार सृजन का आंकड़ा अनुमानों से बेहतर रहा और यह 39.5K दर्ज किया गया। मुद्रा बाजार के कारोबारी आगामी ट्रंप और शी की महत्वपूर्ण बैठक को लेकर भी सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। दूसरी तरफ, अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) की जोड़ी अपने तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर से फिसलकर एशियाई सत्र में 158.00 के करीब आ गई। जापानी सरकारी बॉन्ड की बढ़ती यील्ड और मुद्रा बाजार में संभावित सरकारी हस्तक्षेप की आशंकाओं ने येन को सहारा दिया, जबकि फेडरल रिजर्व की सख्त नीतिगत उम्मीदों और ऊंची अमेरिकी यील्ड के चलते अमेरिकी डॉलर दो महीने के उच्चतम स्तर के आसपास बना रहा।
सोने की कीमतों में गिरावट और बैंक ऑफ जापान का बड़ा कदम
अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की चाल भी अमेरिकी आर्थिक संकेतों से प्रभावित रही। बहुमूल्य पीली धातु बुधवार की गिरावट के बाद गुरुवार को उत्तरी अमेरिकी सत्र के उत्तरार्ध में एक समय 4,250 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के नीचे फिसल गई, जिसके बाद उसमें एक सीमित सुधार की कोशिश देखी गई। अमेरिकी डॉलर का मजबूत रुख, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल और फेड द्वारा ब्याज दरों में अतिरिक्त बढ़ोतरी की आशंकाओं ने सोने की कीमतों पर लगातार दबाव बनाए रखा। इस बीच, एशियाई क्षेत्र में मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए बैंक ऑफ जापान (BoJ) ने अपने अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। नीति समिति ने 7-2 के बहुमत से यह बढ़ोतरी लागू की, जो कई हफ्तों से वित्तीय बाजारों की व्यापक उम्मीदों के पूरी तरह अनुकूल रही।


















