वैश्विक वित्तीय बाजारों में मुद्रा जोड़े लगातार सीमित दायरे में कारोबार कर रहे हैं। मंगलवार के सत्र के दौरान एशियाई कारोबार के शुरुआती घंटों में ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर लगभग 1.3630 के आसपास बनी हुई है। मुद्रा बाजार में लगातार दूसरे दिन सुस्त और दायरे में सिमटी हुई हलचल देखने को मिल रही है, जिससे निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है।
अमेरिकी डॉलर अपनी हालिया रिकवरी को आगे बढ़ाने की कोशिश में है। यह रिकवरी उस स्तर के बाद आई है जो 14 मई के बाद से सबसे निचले पायदान पर थी। डॉलर की यह मजबूती मुद्रा जोड़े पर सीधा दबाव बना रही है। हालांकि, बिकवाली का दबाव बहुत ज्यादा तेज नहीं है, जिससे मंदी की ओर देखने वाले कारोबारियों को भी सतर्कता बरतने की सलाह दी जा रही है।
फेडरल रिजर्व के अनुमान और भू-राजनीतिक कारक
बाजार में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि महंगाई के आंकड़े फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों में बढ़ोतरी के लिए प्रेरित कर सकते हैं। इसके अलावा दुनिया भर में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव भी अमेरिकी मुद्रा को समर्थन दे रहे हैं। ये तमाम कारक मिलकर हाजिर कीमतों पर लगाम कस रहे हैं और पाउंड को बड़ी छलांग लगाने से रोक रहे हैं।
दूसरी ओर, मंदी की स्थिति में नीचे की तरफ मुख्य तकनीकी समर्थन 200-day एसएमए 1.3431 के स्तर पर बना हुआ है। यदि इस महत्वपूर्ण दायरे से नीचे लगातार गिरावट दर्ज होती है, तो यह मौजूदा सकारात्मक रुख को कमजोर कर सकती है। ऐसे में बाजार में एक बड़े सुधारात्मक दौर की शुरुआत होने की पूरी आशंका बन जाएगी।
बॉन्ड यील्ड और अमेरिकी राष्ट्रीय कर्ज का असर
इसी बीच वैश्विक बाजारों में अन्य संपत्तियों की हलचल भी मुद्रा बाजार को प्रभावित कर रही है। ट्रेजरी विभाग की विस्तारित बायबैक रणनीति के कारण अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में शुरुआती गिरावट देखने को मिली थी, लेकिन यह असर ज्यादा लंबा नहीं टिक सका। अमेरिका का कुल राष्ट्रीय कर्ज 40 ट्रिलियन डॉलर के आंकड़े को पार कर चुका है, जिससे निवेशकों में चिंताएं बढ़ रही हैं।
अमेरिकी ट्रेजरी ने अपने नियमित कैलेंडर से हटकर एक बड़ा कदम उठाया है। ट्रेजरी विभाग ने 10-वर्षीय से 20-वर्षीय और 20-वर्षीय से 30-वर्षीय क्षेत्रों में लिक्विडिटी सपोर्ट बायबैक ऑपरेशंस के आकार को दोगुना करने का निर्णय लिया है। इसके तहत अधिकतम सीमा को प्रति ऑपरेशन 2 बिलियन डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 बिलियन डॉलर कर दिया गया है। यह व्यवस्था 9 सितंबर से प्रभावी होकर 4 नवंबर तक चलेगी।
अन्य प्रमुख मुद्राओं और सर्राफा बाजार की स्थिति
मुद्रा बाजार के व्यापक परिदृश्य पर नजर डालें तो अमेरिकी डॉलर के मुकाबले अन्य प्रमुख मुद्राओं में भी उतार-चढ़ाव जारी है। वॉल स्ट्रीट के पिछले सत्र के समापन के बाद से यूरोपीय मुद्रा लगभग 1.1660 के आसपास कमजोर रुख के साथ कारोबार कर रही है। अमेरिकी डेटा रिलीज और जैक्सन होल में होने वाले भाषण से पहले बाजार में चौतरफा सावधानी का माहौल है।
दूसरी ओर, एशियाई सत्र के दौरान सोने की कीमतों में भी हलचल देखी गई। पीली धातु ने 14 मई के बाद का अपना नया उच्चतम स्तर छुआ, हालांकि यह 4,700 डॉलर के मनोवैज्ञानिक आंकड़े को पार करने में विफल रही। इस बीच लाइव बाजार डेटा के अनुसार, ब्रिटिश पाउंड वर्तमान में 1.36 पर कारोबार कर रहा है, जबकि इसका पिछला बंद भाव 1.37 (-0.16 प्रतिशत) रहा। इस जोड़े का 52-सप्ताह का दायरा 1.30 से 1.38 के बीच रहा है और तकनीकी संकेतक जैसे 14-अवधि का आरएसआई 66 पर बना हुआ है।



















