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राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अब स्कूलों के 50 मीटर दायरे में जंक फूड की बिक्री पर पूरी तरह रोकराजस्थान
25 अग॰ 2026, 10:12 am (1 घंटे पहले)· 2

राजस्थान हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, अब स्कूलों के 50 मीटर दायरे में जंक फूड की बिक्री पर पूरी तरह रोक

राजस्थान हाईकोर्ट ने बच्चों के स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए स्कूलों और उनके 50 मीटर के दायरे में जंक फूड की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है। कोर्ट ने स्कूलों में खाद्य सुरक्षा समितियां बनाने और ग्रामीण स्कूलों के औचक निरीक्षण के भी निर्देश दिए हैं।

जोधपुर में बच्चों की सेहत और खान-पान की आदतों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण और कड़ा निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्कूलों के भीतर और उनके आसपास के इलाकों में अनहेल्दी खान-पान पर नकेल कसने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत न केवल स्कूल कैंटीनों में बल्कि स्कूल के मुख्य द्वार से 50 मीटर के दायरे के भीतर भी जंक फूड की बिक्री पर सख्त रोक लगा दी गई है। इस प्रतिबंध की जद में वे सभी खाद्य पदार्थ आएंगे जिनमें वसा, चीनी और नमक की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिसे एचएफएसएस के रूप में जाना जाता है।

न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढंढ की एकल पीठ ने बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य और उनके उज्जवल भविष्य को सर्वोपरि रखते हुए इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान लिया। अदालत के इस आदेश के बाद अब स्कूलों के आसपास चिप्स, कार्बोनेटेड कोल्ड ड्रिंक, ट्रांस फैट से भरपूर बेकरी आइटम्स और अन्य तमाम प्रकार के जंक फूड खुलेआम नहीं बेचे जा सकेंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य कम उम्र के बच्चों को अनहेल्दी खान-पान के दुष्प्रभावों से बचाना और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास एक स्वास्थ्यवर्धक माहौल तैयार करना है ताकि वे शारीरिक रूप से मजबूत बन सकें।

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केवल खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाकर ही मामला नहीं छोड़ा गया है, बल्कि अदालत ने स्कूलों के भीतर बच्चों के पोषण, खाद्य सुरक्षा और उनकी बदलती जीवनशैली से जुड़े कई अन्य अहम मुद्दों पर भी कड़े निर्देश दिए हैं। आजकल के बच्चों में लगातार बढ़ते मोबाइल स्क्रीन टाइम को लेकर भी अदालत ने अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है और स्वस्थ दिनचर्या अपनाने पर जोर दिया है। इसके साथ ही प्रत्येक विद्यालय में एक विशेष खाद्य सुरक्षा एवं पोषण समिति का गठन करने का आदेश दिया गया है, जो स्कूल परिसर में मिलने वाले खाने-पीने के सामान की गुणवत्ता पर पैनी नजर रखेगी।

प्रशासनिक स्तर पर भी इस आदेश को सख्ती से लागू करवाने की तैयारी कर ली गई है। सभी जिला कलेक्टरों और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के स्कूलों का नियमित रूप से दौरा और निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। इतना ही नहीं, सभी कलेक्टरों को विशेष रूप से यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे ग्रामीण इलाकों के स्कूलों का औचक निरीक्षण करें और अपनी रिपोर्ट पेश करें। इस पूरी व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी और निजी दोनों ही तरह के संस्थानों में बच्चे बेहतर माहौल में शिक्षा और पोषण प्राप्त करें।

स्कूल कैंटीनों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए भी समयसीमा तय की गई है। अदालती निर्देशों के अनुसार सभी स्कूलों को आगामी आठ हफ्तों के भीतर अपनी कैंटीन में एक प्रमुख मेन्यू बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा। इस बोर्ड पर बेचे जाने वाले हर खाद्य पदार्थ की कैलोरी और उससे मिलने वाले पोषण की पूरी जानकारी साफ-साफ शब्दों में लिखी होनी चाहिए ताकि बच्चे और उनके अभिभावक यह जान सकें कि वे क्या खा रहे हैं। इसके अलावा, स्कूलों में चलने वाले मिड-डे मील यानी मध्याह्न भोजन और अन्य सरकारी पोषण योजनाओं में भी संतुलित आहार के तय मानकों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि किसी भी स्तर पर कोताही न बरती जा सके।

सवाल-जवाब

राजस्थान हाईकोर्ट ने स्कूलों के आसपास किस पर रोक लगाई है?
कोर्ट ने स्कूलों के भीतर और स्कूल गेट से 50 मीटर के दायरे में हाई फैट, शुगर और सॉल्ट वाले जंक फूड, चिप्स और कार्बोनेटेड ड्रिंक्स की बिक्री पर रोक लगाई है।
स्कूलों को कितने दिनों के भीतर खाद्य सुरक्षा समिति बनानी होगी?
सभी स्कूलों को चार सप्ताह के भीतर अपनी स्कूल खाद्य सुरक्षा एवं पोषण समिति का गठन करना होगा।
कैंटीन में मेन्यू बोर्ड लगाने के लिए कितना समय दिया गया है?
स्कूलों को आठ सप्ताह के भीतर कैंटीन में कैलोरी और पोषण संबंधी जानकारी वाला मेन्यू बोर्ड लगाना होगा।
ग्रामीण स्कूलों के निरीक्षण की जिम्मेदारी किसे दी गई है?
सभी जिला कलेक्टरों को ग्रामीण स्कूलों का औचक निरीक्षण कर आठ सप्ताह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·57 मिनट पहले

राजस्थान हाईकोर्ट का यह स्वतः संज्ञान और 50 मीटर के दायरे में जंक फूड पर प्रतिबंध एक बड़ा कानूनी कदम है। अदालती आदेश में खाद्य सुरक्षा समितियों के गठन, मेन्यू बोर्ड पर कैलोरी की जानकारी और ग्रामीण स्कूलों के औचक निरीक्षण के निर्देश दिए गए हैं। अब असली चुनौती जिला कलेक्टरों और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों के स्तर पर इसकी ज़मीनी अमलीकरण और सख्त निगरानी की होगी ताकि आदेश कागजों तक सीमित न रहें।

Rohan Verma@rohan-verma·57 मिनट पहले

करण मल्होत्रा के इस विश्लेषण से पूरी तरह सहमत हूँ कि इस बड़े न्यायिक फैसले की असली कसौटी ज़मीनी अमलीकरण होगी। जिला कलेक्टरों और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को सौंपी गई औचक निरीक्षण की जिम्मेदारी यह तय करेगी कि ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के स्कूलों में आदेश कागजों तक सीमित न रहें। अब प्रशासनिक मशीनरी और खाद्य सुरक्षा समितियों के बीच जमीनी स्तर पर समन्वय ही यह तय करेगा कि बच्चों की सेहत को लेकर कोर्ट के इन निर्देशों का कितना सख्त और प्रभावी पालन हो पाता है।

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