जोधपुर में बच्चों की सेहत और खान-पान की आदतों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने एक बहुत ही महत्वपूर्ण और कड़ा निर्णय सुनाया है। अदालत ने स्कूलों के भीतर और उनके आसपास के इलाकों में अनहेल्दी खान-पान पर नकेल कसने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इसके तहत न केवल स्कूल कैंटीनों में बल्कि स्कूल के मुख्य द्वार से 50 मीटर के दायरे के भीतर भी जंक फूड की बिक्री पर सख्त रोक लगा दी गई है। इस प्रतिबंध की जद में वे सभी खाद्य पदार्थ आएंगे जिनमें वसा, चीनी और नमक की मात्रा बहुत अधिक होती है, जिसे एचएफएसएस के रूप में जाना जाता है।
न्यायमूर्ति अनूप कुमार ढंढ की एकल पीठ ने बच्चों के शारीरिक स्वास्थ्य और उनके उज्जवल भविष्य को सर्वोपरि रखते हुए इस पूरे मामले का स्वतः संज्ञान लिया। अदालत के इस आदेश के बाद अब स्कूलों के आसपास चिप्स, कार्बोनेटेड कोल्ड ड्रिंक, ट्रांस फैट से भरपूर बेकरी आइटम्स और अन्य तमाम प्रकार के जंक फूड खुलेआम नहीं बेचे जा सकेंगे। इस कदम का मुख्य उद्देश्य कम उम्र के बच्चों को अनहेल्दी खान-पान के दुष्प्रभावों से बचाना और शैक्षणिक संस्थानों के आसपास एक स्वास्थ्यवर्धक माहौल तैयार करना है ताकि वे शारीरिक रूप से मजबूत बन सकें।
केवल खाद्य पदार्थों की बिक्री पर रोक लगाकर ही मामला नहीं छोड़ा गया है, बल्कि अदालत ने स्कूलों के भीतर बच्चों के पोषण, खाद्य सुरक्षा और उनकी बदलती जीवनशैली से जुड़े कई अन्य अहम मुद्दों पर भी कड़े निर्देश दिए हैं। आजकल के बच्चों में लगातार बढ़ते मोबाइल स्क्रीन टाइम को लेकर भी अदालत ने अपनी गंभीर चिंता व्यक्त की है और स्वस्थ दिनचर्या अपनाने पर जोर दिया है। इसके साथ ही प्रत्येक विद्यालय में एक विशेष खाद्य सुरक्षा एवं पोषण समिति का गठन करने का आदेश दिया गया है, जो स्कूल परिसर में मिलने वाले खाने-पीने के सामान की गुणवत्ता पर पैनी नजर रखेगी।
प्रशासनिक स्तर पर भी इस आदेश को सख्ती से लागू करवाने की तैयारी कर ली गई है। सभी जिला कलेक्टरों और ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने अधिकार क्षेत्र के स्कूलों का नियमित रूप से दौरा और निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। इतना ही नहीं, सभी कलेक्टरों को विशेष रूप से यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे ग्रामीण इलाकों के स्कूलों का औचक निरीक्षण करें और अपनी रिपोर्ट पेश करें। इस पूरी व्यवस्था से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सरकारी और निजी दोनों ही तरह के संस्थानों में बच्चे बेहतर माहौल में शिक्षा और पोषण प्राप्त करें।
स्कूल कैंटीनों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए भी समयसीमा तय की गई है। अदालती निर्देशों के अनुसार सभी स्कूलों को आगामी आठ हफ्तों के भीतर अपनी कैंटीन में एक प्रमुख मेन्यू बोर्ड लगाना अनिवार्य होगा। इस बोर्ड पर बेचे जाने वाले हर खाद्य पदार्थ की कैलोरी और उससे मिलने वाले पोषण की पूरी जानकारी साफ-साफ शब्दों में लिखी होनी चाहिए ताकि बच्चे और उनके अभिभावक यह जान सकें कि वे क्या खा रहे हैं। इसके अलावा, स्कूलों में चलने वाले मिड-डे मील यानी मध्याह्न भोजन और अन्य सरकारी पोषण योजनाओं में भी संतुलित आहार के तय मानकों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है ताकि किसी भी स्तर पर कोताही न बरती जा सके।





















