वैश्विक इक्विटी बाजारों में बुधवार को भारी दबाव देखने को मिला, क्योंकि कच्चा तेल महंगा होने, बॉन्ड यील्ड बढ़ने और अमेरिकी ट्रेजरी की बायबैक घोषणा उम्मीद के मुताबिक न रहने से निवेशकों की धारणा प्रभावित हुई। वित्तीय बाजार में बन रहे इस माहौल के बीच विश्लेषक इसे आर्थिक सुस्ती के साथ महंगाई की दोहरी मार यानी स्टैगफ्लेशन का शुरुआती लक्षण मान रहे हैं। इसके बावजूद प्रौद्योगिकी कंपनियों के शेयरों ने शानदार जुझारूपन दिखाया, जिससे अमेरिकी शेयर बाजार यूरोपीय बाजारों की तुलना में अधिक नुकसान झेलने से बच गए।
बॉन्ड यील्ड और ऊर्जा कीमतों से वैश्विक बाजारों पर बढ़ा दबाव
अमेरिकी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांक एसएंडपी 500 में 0.5 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि यूरोप के स्टॉक्स 600 सूचकांक में 1.4 प्रतिशत की बड़ी गिरावट देखी गई। बांड यील्ड में लगातार हो रही बढ़ोतरी ने बॉन्ड बाजार के प्रति आकर्षण बढ़ाया है, जिससे शेयरों से पूंजी निकलकर सुरक्षित संपत्तियों में जा रही है। इसके साथ ही ऊर्जा की बढ़ती लागत ने कंपनियों की लाभप्रदता और महंगाई के मोर्चे पर चिंताएं बढ़ा दी हैं। ट्रेजरी विभाग द्वारा घोषित बॉन्ड बायबैक योजना से निवेशकों को जिस राहत की उम्मीद थी, वह पूरी नहीं हो सकी, जिससे धारणा और अधिक कमजोर हुई।
टेक शेयरों में मजबूती और मेटा का एआई चालित उछाल
बाजार में चौतरफा बिकवाली के बावजूद टेक शेयरों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। सेमीकंडक्टर कंपनियों के शेयर मामूली बढ़त के साथ बंद हुए। सोशल मीडिया दिग्गज मेटा के शेयरों में 7 प्रतिशत की जोरदार तेजी दर्ज की गई। मेटा की यह उछाल उसके नए कंज्यूमर एआई एजेंट 'म्यूज़' की लॉन्चिंग के बाद आई है। यह विकास दर्शाता है कि टेक उद्योग तेजी से अधिक स्वायत्त एआई अनुप्रयोगों की ओर बढ़ रहा है। अधिक जटिल एआई मॉडलों को चलाने के लिए विशाल कंप्यूटिंग पावर की आवश्यकता होती है, जिससे चिप निर्माता कंपनियों की मांग बनी हुई है और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी के बाद भी सेमीकंडक्टर स्टॉक मजबूत बने हुए हैं।
बाजार में व्यापक बिकवाली और स्टैगफ्लेशन के संकेत
तकनीकी शेयरों के मजबूत प्रदर्शन के बावजूद बाजार का व्यापक आधार काफी कमजोर नजर आया। एसएंडपी 500 की 500 कंपनियों में से 405 के शेयर लाल निशान में बंद हुए। इंडस्ट्रियल्स और कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी जैसे चक्रीय क्षेत्रों में लगभग 1.5 प्रतिशत की सबसे बड़ी गिरावट देखी गई। आमतौर पर अनिश्चितता के दौर में निवेशक रक्षात्मक क्षेत्रों में शरण लेते हैं, लेकिन इस बार यूटिलिटीज, कंज्यूमर स्टेपल्स और रियल एस्टेट जैसे डिफेंसिव सेक्टर्स में भी भारी बिकवाली हुई। बॉन्ड यील्ड के प्रति संवेदनशीलता के कारण इन क्षेत्रों पर नकारात्मक असर पड़ा। विश्लेषकों का मानना है कि यह स्थिति केवल सुस्त विकास की नहीं, बल्कि स्टैगफ्लेशन के पैटर्न को दर्शाती है।
मुद्रा और कमोडिटी बाजार पर व्यापक आर्थिक असर
विदेशी मुद्रा बाजार में एशियाई सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और अमेरिकी डॉलर का युग्म (AUD/USD) 0.7200 के स्तर से ऊपर स्थिर होता दिखा। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की बढ़ती संभावनाओं ने ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को 14 मई के बाद के उच्चतम स्तर के करीब बनाए रखा है। हालांकि, फेडरल रिजर्व द्वारा सख्त मौद्रिक नीति जारी रखने की संभावनाओं और अमेरिका तथा ईरान के बीच बढ़ते तनाव ने अमेरिकी डॉलर को सहारा दिया, जिससे इस मुद्रा युग्म की बढ़त सीमित रही। दूसरी ओर, जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) 153.50 से ऊपर स्थिर हुआ, लेकिन बैंक ऑफ जापान की दर बढ़ोतरी की अटकलों के कारण यह पिछले सात महीनों के निचले स्तर के पास ही बना हुआ है।
सोना और अमेरिकी मुद्रास्फीति के आंकड़ों का इंतजार
कमोडिटी बाजार में सोने की कीमतों में 4,400 डॉलर प्रति औंस के निचले स्तर को छूने के बाद रिकवरी देखी गई। हालांकि, निवेशक अमेरिका के आगामी मुद्रास्फीति आंकड़ों को लेकर सतर्क रुख अपना रहे हैं, जिससे सोना 4,450 डॉलर के महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तर से नीचे ही बना हुआ है। बाजार प्रतिभागी अमेरिकी प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) और कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) के आंकड़ों का इंतजार कर रहे हैं, जो फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति की भविष्य की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। इसके अलावा, हालिया अमेरिकी जॉब्स रिपोर्ट में अगस्त के दौरान उम्मीद से बेहतर रोजगार आंकड़े सामने आए हैं, जिसने फेडरल रिजर्व को ब्याज दरों पर फैसला लेने के लिए अधिक समय और विकल्प प्रदान किए हैं।



















