रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति के बहुप्रतीक्षित ब्याज दर निर्णय से ठीक पूर्व घरेलू शेयर बाजारों में घबराहट और सतर्कता का स्पष्ट प्रभाव देखने को मिला। बुधवार को कारोबारी सत्र के आगाज के साथ ही दलाल स्ट्रीट पर बिकवाली का व्यापक दबाव बन गया, जिसके चलते प्रमुख बेंचमार्क सूचकांकों ने तेज गोता लगाया। वैश्विक स्तर पर जारी असमंजस और घरेलू स्तर पर केंद्रीय बैंक के रुख को लेकर अनिश्चितता ने इक्विटी बाजार के मूड को प्रभावित किया। ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर ड्यूरेबल्स जैसी श्रेणियों में भारी मुनाफावसूली के कारण सूचकांक अपनी अहम मनोवैज्ञानिक सीमाओं के नीचे फिसलते नजर आए।
शुरुआती सौदों में लाल निशान में फिसले दोनों मुख्य सूचकांक
बुधवार के कारोबारी सत्र के आरंभिक मिनटों में ही सूचकांकों पर विक्रेताओं का दबदबा स्थापित हो गया। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 449.50 अंक अथवा 0.62 प्रतिशत लुढ़ककर 72,618.31 के स्तर पर कारोबार की शुरुआत करता दिखा। इसी प्रकार नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का 50 शेयरों वाला निफ्टी भी 161.40 अंक यानी 0.71 प्रतिशत का नुकसान झेलते हुए 22,614.70 के स्तर पर पहुंच गया। इस तीखे नुकसान के चलते निफ्टी अपने 22,700 के महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक आधार से नीचे खिसक गया। इस दौरान बाजार की समग्र चौड़ाई काफी कमजोर रही, जहां केवल 971 शेयरों ने बढ़त हासिल की, जबकि 1,379 शेयर लाल निशान में गिरते दिखे। वहीं 181 शेयरों के भाव पूरी तरह अपरिवर्तित रहे।
स्वास्थ्य सेवा और दूरसंचार को छोड़ अधिकांश सेक्टरों पर हावी रही गिरावट
बाजार की इस व्यापक मंदी के बीच फार्मास्यूटिकल तथा टेलीकॉम क्षेत्र की चुनिंदा कंपनियों ने गिरावट की धार को कुंद करने का प्रयास किया। डॉ. रेड्डीज लैब्स 0.99% की तेजी के साथ बढ़त बनाने वालों की सूची में सबसे आगे रहा। इसके अतिरिक्त सिप्ला में 0.63%, भारती एयरटेल में 0.61%, कोल इंडिया में 0.29% और टेक महिंद्रा में 0.06% का मामूली सुधार नजर आया। इसके ठीक उलट कंज्यूमर ड्यूरेबल्स और वाहन निर्माताओं के काउंटरों पर तीखी बिकवाली का दौर रहा। टाइटन कंपनी के शेयर 3.39% की भारी गिरावट के साथ सर्वाधिक नुकसान झेलने वाले स्टॉक बने। इसके साथ ही एसबीआई लाइफ में 2.06%, एशियन पेंट्स में 1.59%, हिंडाल्को में 1.56%, श्रीराम फाइनेंस में 1.51%, महिंद्रा एंड महिंद्रा में 1.48%, मारुति में 1.40% तथा इंडिगो में 1.37% की सुस्ती दर्ज की गई।
किन कारकों ने निवेशकों की धारणा को बनाया रक्षात्मक
घरेलू वित्तीय बाजारों पर बने इस भारी दबाव के मूल में रिजर्व बैंक का आगामी मौद्रिक फैसला है, जिसके चलते संस्थागत और खुदरा कारोबारी नए जोखिम उठाने से बच रहे हैं। इसके साथ ही विदेशी बाजारों से प्राप्त मिश्रित रुझान और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में बना रुख भी घरेलू इक्विटी बाजार में अनिश्चितता बढ़ाने का मुख्य कारण साबित हुआ।

















