बोकारो में शादियों, समारोहों, फास्ट फूड सेंटरों, होटलों और चाय-नाश्ते की दुकानों पर डिस्पोजेबल प्लेटों और अन्य उपयोगी सामानों की मांग हमेशा बनी रहती है। ऐसे में कम निवेश के साथ पेपर प्लेट और डिस्पोजेबल आइटम का खुदरा कारोबार शुरू करना मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है। बोकारो के सेक्टर-9 इलाके में रहने वाले लाल बाबू पिछले दो दशकों से पेपर प्लेट और डिस्पोजेबल उत्पादों के खुदरा व्यापार से जुड़े हुए हैं। उन्होंने इस बिजनेस को शुरू करने की लागत, जरूरी सामान और मुनाफे से जुड़े अहम पहलुओं पर विस्तार से रोशनी डाली है।
मात्र ₹40 हजार में करें कारोबार की शुरुआत
व्यापारी लाल बाबू के मुताबिक, इस काम की शुरुआत महज ₹40 हजार की शुरुआती पूंजी के जरिए आसानी से की जा सकती है। इसके लिए एक छोटी सी दुकान या फिर एक गोदाम की जरूरत पड़ती है। अगर कोई छोटे शहरों में दुकान किराए पर लेता है, तो वहां मासिक किराया करीब ₹5 हजार से ₹10 हजार के बीच हो सकता है। इसके अलावा दुकान के अंदर सामान सजाने के लिए शोकेस और रैक वगैरह लगवाने में लगभग ₹5 हजार का खर्च आ जाता है।
बाकी बचे पैसों से विभिन्न प्रकार के डिस्पोजेबल उत्पादों का शुरुआती स्टॉक आसानी से तैयार किया जा सकता है। करीब ₹30 हजार की लागत से 500 से 800 यूनिट तक अलग-अलग डिस्पोजेबल आइटम खरीदे जा सकते हैं। इस स्टॉक में गुपचुप की कटोरी, चाऊमीन प्लेट, दोना-पत्तल, पेपर प्लेट और पारंपरिक पत्तल जैसे कई तरह के सामान शामिल किए जा सकते हैं। इसके बाद ग्राहक की पसंद और स्थानीय बाजार की मांग को ध्यान में रखते हुए स्टॉक के दायरे को धीरे-धीरे बढ़ाया जा सकता है।
सामान के स्टोरेज और गुणवत्ता पर दें विशेष ध्यान
इस व्यापार में उत्पादों की बेहतरीन क्वालिटी के साथ-साथ उनके सुरक्षित भंडारण यानी स्टोरेज पर भी खास ध्यान देना बहुत जरूरी है। डिस्पोजेबल सामान को हमेशा नमी, पानी और धूल-मिट्टी से बचाकर रखना चाहिए, क्योंकि यदि स्टोरेज ठीक नहीं रहा तो माल खराब होने का खतरा रहता है जिससे आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। समय के साथ जब यह कारोबार बढ़ने लगे, तो दुकानदार खुदरा बिक्री के साथ-साथ थोक यानी होलसेल में भी माल की सप्लाई कर सकते हैं। अपने आस-पास के फास्ट फूड सेंटरों, होटलों, चाय की दुकानों और छोटे कारोबारियों को अपने नियमित ग्राहक बनाकर व्यापार को नई ऊंचाइयों पर ले जाया जा सकता है।
कितनी हो सकती है महीने की कमाई
अनुभवी विक्रेता लाल बाबू के अनुसार, यदि दुकान पर रोजाना औसतन ₹3,000 से ₹4,000 तक की बिक्री हो जाती है और इन उत्पादों पर लगभग 15 से 25 प्रतिशत तक का मुनाफा मिल जाता है, तो रोज का मार्जिन करीब ₹700 से ₹1,000 तक बैठता है। इसके अलावा अगर महीने में 25 से 30 दिन तक लगातार दुकान चलती है और रोजाना औसतन ₹1,000 का मार्जिन बनता है, तो व्यापारी हर महीने आसानी से ₹25 हजार से ₹30 हजार तक की कमाई कर सकता है। वहीं, अगर दुकान किसी मुख्य बाजार या बड़े कमर्शियल इलाके में खुली हो, तो बिक्री बढ़ने के साथ ही मुनाफे का यह आंकड़ा और भी अधिक हो सकता है।




















