अमेरिकी अर्थव्यवस्था में लगातार बनी हुई ऊंची मांग और मजबूत उत्पादन की वजह से मूल्य वृद्धि की रफ्तार थामने में जटिलताएं पैदा हो रही हैं। क्लीवलैंड फेडरल रिजर्व की अध्यक्ष बेथ हैमैक ने मौद्रिक नीति पर अपने विचार रखते हुए आगाह किया है कि देश में कीमतें अब भी जरूरत से ज्यादा तेजी से बढ़ रही हैं। जब बाजार में मांग मजबूत स्तर पर टिकी रहती है, तब केंद्रीय बैंक के लिए तय किए गए दो प्रतिशत के महंगाई लक्ष्य की तरफ लौटना और अधिक पेचीदा हो जाता है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि मूल्य स्थिरता बनाए रखना केंद्रीय बैंकों की बुनियादी जवाबदेही है। इसके साथ ही उन्होंने संकेत दिया कि आने वाले समय में महंगाई के दोबारा भड़कने का जोखिम नीचे गिरने की तुलना में कहीं अधिक दिखाई देता है।
लंबे समय तक रहने वाली महंगाई का खतरा
केंद्रीय बैंक के नीति निर्माताओं के अनुसार, अगर महंगाई को निर्धारित लक्ष्य से ऊपर लंबे समय तक बने रहने दिया गया, तो इसके गंभीर नतीजे सामने आ सकते हैं। बेथ हैमैक ने चेताया कि कीमतों में बढ़त का दौर जितना अधिक समय खींचेगा, उपभोक्ताओं और कारोबारियों के बीच महंगाई की उम्मीदें उतनी ही पक्की हो जाएंगी। इसके चलते कीमतों को नीचे लाना लगातार मुश्किल होता चला जाता है। उनके बयानों के बाद विश्लेषकों ने उनके रुख को स्पष्ट रूप से आक्रामक और दरों को ऊंची रखने के पक्षधर के तौर पर आंका है। नीति निर्माताओं के हालिया संवाद को मापने वाला सेंटीमेंट इंडेक्स 0.46 अंक फिसलकर 148.18 पर आ गया, लेकिन यह स्तर तटस्थ माने जाने वाले 100 के आंकड़े से काफी ऊपर बना हुआ है। इस तरह के ऊंचे आंकड़े अमेरिकी डॉलर के पक्ष में एक सकारात्मक माहौल को बनाए रखने में मदद करते हैं।
मुद्रा बाजारों में डॉलर का रुख और ब्याज दरों पर दांव
इन टिप्पणियों के बाद विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर पर मिला-जुला असर देखा गया और यूएस डॉलर इंडेक्स में बढ़त का रुझान कायम रहा। छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति दर्शाने वाला यह सूचकांक 0.14 प्रतिशत की मजबूती के साथ 101.25 के आसपास कारोबार करता नजर आया। बाजार सहभागियों ने आगामी नीतिगत बैठकों में ब्याज दर वृद्धि की संभावनाओं को पहले ही अपनी गणनाओं में शामिल कर लिया था, जिसकी वजह से बयानों पर तात्कालिक प्रतिक्रिया सीमित रही। सीएमई फेडवॉच टूल के आंकड़ों पर नजर डालें तो निवेशक अब अक्टूबर की बैठक में एक और दर वृद्धि की लगभग 71 प्रतिशत संभावना जता रहे हैं। महज एक सप्ताह पहले यह अनुमान 55 प्रतिशत के आसपास दर्ज किया गया था, जो दिखाता है कि सख्त नीतिगत फैसलों को लेकर वित्तीय बाजारों में उम्मीदें कितनी तेजी से बढ़ी हैं।
फेडरल रिजर्व का दोहरा जनादेश और नीतिगत हथियार
संयुक्त राज्य अमेरिका में पूरी मौद्रिक नीति का खाका फेडरल रिजर्व ही तैयार करता है। इस केंद्रीय बैंक को कानूनी रूप से दोहरी जिम्मेदारी सौंपी गई है, जिसमें कीमतों में स्थिरता बनाए रखना और रोजगार के अधिकतम अवसरों को बढ़ावा देना शामिल है। इन दोनों लक्ष्यों के बीच संतुलन साधने के लिए फेड मुख्य रूप से ब्याज दरों में फेरबदल का सहारा लेता है। जब उपभोक्ता सामान और सेवाओं की कीमतें अनियंत्रित होने लगती हैं और महंगाई केंद्रीय बैंक के निर्धारित 2 प्रतिशत के लक्ष्य को लांघ जाती है, तब नीति निर्माता नीतिगत दरों में बढ़ोतरी करते हैं। दरों में इस इजाफे से बैंकों से कर्ज लेना महंगा हो जाता है, जिससे पूरी अर्थव्यवस्था में मांग धीमी पड़ती है। साथ ही ऊंची प्रतिफल दरों के आकर्षण में विदेशी निवेशक अमेरिकी संपत्तियों में पूंजी लगाने लगते हैं, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है। इसके विपरीत, जब आर्थिक मंदी का डर हो या बेरोजगारी दर असामान्य रूप से बढ़ जाए, तो उधारी को सस्ता बनाने के लिए दरों में कटौती की जाती है, जिससे डॉलर पर दबाव बनता है।
नीतिगत बैठकों का ढांचा और निर्णय प्रक्रिया
फेडरल रिजर्व पूरे साल के दौरान आठ नियमित नीतिगत बैठकें आयोजित करता है, जहां फेडरल ओपन मार्केट कमेटी व्यापक आर्थिक परिदृश्य का मूल्यांकन करके निर्णय लेती है। इस महत्वपूर्ण समिति में कुल बारह शीर्ष अधिकारी शामिल होकर मतदान करते हैं। इनमें फेडरल रिजर्व बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सात सदस्य, न्यूयॉर्क के फेडरल रिजर्व बैंक के अध्यक्ष, और ग्यारह क्षेत्रीय रिजर्व बैंकों में से रोटेशन के आधार पर एक वर्ष के कार्यकाल के लिए चुने जाने वाले चार अन्य अध्यक्ष हिस्सा लेते हैं। संकट के असाधारण दौर में जब मानक तरीके कारगर नहीं होते, तब केंद्रीय बैंक क्वांटिटेटिव ईजिंग जैसे गैर-पारंपरिक तरीकों का इस्तेमाल करता है। वर्ष 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के समय फेड ने इस प्रक्रिया के तहत नई नकदी तैयार करके वित्तीय संस्थानों से उच्च गुणवत्ता वाले बॉन्ड खरीदे थे, जिससे डॉलर आमतौर पर कमजोर पड़ता है। वहीं वर्तमान में जारी क्वांटिटेटिव टाइटनिंग इसकी ठीक उलट प्रक्रिया है, जिसमें केंद्रीय बैंक बांड खरीद बंद कर देता है और परिपक्व होने वाले बांड से मिले मूलधन का पुनर्निवेश नहीं करता, जिससे डॉलर को मजबूती मिलती है।
वैश्विक मुद्राओं और जिंस बाजार में उतार-चढ़ाव
अमेरिकी नीतियों के असर के साथ-साथ दुनिया भर के वित्तीय बाजारों में अन्य अहम घटनाओं का प्रभाव भी देखने को मिला। ऑस्ट्रेलियाई रोजगार आंकड़ों के सार्वजनिक होने के बाद गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 0.7000 के स्तर की तरफ गिरता दिखा। ऑस्ट्रेलिया में अगस्त माह की बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि इसके 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान था। हालांकि रोजगार सृजन के आंकड़े अनुमानों से बेहतर रहे और 39.5 हजार दर्ज किए गए। इसके अतिरिक्त जापानी येन में बॉन्ड प्रतिफल बढ़ने और मुद्रा हस्तक्षेप की सुगबुगाहट के बीच मजबूती आई, जिससे यूएसडी/जेपीवाई तीन सप्ताह के उच्च स्तर से फिसलकर एशियाई सत्र में 158.00 के करीब आ गया। उधर जिंस बाजार में सोना लगातार दूसरे दिन दबाव में रहा और यूरोपीय सत्र के पहले हिस्से में 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे एक सप्ताह के निचले स्तर पर आ गया। बाजार की नजरें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली अहम बैठक पर टिकी हैं, जहां दुर्लभ मृदा खनिजों, प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों और मौजूदा व्यापार समझौते के विस्तार पर संभावित प्रगति की उम्मीद की जा रही है।
वैश्विक केंद्रीय बैंकों के अलग-अलग फैसले
इसी दौर में अन्य प्रमुख देशों के केंद्रीय बैंकों ने भी अपनी मौद्रिक दिशा स्पष्ट की है। स्विस नेशनल बैंक ने वित्तीय विश्लेषकों की अपेक्षाओं के अनुरूप अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों को शून्य प्रतिशत पर स्थिर रखा। स्विस बैंक ने स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक बैंकों द्वारा उसके पास रखी गई साइट डिपॉजिट्स पर एक निश्चित सीमा तक नीतिगत दर के आधार पर प्रतिफल दिया जाएगा। स्विस केंद्रीय बैंक ने साल 2026 के लिए अपने महंगाई अनुमान को मामूली रूप से बढ़ाकर 0.7 प्रतिशत कर दिया है, जो पूर्व में 0.6 प्रतिशत अनुमानित था। इसके साथ ही बैंक ने चेतावनी दी कि स्विट्जरलैंड के आर्थिक परिदृश्य के लिए सबसे बड़ा जोखिम वैश्विक अर्थव्यवस्था के उतार-चढ़ाव से जुड़ा है। दूसरी तरफ, बैंक ऑफ जापान ने दशकों की मौद्रिक शिथिलता को पीछे छोड़ते हुए अपनी अल्पकालिक ब्याज दर लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत कर दिया। यह निर्णय 7 के मुकाबले 2 मतों से पारित हुआ, जो जापानी मौद्रिक नीति के सामान्यीकरण की दिशा में एक और बड़ा कदम माना जा रहा है।


















