यूक्रेन के ओडेसा बंदरगाह से निकले जहाज पर मिसाइल हमला, चार भारतीयों की जान गई, रूसी राजदूत तलबदतिया के मंदिर परिसर में आधी रात तक चला फूहड़ नृत्य, पुलिस रवाना होते ही आयोजकों ने दोबारा चालू कराया आयोजनमानसून में दीवारों में सीलन आ रही है? घर को नमी और फफूंद से बचाने के आसान तरीकेजयपुर में मूसलाधार बारिश से मिली भीषण उमस से राहत, आज भी चेतावनी जारीगाज़ियाबाद के वीर नगर में बेटों की मारपीट से माता-पिता की मौत, पुलिस ने दोनों को दबोचाबारिश में आगरा जाने का मन है? ताजमहल के अलावा इन 8 जगहों पर मिलेगा असली मानसूनी मजातेल की तेजी ने कनाडाई डॉलर को दी उड़ान, महंगाई के आंकड़ों पर टिकी बाज़ार की नज़रभारत-अमेरिका ट्रेड डील के विरोध में किसानों का दिल्ली कूच, शंभू-सिंघू बॉर्डर पर पुलिस का सख्त पहरासास को ताने मारने वाली बहू पर भोपाल कोर्ट सख्त, 20 हजार रुपये हर्जाना, भविष्य में प्रताड़ना पर रोकबिहार में अंग्रेजों का जेल कानून खत्म: 132 साल पुरानी व्यवस्था की जगह लेगा नया बंदी सुधार बिल
दोपहर होते ही लुढ़का कच्चा तेल, 90 डॉलर से गिरकर 88 डॉलर पर आया भावबाज़ार
8 घंटे पहले· 2

दोपहर होते ही लुढ़का कच्चा तेल, 90 डॉलर से गिरकर 88 डॉलर पर आया भाव

20 जुलाई की सुबह कच्चे तेल का दाम 90 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया था, लेकिन दोपहर करीब 1:40 बजे कीमतें अचानक फिसलकर 88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गईं।

कच्चे तेल की कीमतों ने 20 जुलाई को दिनभर तेज उतार-चढ़ाव दिखाया। सुबह के कारोबार में जहां भाव 90 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया था, वहीं दोपहर करीब 1:40 बजे इसमें अचानक तेज गिरावट आ गई और दाम लुढ़ककर 88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। कुछ ही घंटों में आई इस उथल-पुथल ने बाजार में यह सवाल खड़ा कर दिया कि आखिर तेल के दाम इतनी तेजी से नीचे क्यों आए।

सुबह से दोपहर तक क्या हुआ

दिन की शुरुआत में कच्चा तेल मजबूती के साथ 90 डॉलर के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया था। यह स्तर बाजार के लिए अहम माना जाता है, क्योंकि यहां पहुंचते ही कारोबारी अक्सर मुनाफावसूली शुरू कर देते हैं। दोपहर होते-होते खरीदारी की रफ्तार थम गई और बिकवाली हावी हो गई, जिससे भाव 90 डॉलर से नीचे फिसलते हुए 88 डॉलर पर आ टिका।

ये भी पढ़ें

डॉलर की चाल का सीधा असर

कच्चे तेल का कारोबार दुनियाभर में डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर की मजबूती और कमजोरी का इसकी कीमतों पर सीधा असर पड़ता है। जब डॉलर मजबूत होता है तो दूसरे देशों के लिए तेल खरीदना महंगा पड़ता है और मांग पर दबाव आता है, जिससे कीमतें नीचे आती हैं। बीते कुछ समय से डॉलर में मजबूती का रुख रहा है, जिसका दबाव तेल की कीमतों पर भी देखा जा रहा है।

90 डॉलर का स्तर क्यों अहम है

90 डॉलर प्रति बैरल का आंकड़ा तेल बाजार में एक बड़ी रुकावट की तरह काम करता है। भाव जैसे ही इस स्तर के आसपास पहुंचता है, कारोबारी जोखिम कम करने के लिए बिकवाली करने लगते हैं। यही वजह है कि 90 डॉलर पार करने के बाद तेल टिक नहीं पाया और तेजी से वापस नीचे आ गया। बाजार के जानकार इस स्तर के ऊपर और नीचे की चाल पर बारीकी से नजर रख रहे हैं।

आगे क्या

कच्चे तेल की कीमतों में इस तरह का तेज उतार-चढ़ाव वैश्विक मांग, डॉलर की चाल और कारोबारी धारणा पर निर्भर करता है। फिलहाल भाव 88 डॉलर प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है और आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि तेल दोबारा 90 डॉलर की ओर बढ़ता है या और नीचे फिसलता है।

सवाल-जवाब

20 जुलाई को कच्चे तेल का भाव कहां तक पहुंचा था?
सुबह के कारोबार में कच्चे तेल का दाम 90 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया था।
कीमतों में गिरावट कब आई?
दोपहर करीब 1:40 बजे कीमतों में अचानक तेज गिरावट देखने को मिली।
अब कच्चे तेल का भाव कितना है?
गिरावट के बाद कच्चे तेल का दाम 88 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया है।
डॉलर का तेल की कीमतों से क्या संबंध है?
तेल का कारोबार डॉलर में होता है, इसलिए डॉलर मजबूत होने पर तेल महंगा पड़ता है और मांग घटने से कीमतें नीचे आती हैं।
90 डॉलर का स्तर क्यों अहम माना जाता है?
यह एक बड़ा मनोवैज्ञानिक स्तर है, जहां पहुंचते ही कारोबारी अक्सर मुनाफावसूली करने लगते हैं, जिससे भाव नीचे आ जाता है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR