27 अगस्त को एशियाई महाद्वीप के प्रमुख केंद्रीय बैंकों के नीतिगत निर्णयों और बयानों ने वैश्विक वित्तीय बाजारों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। क्षेत्र के केंद्रीय बैंक बढ़ती आर्थिक अनिश्चितताओं और ढांचागत बदलावों के बीच सतर्कता बरतते हुए जोखिम प्रबंधक के रूप में काम कर रहे हैं। मौद्रिक नीतिगत साधनों का असर अर्थव्यवस्था पर दिखने में समय लगता है और अपूर्ण जानकारी के बीच नीतियां बनानी पड़ती हैं, इसलिए केंद्रीय बैंक महंगाई पर नियंत्रण और आर्थिक विकास के संतुलन को प्राथमिकता दे रहे हैं। इसी दौरान विदेशी मुद्रा बाजार में विभिन्न मुद्राओं की विनिमय दरों में उतार-चढ़ाव देखा गया है, जबकि निवेशकों की नजरें फेडरल रिजर्व चेयरमैन के आगामी संबोधन पर टिकी हैं।
एशियाई केंद्रीय बैंकों की जोखिम प्रबंधन रणनीति
27 अगस्त को आयोजित नीतिगत बैठकों के दौरान तीन प्रमुख एशियाई केंद्रीय बैंकों ने अपनी मौद्रिक प्राथमिकताओं को साझा किया। इन केंद्रीय बैंकों के बयानों में एक समान संदेश उभरा कि वर्तमान दौर में केंद्रीय बैंक एक जोखिम प्रबंधक की भांति कार्य कर रहे हैं। अनिश्चित आर्थिक परिस्थितियों और बाहरी झटकों के समय नीतिगत फैसलों का प्रभाव सामने आने में समय लगता है, इसीलिए नीतियां बनाते समय अत्यधिक सावधानी बरती जा रही है।
इसी रणनीति के तहत बैंक ऑफ कोरिया और बैंग्को सेंट्रल इंग पिलीपिनास (बीएसपी) दोनों ने 27 अगस्त को अपनी प्रमुख नीतिगत दरों में बढ़ोतरी का निर्णय लिया। बैंक ऑफ कोरिया ने अपनी प्रमुख नीतिगत दर में 25 बेसिस प्वाइंट की वृद्धि की, जिससे दर 2.75% से बढ़कर 3.00% पर पहुंच गई। वहीं दूसरी ओर, फिलिपिंस के केंद्रीय बैंक बीएसपी ने भी अपनी नीतिगत दर में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी की, जिससे उनकी प्रमुख दर 4.75% से बढ़कर 5.00% हो गई। इन फैसलों का उद्देश्य क्षेत्रीय अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति के दबाव को नियंत्रित करना है।
मुद्रास्फीति का दबाव और बीएसपी गवर्नर के संकेत
ब्याज दरों में बढ़ोतरी करने के बावजूद दोनों केंद्रीय बैंकों के रुख से यह संकेत मिला है कि आने वाले समय में दर वृद्धि की रफ्तार धीमी हो सकती है। बैंक ऑफ कोरिया और बीएसपी के बयानों से स्पष्ट होता है कि आगे चलकर मौद्रिक सख्ती की गति धीमी रखी जा सकती है। हालांकि, दोनों ही मौद्रिक अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि यदि महंगाई का जोखिम दोबारा बढ़ता है, तो नीतिगत सख्त कदमों का विकल्प खुला रखा गया है।
फिलिपिंस की आर्थिक स्थिति पर बात करते हुए बीएसपी गवर्नर रिमोलना ने चेतावनी दी कि देश में मुद्रास्फीति को लेकर कई बड़े जोखिम बने हुए हैं। उन्होंने विशेष रूप से गंभीर अल नीनो मौसम के प्रभाव और न्यूनतम वेतन में होने वाली बढ़ोतरी को महंगाई का मुख्य कारण माना। बीएसपी गवर्नर रिमोलना ने स्पष्ट किया कि महंगाई की आशंकाओं को थामने के लिए बीएसपी आवश्यकतानुसार सख्त मौद्रिक कदम उठाने से पीछे नहीं हटेगा।
फॉरेक्स मार्केट में हलचल: पाउंड और यूरो की स्थिति
एशियाई कारोबार के दौरान विदेशी मुद्रा बाजार में प्रमुख मुद्रा जोड़ों में हलचल देखी गई। ब्रिटिश पाउंड लगातार दो दिनों की गिरावट से उबरते हुए अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मामूली सुधार के साथ GBP/USD 1.3600 के स्तर के आसपास कारोबार करता नजर आया। हालांकि, ब्रांड क्रूड तेल की कीमतों में आई हालिया नरमी के कारण पाउंड पर दबाव बना हुआ है, क्योंकि तेल की कीमतों में गिरावट से ब्रिटेन में तात्कालिक महंगाई की चिंता कम हुई है।
ऊर्जा कीमतों में आई गिरावट के चलते मनी मार्केट ने बैंक ऑफ इंग्लैंड (BoE) की अगली ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदों को आगे खिसका दिया है। बाजार का अनुमान है कि बैंक ऑफ इंग्लैंड द्वारा अब दर वृद्धि देर 2026 के बजाय शुरुआती 2027 में की जा सकती है। दूसरी तरफ, यूरो में मजबूती का रुख देखने को मिला और EUR/USD जोड़ा पिछले दिन के मामूली लाभ को आगे बढ़ाते हुए एशियाई सत्र में 1.1650 के करीब पहुंच गया। यूरोपियन सेंट्रल बैंक (ECB) के सख्त मौद्रिक नीति दृष्टिकोण के कारण यूरो को सहारा मिल रहा है।
जैक्सन होल सम्मेलन पर टिकी वैश्विक निगाहें
वैश्विक वित्तीय बाजारों का ध्यान अब अमेरिका में आयोजित हो रहे जैक्सन होल आर्थिक संगोष्ठी पर केंद्रित हो गया है। फेडरल रिजर्व चेयरमैन केविन वॉरश शुक्रवार को इस प्रतिष्ठित संगोष्ठी में अपना पहला भाषण देने जा रहे हैं। 27 अगस्त से 29 अगस्त तक आयोजित होने वाले इस तीन दिवसीय जैक्सन होल सम्मेलन का आधिकारिक विषय 'फाइनेंशियल इनोवेशन: इम्प्लीकेशंस फॉर पेमेंट्स एंड पॉलिसी' रखा गया है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि फेडरल रिजर्व चेयरमैन केविन वॉरश के इस संबोधन का प्रभाव केवल सितंबर की आगामी ब्याज दर बैठक तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह भविष्य की वैश्विक मौद्रिक नीतियों और भुगतान प्रणालियों की दिशा तय करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। ऐसे में दुनिया भर के निवेशक और अर्थशास्त्री फेड चेयरमैन के बयानों का उत्सुकता से इंतजार कर रहे हैं।



















