यूरो और ब्रिटिश पाउंड (EUR/GBP) की विनिमय दर मध्यम और दीर्घकालिक मूविंग एवरेज के मजबूत घेरे के नीचे सीमित दायरे में बनी हुई है। लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार यह करेंसी जोड़ी 0.8562 पर कारोबार कर रही है, जो पिछले कारोबारी सत्र के 0.8583 के बंद स्तर से 0.24 प्रतिशत की मामूली गिरावट दर्शाती है। हालिया गिरावट के बावजूद यूरो-पाउंड जोड़ी 0.8568 पर स्थित अपने 50-दिवसीय सिंपल मूविंग एवरेज (SMA) के करीब टिकी हुई है, जिसका पीवट स्तर 0.8567 पर केंद्रित है। बीते 52 हफ्तों के दौरान इस जोड़ी ने 0.8468 से 0.8865 के दायरे में कारोबार किया है। हालांकि गिरावट की गति में कुछ स्थिरता आई है, लेकिन टेक्निकल इंडिकेटर्स बता रहे हैं कि खरीदारी का दबाव बेहद सीमित है, जिससे अल्पकालिक बाजार का रुझान हल्के बेयरिश दबाव के साथ सुस्त बना हुआ है।
यूरो और पाउंड का टेक्निकल विश्लेषण: ऑसिलेटर्स ने दिए दायरे में कारोबार के संकेत
दैनिक चार्ट पर तकनीकी संकेतकों का विस्तृत विश्लेषण बताता है कि निवेशक फिलहाल तटस्थ रुख अपनाए हुए हैं। 14-अवधि वाला रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) वर्तमान में 51 के स्तर पर है, जो पूर्व के 53 के स्तर के बेहद करीब है। यह न्यूट्रल रीडिंग इस बात का प्रमाण है कि बाजार में खरीदारों और विक्रेताओं के बीच संतुलन बना हुआ है और ओवरबॉट या ओवरसोल्ड स्थिति पैदा करने लायक गति अनुपस्थित है। इसके साथ ही मूविंग एवरेज कन्वर्जेंस डाइवर्जेंस (MACD) की रेखाएं शून्य से मामूली ऊपर बनी हुई हैं और इसका हिस्टोग्राम 0.00 पर फ्लैट है। यह संरचना किसी बड़े ट्रेंड बदलाव की बजाय खरीदारी में सुस्ती को प्रदर्शित करती है।
तकनीकी रुझान की कमजोरी की पुष्टि अन्य संकेतक भी करते हैं। एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) 13 के निचले स्तर पर है, जो किसी भी स्पष्ट दिशात्मक ट्रेंड के अभाव को दर्शाता है। ऑसिलेटर मापदंडों में स्टोकेस्टिक फास्ट लाइन 58 और सिग्नल लाइन 65 पर है। इस बीच मूविंग एवरेज का संरेखण दीर्घकालिक बेयरिश रुझान की ओर इशारा करता है। 20-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) 0.8556 पर, 50-दिवसीय EMA 0.8571 पर, 200-दिवसीय EMA 0.8645 पर और 200-दिवसीय SMA 0.8665 पर स्थित है। 50-दिवसीय EMA का 200-दिवसीय EMA के नीचे होना यानी डेथ क्रॉस की मौजूदगी ऊपरी स्तरों पर बिकवाली के दबाव को बनाए रखती है। 20-अवधि और 2 मानक विचलन वाले बोलिंजर बैंड की निचली सीमा 0.8531 और ऊपरी सीमा 0.8586 है, जबकि मध्य बैंड 0.8559 पर स्थित है।
ट्रेडर्स के लिए प्रमुख रेजिस्टेंस और सपोर्ट लेवल्स
संभावित ब्रेकआउट पर नजर रख रहे ट्रेडर्स के लिए ऊपरी स्तरों पर रुकावट की मजबूत दीवार खड़ी है। पहला प्रमुख रेजिस्टेंस 50.0 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर 0.8573 पर स्थित है, जो पहले पीवट रेजिस्टेंस (R1) 0.8572 के बेहद करीब है। यदि कीमत इस स्तर को पार करती है, तो अगला रेजिस्टेंस 61.8 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट स्तर 0.8601 पर आएगा, जिसे दूसरा पीवट रेजिस्टेंस (R2) 0.8581 का सहारा प्राप्त है। इसके ठीक ऊपर 100-दिवसीय SMA 0.8616 पर मौजूद है। यह पूरा रेजिस्टेंस क्लस्टर किसी भी तेजी की कोशिश को सीमित करने की क्षमता रखता है।
दूसरी ओर, निचले स्तरों पर सपोर्ट जोन कीमत को सहारा देने के लिए तैयार हैं। पहला पीवट सपोर्ट (S1) 0.8557 पर और दूसरा पीवट सपोर्ट (S2) 0.8552 पर स्थित है। यदि गिरावट गहराती है, तो 20-दिवसीय सपोर्ट और बोलिंजर बैंड का निचला दायरा 0.8531 का स्तर महत्वपूर्ण होगा। अत्यधिक बिकवाली की स्थिति में जोड़ी अपने 52-सप्ताह के निचले स्तर 0.8468 का पुनरपरीक्षण कर सकती है। दैनिक चार्ट पर 0.00 के करीब एवरेज ट्रू रेंज (ATR) को देखते हुए ट्रेडर्स इन निर्धारित सीमाओं का उपयोग जोखिम प्रबंधन और स्टॉप-लॉस सेट करने के लिए कर रहे हैं।
अमेरिकी खजाने के लिक्विडिटी फैसले से अमेरिकी डॉलर पर दबाव
यूरो-पाउंड जोड़ी के चार्ट के अलावा विदेशी मुद्रा बाजार अमेरिकी सरकार के नए नीतिगत निर्णयों से भी प्रभावित हो रहा है। अपने पूर्व निर्धारित कैलेंडर से हटकर अमेरिकी वित्त विभाग (यूएस ट्रेजरी) ने बुधवार को 12:32 GMT पर लिक्विडिटी सपोर्ट ऑपरेशन्स के संबंध में एक अप्रत्याशित घोषणा की। ट्रेजरी ने दीर्घकालिक सरकारी बॉन्ड क्षेत्रों, विशेष रूप से 10 से 20 साल और 20 से 30 साल की परिपक्वता वाले क्षेत्रों में पुनर्खरीद (बायबैक) संचालन के आकार को कम से कम दोगुना करने की योजना की पुष्टि की है।
इस नई व्यवस्था के तहत प्रति बायबैक ऑपरेशन की अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है। यह विस्तारित कार्यक्रम 9 सितंबर से लागू होगा और 4 नवंबर तक जारी रहेगा। बाजार में लिक्विडिटी बढ़ाए जाने की इस घोषणा ने अमेरिकी डॉलर (USD) पर चौतरफा दबाव डाल दिया है, जिससे वैश्विक मुद्रा बाजार, कीमती धातुओं और डिजिटल एसेट्स में हलचल तेज हो गई है।
कमजोर डॉलर से पाउंड और यूरो जोड़ियों को मिली बढ़त
अमेरिकी डॉलर में आई कमजोरी का फायदा उठाते हुए पाउंड-डॉलर (GBP/USD) जोड़ी ने शुक्रवार को अपनी साप्ताहिक तेजी को आगे बढ़ाया और 1.3650 के स्तर को पार करते हुए फरवरी के बाद के अपने उच्चतम स्तर को छुआ। ब्रिटेन के निराशाजनक रिटेल सेल्स आंकड़ों के बावजूद बेहतर परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) डेटा ने ब्रिटिश पाउंड स्टर्लिंग को मजबूत फंडामेंटल सहारा दिया।
इसी तरह यूरो-डॉलर (EUR/USD) जोड़ी ने शुक्रवार के यूरोपीय कारोबारी सत्र में तेजी दर्ज की और 1.1700 के पार पहुंच गई। जर्मनी और यूरोजोन के मिश्रित PMI आंकड़ों के बावजूद यूरो मजबूती के साथ डटा रहा। दैनिक मुद्रा मैट्रिक्स के अनुसार, यूरो प्रमुख वैश्विक मुद्राओं में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले सबसे मजबूत प्रदर्शन करने वाली करेंसी बनकर उभरा। इसी मजबूती के चलते EUR/GBP जोड़ी 50-दिवसीय मूविंग एवरेज के आसपास स्थिर बनी हुई है।
कीमती धातुओं और क्रिप्टोकरेंसी बाजार में तेजी
अमेरिकी डॉलर में जारी बिकवाली ने कमोडिटी और क्रिप्टोकरेंसी बाजारों को भी ऊर्जा प्रदान की है। सोने की कीमतों में शुक्रवार को तेजी जारी रही और खरीदारों की नजर $4,600 के प्रमुख रेजिस्टेंस स्तर पर टिकी है, जो पिछले छह महीनों के ट्रेडिंग रेंज का ऊपरी दायरा है। अमेरिकी ट्रेजरी द्वारा लिक्विडिटी बढ़ाने के कदम के बाद निवेशकों का रुझान सोने की तरफ बढ़ा है।
डिजिटल एसेट्स में भी तेजी का रुख देखा गया। क्रिप्टोकरेंसी बाजार शुक्रवार को बढ़त के साथ कारोबार करता दिख रहा है, जिसकी अगुवाई बिटकॉइन (BTC) ने $77,000 के ऊपर निकलकर की। अन्य प्रमुख ऑल्टकॉइन्स ने भी बिटकॉइन का अनुसरण किया, जिसमें इथेरियम (ETH) $2,400 के करीब और रिपल (XRP) $1.35 के आसपास कारोबार कर रहा था।
मैक्रो दृष्टिकोण: एसएंडपी ग्लोबल अमेरिकी पीएमआई डेटा पर नजर
बाजार सहभागियों की निगाहें अब एसएंडपी ग्लोबल द्वारा जारी किए जाने वाले अगस्त के शुरुआती परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (PMI) आंकड़ों पर टिकी हैं। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगस्त महीने में अमेरिकी आर्थिक गतिविधियों में हल्की सुस्ती देखने को मिल सकती है।
मैन्युफैक्चरिंग PMI अगस्त में घटकर 53.8 रहने का अनुमान है, जो जुलाई में 53.9 दर्ज किया गया था। वहीं सर्विसेज PMI के जुलाई के 54.6 से घटकर अगस्त में 54.0 रहने की संभावना जताई गई है। यदि पीएमआई आंकड़े सुस्ती की पुष्टि करते हैं, तो इससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति को लेकर बाजार की उम्मीदें और मजबूत होंगी, जिससे डॉलर पर दबाव बना रह सकता है।



















