अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा मौद्रिक नीति में किए गए बदलावों और नीति निर्माताओं के सख्त बयानों के बाद वैश्विक वित्तीय बाजारों में बड़ा हलचल देखने को मिल रहा है। इस फैसले के चलते अमेरिकी डॉलर में जबरदस्त मजबूती आई है, जिसका सीधा असर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर पड़ा है। वर्तमान में लाइव मार्केट डेटा के अनुसार, AUD/USD मुद्रा जोड़ी 0.7093 के स्तर पर कारोबार कर रही है, जो पिछले बंद स्तर 0.7126 से 0.46% की गिरावट को दर्शाती है। यह गिरावट तकनीकी रूप से बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि यह जोड़ी अब अपने 50-दिवसीय एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज यानी EMA50 के नीचे कारोबार कर रही है, जो वर्तमान में 0.7106 के स्तर पर है। अगस्त की शुरुआत से ही यह स्तर इस मुद्रा जोड़ी के लिए एक मजबूत सपोर्ट या फ्लोर के रूप में काम कर रहा था, लेकिन अब इसके टूटने से बाजार में मंदी का माहौल और गहरा गया है।
फेडरल रिजर्व का फैसला और डॉलर में आई मजबूती
अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने अपनी हालिया मौद्रिक नीति बैठक में उम्मीद के मुताबिक ब्याज दरों में 25 bps की बढ़ोतरी की घोषणा की है। इस बढ़ोतरी के बाद अमेरिकी फेडरल फंड्स रेट की नई सीमा 3.75% से बढ़कर 4.00% के दायरे में पहुंच गई है। ब्याज दरों में इस वृद्धि के साथ-साथ फेडरल रिजर्व के नीति निर्माताओं ने भविष्य की महंगाई को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। केंद्रीय बैंक के चेयर केविन वॉर्श ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बेहद सख्त यानी हॉकिश टिप्पणी की, जिससे बाजार में यह उम्मीद बढ़ गई है कि साल के अंत से पहले फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में और अधिक बढ़ोतरी कर सकता है। अमेरिकी केंद्रीय बैंक के इस आक्रामक रुख ने निवेशकों को अमेरिकी डॉलर की तरफ आकर्षित किया है, जिसके परिणामस्वरूप डॉलर इंडेक्स में तेज उछाल देखने को मिला और जोखिम वाली संपत्तियों में बिकवाली शुरू हो गई।
RBA और फेडरल रिजर्व की नीतियों में अंतर
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की दिशा तय करने में रिज़र्व बैंक ऑफ़ ऑस्ट्रेलिया यानी RBA की ब्याज दरें एक बेहद महत्वपूर्ण कारक हैं। वर्तमान में RBA की कैश रेट 4.35% पर स्थिर है, जो अभी भी फेडरल रिजर्व की नई 3.75% से 4.00% की सीमा से अधिक है। हालांकि, फेड के सख्त रुख के कारण दोनों देशों के बीच ब्याज दरों का यह अंतर कम होता जा रहा है। निवेशक अब RBA के अगले कदमों पर करीबी नजर रख रहे हैं। RBA की गवर्नर बुलोक गुरुवार को 23:30 GMT पर एक महत्वपूर्ण भाषण देने वाली हैं, जिसमें उनके बयानों से ऑस्ट्रेलिया की भावी मौद्रिक नीति के संकेत मिल सकते हैं। इसके बाद RBA का अगला ब्याज दर निर्धारण निर्णय 29 सितंबर को होने वाला है। यदि RBA भी महंगाई को काबू करने के लिए कड़ा रुख अपनाता है, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कुछ सहारा मिल सकता है, अन्यथा मंदी का यह दबाव जारी रहने की संभावना है।
तकनीकी विश्लेषण और महत्वपूर्ण रेसिस्टेंस व सपोर्ट स्तर
AUD/USD के लाइव चार्ट और तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो मंदी का दबाव साफ दिखाई दे रहा है। 14-दिवसीय आरएसआई यानी RSI(14) इस समय 42 के स्तर पर है, जो दर्शाता है कि बाजार में बिकवाली का दबाव बना हुआ है और इसमें आगे गिरावट की गुंजाइश है। इसके अलावा, स्टोकेस्टिक इंडिकेटर में फास्ट लाइन 1 और सिग्नल लाइन 12 के स्तर पर है, जो अत्यंत कमजोर मोमेंटम को प्रदर्शित करती है। एमएसीडी यानी MACD भी इस समय 0.00 और इसके सिग्नल लाइन के 0.00 के स्तर पर होने के साथ बेयरिश हिस्टोग्राम प्रदर्शित कर रहा है।
आने वाले समय में व्यापारियों के लिए कुछ प्रमुख स्तरों पर नजर रखना आवश्यक होगा
- रेसिस्टेंस स्तर: पहला महत्वपूर्ण रेसिस्टेंस 50-दिवसीय EMA के पास 0.7106 (या राउंड फिगर में 0.7100) पर है। यदि ऑस्ट्रेलियाई डॉलर इस स्तर को पार करने में सफल रहता है, तो अगला रेसिस्टेंस 0.7150 और उसके बाद सितंबर के उच्च स्तर 0.7239 से लेकर 0.7250 के पास देखा जा सकता है। 0.7150 के ऊपर डेली क्लोजिंग मिलने पर ही बेयरिश ट्रेंड के कमजोर होने के संकेत मिलेंगे।
- सपोर्ट स्तर: गिरावट की स्थिति में पहला तात्कालिक सपोर्ट 20-दिवसीय सपोर्ट यानी 0.7092 के पिवट स्तर पर है। इसके बाद बाजार में अगला बड़ा सपोर्ट स्तर 0.7050 पर दिखाई देगा। यदि यह स्तर भी टूटता है, तो बाजार 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर तक गिर सकता है, जो जुलाई में शुरू हुई ग्रीष्मकालीन रैली का शुरुआती बिंदु था।
कमोडिटी की कीमतें और चीन का प्रभाव
ऑस्ट्रेलिया एक संसाधन संपन्न देश है और इसकी अर्थव्यवस्था काफी हद तक प्राकृतिक संसाधनों के निर्यात पर टिकी हुई है। यही कारण है कि देश की मुद्रा, ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को एक कमोडिटी करेंसी माना जाता है। ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद आयरन ओर यानी लौह अयस्क है। साल 2021 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया का वार्षिक आयरन ओर निर्यात लगभग 118 बिलियन डॉलर का था, जिसका एक बहुत बड़ा हिस्सा चीन भेजा जाता है। ऐसे में वैश्विक बाजार में आयरन ओर की कीमतों में होने वाले उतार-चढ़ाव का सीधा असर ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की वैल्यू पर पड़ता है। सामान्य तौर पर जब आयरन ओर की कीमतें बढ़ती हैं, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर मजबूत होता है क्योंकि विदेशी खरीदारों को इसे खरीदने के लिए अधिक ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा की आवश्यकता होती है। इसके विपरीत, आयरन ओर की कीमतों में गिरावट सीधे तौर पर AUD को कमजोर करती है।
इसके साथ ही चीन की आर्थिक स्थिति भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर के लिए एक प्रमुख प्रेरक शक्ति है। चीन, ऑस्ट्रेलिया का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। जब चीनी अर्थव्यवस्था बेहतर प्रदर्शन करती है, तो वहां से ऑस्ट्रेलिया के कच्चे माल, माल और सेवाओं की मांग में तेजी आती है। इससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की वैश्विक मांग बढ़ती है और इसकी विनिमय दर में सुधार होता है। दूसरी ओर, यदि चीनी आर्थिक विकास की रफ्तार उम्मीद से धीमी रहती है, तो ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की मांग घट जाती है। इसलिए चीन के जीडीपी विकास और औद्योगिक उत्पादन से जुड़े आंकड़े अक्सर सीधे तौर पर AUD और इसके संबंधित करेंसी पेयर्स की कीमतों को प्रभावित करते हैं।
ट्रेड बैलेंस और बाजार की धारणा का महत्व
मैक्रोइकॉनॉमिक दृष्टिकोण से ऑस्ट्रेलिया का ट्रेड बैलेंस भी ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की मजबूती को तय करने में प्रमुख भूमिका निभाता है। ट्रेड बैलेंस असल में किसी देश द्वारा निर्यात से की गई कमाई और आयात पर किए गए खर्च के बीच का अंतर होता है। जब ऑस्ट्रेलिया के निर्यात उत्पादों की वैश्विक मांग अधिक होती है, तो देश का ट्रेड बैलेंस सरप्लस यानी सकारात्मक हो जाता है। यह सकारात्मक ट्रेड बैलेंस विदेशी खरीदारों द्वारा ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की मांग को बढ़ाता है, जिससे मुद्रा मजबूत होती है। इसके विपरीत, नकारात्मक ट्रेड बैलेंस या घाटा ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को कमजोर करने का काम करता है। इसके अतिरिक्त, वैश्विक बाजार की धारणा भी बेहद महत्वपूर्ण है। जब निवेशक जोखिम लेने के लिए तैयार होते हैं (रिस्क-ऑन सेंटिमेंट), तो वे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर जैसी उच्च यील्ड वाली और कमोडिटी-लिंक्ड मुद्राओं में निवेश करना पसंद करते हैं, जिससे AUD मजबूत होता है। वहीं जब बाजार में अनिश्चितता होती है और निवेशक सुरक्षित ठिकानों की तलाश करते हैं (रिस्क-ऑफ सेंटिमेंट), तो वे अमेरिकी डॉलर जैसे सेफ-हेवन एसेट्स की तरफ भागते हैं, जिससे ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में गिरावट आती है।
सोना और अन्य मुद्रा जोड़ियों पर फेड के फैसले का असर
फेडरल रिजर्व के इस फैसले ने केवल ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को ही प्रभावित नहीं किया है, बल्कि अन्य प्रमुख वैश्विक संपत्तियों पर भी इसका गहरा असर पड़ा है। सोने यानी गोल्ड ने अपनी दिन की शुरुआती बढ़त गंवा दी और नकारात्मक दायरे में आ गया। फेड के फैसले के तुरंत बाद XAU/USD जोड़ी कुछ समय के लिए $4,360 के स्तर को पार कर गई थी, लेकिन केविन वॉर्श की सख्त टिप्पणियों के बाद इसमें तेज गिरावट दर्ज की गई और यह अब $4,250 के प्राइस जोन की तरफ बढ़ रही है।
इसी तरह, विदेशी मुद्रा बाजार में USD/JPY जोड़ी ने भी जबरदस्त छलांग लगाई और गुरुवार को सुबह के कारोबार में यह 156.00 के आसपास एक नए साप्ताहिक उच्च स्तर पर पहुंच गई। जापानी येन की बात करें तो पिछले एक दशक से भी अधिक समय से जापान की बेहद कम ब्याज दरों ने वैश्विक स्तर पर खरबों डॉलर के निवेश को फाइनेंस करने में मदद की है, जिससे येन दुनिया के सबसे सस्ते फंडिंग स्रोतों में से एक बन गया है। हालांकि, बैंक ऑफ जापान द्वारा इस सप्ताह अपनी मौद्रिक नीति को और सख्त करने की उम्मीद जताई जा रही है, जिससे यह स्थिति एक नए चरण में प्रवेश कर सकती है। जहां दुनिया की अधिकांश प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं ने पिछले कुछ समय में ब्याज दरों में लगातार बढ़ोतरी की है, वहीं जापान इस मामले में एक अपवाद बना हुआ था, लेकिन अब वहां भी नीतिगत बदलावों की सुगबुगाहट तेज हो गई है।


















