सोमवार, 24 अगस्त को विदेशी मुद्रा बाजार में निवेशकों का रुख सतर्क बना हुआ है और अमेरिका के संभावित आर्थिक प्रतिबंधों के ऐलान से पहले प्रमुख मुद्राएं शांत नजर आ रही हैं। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले विभिन्न मुद्राओं के प्रदर्शन को दर्शाने वाली तालिका में कैड के खिलाफ डॉलर सबसे मजबूत स्थिति में दिखाई दे रहा है। हीट मैप के जरिए यह स्पष्ट होता है कि बेस करेंसी को बाएं कॉलम से और कोट करेंसी को शीर्ष पंक्ति से चुनकर विभिन्न मुद्राओं के बीच आपसी प्रतिशत बदलाव को कैसे समझा जा सकता है। उदाहरण के लिए, यदि कोई बाएं कॉलम से अमेरिकी डॉलर चुनता है और जापानी येन तक क्षैतिज रेखा में आगे बढ़ता है, तो प्रदर्शित प्रतिशत बदलाव अमेरिकी डॉलर और जापानी येन के बीच के संबंध को दर्शाता है।
प्रमुख घटनाओं और संकेतकों का विश्लेषण
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, व्हाइट हाउस की तात्कालिक नीतिगत घोषणाओं से परे इस सप्ताह अमेरिकी कैलेंडर पर दो मुख्य कार्यक्रम बेहद महत्वपूर्ण हैं। बुधवार को जुलाई महीने के अमेरिकी कोर पीसीई इन्फ्लेशन के आंकड़े जारी होने वाले हैं और शुक्रवार दोपहर को जैक्सन होल संगोष्ठी में केविन वॉर्श का मुख्य भाषण होना है। विशेषज्ञों का मानना है कि हालांकि इस बात की बहुत कम संभावना है कि वह अगले महीने मौद्रिक नीति को लेकर फेडरल रिजर्व के अगले कदम पर कोई स्पष्ट रोशनी डालेंगे, लेकिन उन्हें फेड की महंगाई से लड़ने की साख को मजबूत करने पर पूरा जोर देना होगा। यह अनिवार्यता इसलिए भी है क्योंकि जुलाई की उनकी प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ट्रेजरी बाजार के लंबे छोर में बिकवाली का दौर शुरू हो गया था।
प्रमुख मुद्राओं का हाल और बाजार का रुख
यूएसडी/जेपीवाई यानी अमेरिकी डॉलर और जापानी येन में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है और पिछले सप्ताह की हलचल के बाद यह जोड़ी 159.00 के थोड़ा ऊपर टिकी हुई है। फाइनेंशियल मार्केट की शब्दावली में रिस्क-ऑन और रिस्क-ऑफ दो ऐसे व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले शब्द हैं जो निवेशकों की जोखिम उठाने की क्षमता को दर्शाते हैं। रिस्क-ऑन बाजार में निवेशक भविष्य को लेकर आशावादी होते हैं और जोखिम भरे资产 खरीदने में अधिक रुचि रखते हैं। इसके विपरीत, रिस्क-ऑफ बाजार में निवेशक भविष्य को लेकर चिंतित होने के कारण सुरक्षित विकल्प तलाशने लगते हैं और ऐसे एसेट्स खरीदते हैं जिनसे कम लेकिन निश्चित रिटर्न मिलने की उम्मीद होती है।
आम तौर पर रिस्क-ऑप्टिमिस्टिक अवधि में शेयर बाजार ऊपर जाते हैं, सोने को छोड़कर अधिकांश कमोडिटीज की कीमतों में तेजी आती है और कमोडिटी निर्यातक देशों की मुद्राएं मजबूत होती हैं। इसके अलावा क्रिप्टोकरेंसी में भी तेजी देखने को मिलती है। दूसरी ओर, रिस्क-ऑफ बाजार के दौरान सरकारी बॉन्ड मजबूत होते हैं, सोना चमक बिखेरता है और जापानी येन, स्विस फ्रैंक और अमेरिकी डॉलर जैसी सेफ-हेवन मुद्राएं लाभ कमाती हैं। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर, कनाडाई डॉलर, न्यूजीलैंड डॉलर और रूबल या दक्षिण अफ्रीकी रैंड जैसी छोटी मुद्राएं भी रिस्क-ऑन बाजार में ऊपर जाती हैं क्योंकि इनकी अर्थव्यवस्थाएं कमोडिटी निर्यात पर बहुत अधिक निर्भर करती हैं।
सुरक्षित निवेश और विभिन्न मुद्राओं की चाल
सुरक्षित निवेश के दौर में अमेरिकी डॉलर, जापानी येन और स्विस फ्रैंक में तेजी आने की प्रवृत्ति होती है। अमेरिकी डॉलर दुनिया की आरक्षित मुद्रा है और संकट के समय निवेशक अमेरिकी सरकारी कर्ज खरीदते हैं क्योंकि दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के डिफॉल्ट होने की संभावना न के बराबर होती है। जापानी येन में तेजी इसलिए आती है क्योंकि जापानी सरकारी बॉन्ड की मांग बढ़ती है, जिनका एक बड़ा हिस्सा घरेलू निवेशकों के पास होता है जो संकट के समय भी उन्हें नहीं बेचते। स्विस फ्रैंक को कड़े बैंकिंग कानूनों के कारण निवेशकों को बेहतर पूंजी सुरक्षा प्रदान करने के लिए जाना जाता है।
जीबीपी/USD यानी ब्रिटिश पाउंड और अमेरिकी डॉलर की जोड़ी सोमवार को सप्ताह की शुरुआत में नकारात्मक झुकाव के साथ लगभग 1.3650 के आसपास कारोबार कर रही है। ईरान पर संभावित अमेरिकी आर्थिक प्रतिबंधों को लेकर अनिश्चितता के बीच अमेरिकी डॉलर ने अपनी जमीन वापस हासिल कर ली है, जिससे जोखिम के प्रति संवेदनशील ब्रिटिश पाउंड पिछड़ गया है। इसके अलावा, EUR/USD यानी यूरो और डॉलर की जोड़ी सोमवार के यूरोपीय सत्र में 1.1700 के नीचे रक्षात्मक रूप से कारोबार कर रही है। पिछले सप्ताह अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड बायबैक योजना के कारण हुई बिकवाली के बाद डॉलर में आ रही मामूली रिकवरी के कारण इस जोड़ी को संघर्ष करना पड़ रहा है।
सोने की स्थिति और ट्रेजरी बायबैक का प्रभाव
सोना सोमवार को यूरोपीय सत्र के दौरान 4,650 डॉलर के करीब, अपने तीन महीने के उच्चतम स्तर के बेहद नजदीक बना हुआ है। अमेरिकी ट्रेजरी की बायबैक योजना के बाद अमेरिकी डॉलर में लगातार कमजोरी और अमेरिका-कनाडा के बीच ताज़ा व्यापारिक तनाव के बीच यह कीमती धातु लाभ की स्थिति में है। व्यापारी ईरान पर प्रतिबंधों के विवरण का इंतजार कर रहे हैं ताकि उन्हें आगे की दिशा मिल सके। अमेरिकी ट्रेजरी ने बुधवार को अपने निर्धारित कैलेंडर से हटकर एक बड़ा कदम उठाया, जिसके तहत उसने 10-वर्षीय से 20-वर्षीय और 20-वर्षीय से 30-वर्षीय क्षेत्रों में तरलता समर्थन बायबैक संचालन के आकार को कम से कम दोगुना करने की घोषणा की। इसके तहत अधिकतम सीमा को 2 अरब डॉलर प्रति ऑपरेशन से बढ़ाकर कम से कम 4 अरब डॉलर कर दिया गया है, जो 9 सितंबर से प्रभावी होकर 4 नवंबर तक चलेगा।



















