अंतरराष्ट्रीय मुद्रा विनिमय बाजार में साझा यूरोपीय मुद्रा यूरो भारी बिकवाली के दबाव में फंस गई है और 17 महीने के निचले स्तर के करीब संघर्ष कर रही है। फ्रांस के सार्वजनिक वित्त को लेकर गहराते संकट और अमेरिका में लगातार चढ़ती बॉन्ड यील्ड ने वैश्विक स्तर पर अमेरिकी डॉलर को जबरदस्त मजबूती दी है। यूरो/यूएसडी (EUR/USD) विनिमय दर पर बना यह दबाव तब और संवेदनशील हो गया है जब दुनिया भर के वित्तीय बाजार फेडरल ओपन मार्केट कमेटी (FOMC) के मिनट्स का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं ताकि फेडरल रिजर्व के आगामी मौद्रिक रुख का स्पष्ट संकेत मिल सके।
अमेरिकी डॉलर इंडेक्स और ट्रेजरी यील्ड में बड़ा उछाल
अमेरिकी मुद्रा की मजबूती को मापने वाला यूएस डॉलर इंडेक्स (DXY), जो छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं की एक बास्केट के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाता है, लगभग 102.30 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। डॉलर इंडेक्स में दिखाई दे रहा यह स्तर इससे पहले अप्रैल 2025 में दर्ज किया गया था। अमेरिकी मुद्रा की इस तेज वापसी को घरेलू सरकारी बॉन्ड से बड़ा सहारा मिला है। बेंचमार्क 10 वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.365 प्रतिशत तक पहुंच गई, जो साल 2002 के बाद का इसका उच्चतम स्तर है। हालांकि बाद में यह थोड़ा शांत होकर 5.31 प्रतिशत के आसपास स्थिर हुई। अमेरिकी बॉन्ड पर बढ़ते रिटर्न ने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के लिए डॉलर को बेहद आकर्षक बना दिया है, जिससे प्रतिद्वंद्वी मुद्राओं पर तीखा दबाव बना हुआ है।
फ्रांस के सार्वजनिक वित्त पर संकट और बढ़ता बॉन्ड स्प्रेड
यूरोपीय संघ के भीतर फ्रांस की बजटीय स्थिति और सार्वजनिक वित्त पर पैदा हुई अनिश्चितता साझा मुद्रा यूरो के लिए सबसे बड़ी बाधा साबित हो रही है। इस आर्थिक उथल-पुथल ने फ्रांस के लिए उधारी की लागत को काफी बढ़ा दिया है, जिसके परिणामस्वरूप बॉन्ड यील्ड का अंतर लगातार चौड़ा होता जा रहा है। नीदरलैंड के वित्तीय संस्थान एबीएन एमरो (ABN Amro) के रणनीतिकारों ने इस स्थिति का विश्लेषण करते हुए बताया है कि जब राजनीतिक या राजकोषीय चिंताओं के कारण यूरोज़ोन के किसी प्रमुख देश या कई देशों में सरकारी बॉन्ड यील्ड तेजी से बढ़ती है, तो यूरो अक्सर कमजोर पड़ जाता है। रणनीतिकारों के अनुसार ऐसे घटनाक्रमों में दूसरे देशों तक संकट फैलने की आशंका पैदा होती है, जिसका सीधा असर मुद्रा की विनिमय दर पर पड़ता है।
एबीएन एमरो के रणनीतिकारों का यह भी तर्क है कि यूरोज़ोन में वित्तीय और राजनीतिक अनिश्चितता के दौर अक्सर सटोरियों द्वारा यूरो पर बड़े पैमाने पर मंदी के दांव लगाने और यूरो/यूएसडी के गिरने के साथ मेल खाते हैं। इस संदर्भ में फ्रांस और जर्मनी के 10 वर्षीय सरकारी बॉन्ड के बीच का स्प्रेड विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। जर्मन बॉन्ड के मुकाबले फ्रांसीसी बॉन्ड पर बढ़ती यील्ड यह स्पष्ट रूप से दर्शाती है कि बढ़ता हुआ यील्ड अंतर और राजनीतिक जोखिम किस तरह साझा मुद्रा को सीधे चोट पहुंचा रहे हैं।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने गहराती नीतिगत दुविधा
यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के समक्ष इस समय बेहद जटिल आर्थिक स्थिति खड़ी हो गई है। सामान्य परिस्थितियों में जब महंगाई दर बैंक के तय लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से भाग रही हो, तो उसका सीधा और पारंपरिक समाधान ब्याज दरों में बढ़ोतरी करना होता है। लेकिन वर्तमान परिस्थितियां सामान्य नहीं हैं। इस बार बॉन्ड बाजार सरकारी उधारी लागत बढ़ाकर मौद्रिक कसावट का काम खुद ही कर रहा है। बॉन्ड यील्ड में यह अनियंत्रित उछाल अर्थव्यवस्था पर अपने आप दबाव बना रहा है, जिससे यूरोपीय सेंट्रल बैंक के सामने यह कठिन चुनौती आ गई है कि वह मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए कदम उठाए या कमजोर पड़ती यूरोज़ोन अर्थव्यवस्था को वित्तीय झटकों से बचाए।
प्रमुख मुद्राओं की आपसी चाल और एशियाई सत्र का रुख
दैनिक मुद्रा प्रदर्शन के आंकड़ों को देखें तो यूरो आज प्रमुख सूचीबद्ध वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले दबाव में रहा, हालांकि न्यूजीलैंड डॉलर के सामने साझा यूरोपीय मुद्रा का प्रदर्शन तुलनात्मक रूप से सबसे मजबूत रहा। मुद्रा हीटमैप के जरिए विभिन्न मुद्राओं के आपसी उतार-चढ़ाव को बारीकी से ट्रैक किया जा रहा है, जहां यूरो और अमेरिकी डॉलर की विनिमय दर में स्पष्ट गिरावट दिखाई दे रही है।
दूसरी तरफ अन्य प्रमुख जोड़ियों में भी डॉलर का दबदबा साफ दिखा। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) अपनी पिछली रिकवरी को आगे बढ़ाने में नाकाम रहा और बुधवार के एशियाई कारोबारी सत्र में नकारात्मक रुख के साथ 0.7000 के स्तर से नीचे फिसल गया। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) की ओर से सख्त मौद्रिक नीति की उम्मीदों के बावजूद, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में आई तेजी ने निवेशकों को डॉलर की ओर आकर्षित किया, जिससे यह जोड़ी दबाव में बनी रही। अमेरिकी डॉलर बनाम जापानी येन (USD/JPY) भी एशियाई सत्र में बुधवार को 158.50 के करीब डेढ़ हफ्ते के उच्चतम स्तर के पास कारोबार करता रहा। बैंक ऑफ जापान (BoJ) की नरम टिप्पणियों और अमेरिकी यील्ड में ताजा उछाल ने डॉलर की मांग बढ़ाकर इस जोड़ी को सहारा दिया, जहां खरीदार अब आगे की तेजी के लिए 200 दिवसीय एसएमए बाधा को पार करने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार पर असर
अमेरिकी डॉलर के आक्रामक उछाल और ट्रेजरी यील्ड में आई जोरदार तेजी ने सुरक्षित निवेश माने जाने वाले कमोडिटी और डिजिटल एसेट बाजारों को भी पीछे धकेल दिया है। सोने ने मंगलवार की अच्छी-खासी बढ़त गंवा दी और बुधवार को प्रति ट्रॉय औंस 4,000 डॉलर के प्रमुख स्तर के ठीक ऊपर आ गया। पूरे कर्व पर अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में उछाल और डॉलर की तेजी के चलते कीमती धातु में यह तेज गिरावट दर्ज की गई।
डिजिटल परिसंपत्तियों के क्षेत्र में बिटकॉइन 87,200 डॉलर के स्तर के आसपास भारी सप्लाई का सामना करने के बाद सुधारात्मक गिरावट में आ गया है। इस गिरावट का असर पूरे डिजिटल टोकन बाजार पर दिखाई दे रहा है। इथेरियम फिसलकर अपने अगले अहम समर्थन स्तर 2,600 डॉलर की ओर बढ़ रहा है, जबकि रिपल 1.45 डॉलर के मांग क्षेत्र के करीब अपने गिरावट के दौर को आगे बढ़ा रहा है। अब सबकी निगाहें फेडरल रिजर्व की बैठक के ब्योरे पर टिकी हैं, जिससे आने वाले दिनों में ब्याज दरों और मुद्रा विनिमय दरों की वास्तविक दिशा तय होगी।




















