यूरोपीय अर्थव्यवस्था में विनिर्माण क्षेत्र के दम पर रिकवरी के ठोस संकेत मिल रहे हैं, लेकिन साझा मुद्रा यूरो मुद्रा बाजारों में अपेक्षित मजबूती बनाए रखने के लिए संघर्ष कर रही है। सितंबर महीने में यूरो क्षेत्र का मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई चार साल के उच्चतम स्तर पर स्थिर रहा, जबकि कारखानों का उत्पादन लगभग पांच वर्षों में सबसे तेज गति से बढ़ा है। इसके अतिरिक्त, नए ऑर्डरों और लंबित कार्यों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है, जो मांग में स्पष्ट मजबूती की पुष्टि करती है। इसके बावजूद, सकारात्मक आर्थिक आंकड़ों और यूरोपीय सेंट्रल बैंक द्वारा की गई एक और ब्याज दर वृद्धि के बाद भी यूरो के नॉमिनल प्रभावी विनिमय दर में सितंबर की शुरुआत से 1.4% की गिरावट देखी गई है।
यूरो मुद्रा में यह कमजोरी फ्रांस की राजकोषीय स्थिति को लेकर चिंताएं बढ़ने से काफी पहले ही शुरू हो गई थी। जब यह सुस्ती आरंभ हुई, उस समय यूरो तकनीकी रूप से ओवरवैल्यूड दिखाई दे रहा था और ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदें काफी खिंची हुई थीं। साथ ही, सीमित शॉर्ट पोजीशन और अपर्याप्त हेजिंग ने मुद्रा के स्तरों में इस सुधार की गुंजाइश बना दी थी। अब वैश्विक ऋण बाजारों में हो रहे व्यापक उतार-चढ़ाव ने वित्तीय परिस्थितियों को और कड़ा कर दिया है, जिससे केंद्रीय बैंक के सामने नीतिगत स्तर पर नई मुश्किलें खड़ी हो गई हैं।
ईसीबी की नीतिगत दुविधा और बॉन्ड बाजार का प्रभाव
यूरोपीय सेंट्रल बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लेगार्ड ने पहले ही स्पष्ट किया है कि मौजूदा फ्रंट-एंड ब्याज दर स्तर आर्थिक विकास को धीमा करेंगे। वैश्विक बॉन्ड बाजारों में हालिया हलचल राजकोषीय चैनल के माध्यम से वित्तीय परिस्थितियों को अतिरिक्त रूप से सख्त बना रही है। ईसीबी के मुख्य अर्थशास्त्री फिलिप लेन ने भी इसी दृष्टिकोण का समर्थन करते हुए रेखांकित किया है कि कर्ज की बढ़ती लागत बाजार पर दबाव डाल रही है। आमतौर पर जब मुद्रास्फीति लक्ष्य से लगभग दोगुनी रफ्तार से चल रही हो, तो केंद्रीय बैंक का सीधा कदम ब्याज दरें बढ़ाना होता है, लेकिन वर्तमान हालात सामान्य नहीं हैं। इस बार बॉन्ड बाजार पहले ही केंद्रीय बैंक के हिस्से की सख्ती खुद पूरी कर रहा है, जिससे नीति निर्माताओं के समक्ष एक जटिल असमंजस पैदा हो गया है।
दूसरी ओर, फ्रांस की सरकार ने राजकोषीय सुदृढ़ीकरण उपायों की घोषणा की है, और संबंधित कानून चौथी तिमाही में पारित होने की संभावना है। 2011-2012 के यूरोजोन संकट के विपरीत, फ्रांसीसी सरकारी बॉन्ड यानी ओएटी के उतार-चढ़ाव का कोई नकारात्मक असर विदेशी मुद्रा बाजार पर नहीं पड़ा है। ओएटी फ्यूचर्स में वोलेटिलिटी में भारी उछाल के बावजूद यूरो-यूएसडी की दस-दिवसीय रियलाइज्ड वोलेटिलिटी मई के बाद से अपने तय दायरे के भीतर ही बनी हुई है। ईसीबी द्वारा सख्त ब्याज दर मार्गदर्शन से पीछे हटने के फैसले ने भी मुद्रा बाजार में इस अस्थिरता को सीमित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
लाइव मार्केट डेटा और यूरो-यूएसडी तकनीकी विश्लेषण
क्लोज-बेल सत्र के ताजा लाइव आंकड़ों के अनुसार, यूरो-यूएसडी वर्तमान में 1.12 के स्तर पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद भाव 1.12 की तुलना में 0.25% की गिरावट दर्शाता है। इस मुद्रा जोड़ी का 52-सप्ताह का ट्रेडिंग दायरा 1.12 से 1.20 के बीच रहा है, जबकि ट्रेडिंग वॉल्यूम अपने 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना के बराबर दर्ज किया गया है। तकनीकी संकेतकों की बात करें तो 14-दिवसीय आरएसआई 15 के स्तर पर पहुंच चुका है, जो इस समय जोड़ी के गहरे ओवरसोल्ड क्षेत्र में होने का संकेत देता है। एमएसीडी -0.01 पर है जबकि इसका सिग्नल भी -0.01 पर बना हुआ है, जो मंदी के रुझान की पुष्टि करता है।
मूविंग एवरेज के मोर्चे पर, ईएमए 20 का स्तर 1.14, ईएमए 50 का स्तर 1.15 और ईएमए 200 का स्तर 1.16 पर स्थित है। 50-दिवसीय एसएमए 1.15 और 200-दिवसीय एसएमए 1.16 पर होने के साथ ही चार्ट पर डेथ क्रॉस (ईएमए 50 का ईएमए 200 से नीचे जाना) दिखाई दे रहा है, जो मुद्रा जोड़ी के दीर्घकालिक डाउनट्रेंड को दर्शाता है। 20-दिवसीय बॉलिंजर बैंड 1.12 से 1.17 के बीच फैला है, जिसका मध्य स्तर 1.14 है। 14-दिवसीय एडीएक्स 47 के स्तर पर मजबूत ट्रेंड की ओर इशारा कर रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक की फास्ट लाइन 8 और सिग्नल लाइन 16 पर दर्ज की गई है। 14-दिवसीय एटीआर 0.01 पर बना हुआ है। मुख्य स्तरों में पिवट 1.12, पहला रेजिस्टेंस आर1 1.12, दूसरा रेजिस्टेंस आर2 1.13, पहला सपोर्ट एस1 1.11 और दूसरा सपोर्ट एस2 1.11 पर स्थित है, जबकि 20-दिवसीय सपोर्ट 1.12 और रेजिस्टेंस 1.16 के आसपास है।
वैश्विक मुद्रा बाजार और अमेरिकी डॉलर की चाल
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में नए उछाल और भू-राजनीतिक अनिश्चितता के चलते अमेरिकी डॉलर को निचले स्तरों पर खरीदारों का समर्थन मिल रहा है। इस पृष्ठभूमि में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर बनाम अमेरिकी डॉलर (AUD/USD) अपनी हालिया बढ़त को बरकरार रखने में विफल रहा है और एशियाई सत्र में 0.7000 के स्तर से नीचे नकारात्मक रुख के साथ कारोबार कर रहा है, जबकि रिज़र्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया से सख्त नीति की उम्मीदें बनी हुई थीं। बाजार सहभागियों की नजर अब एफओएमसी मिनट्स पर टिकी हुई है।
अमेरिकी डॉलर और जापानी येन (USD/JPY) की जोड़ी एशियाई सत्र में 158.50 के करीब डेढ़ सप्ताह के उच्च स्तर पर बनी हुई है। डॉलर के खरीदार अब एफओएमसी मिनट्स से पहले 200-दिवसीय एसएमए के स्तर को पार करने का इंतजार कर रहे हैं। बैंक ऑफ जापान की ओर से आए नरम बयानों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी ने इस जोड़ी को अतिरिक्त मजबूती प्रदान की है।
सोने और क्रिप्टोकरेंसी बाजार में सुधार
कमोडिटी बाजार में सोने ने मंगलवार की बढ़त को पीछे छोड़ दिया है और बुधवार को प्रति ट्रॉय औंस 4,000 डॉलर के प्रमुख स्तर के ठीक ऊपर आ गया है। पीली धातु में आई इस तेज गिरावट का मुख्य कारण अमेरिकी डॉलर में मजबूती और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में सभी अवधियों में देखा गया उछाल है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भी सुधार का दौर जारी है। 87,200 डॉलर के पास भारी बिकवाली दबाव के बाद बिटकॉइन में गिरावट दर्ज की गई है। अन्य प्रमुख टोकनों में भी करेक्शन का रुख देखा जा रहा है; एथेरियम फिसलकर 2,600 डॉलर के प्रमुख सपोर्ट क्षेत्र की ओर बढ़ रहा है, जबकि रिपल 1.45 डॉलर के डिमांड क्षेत्र के नजदीक अपने डाउन लेग को आगे बढ़ा रहा है। यूरोपीय संघ में मुद्रास्फीति के अमेरिकी मूल्य वृद्धि से आगे निकलने और आगामी केंद्रीय बैंक बैठकों के मद्देनजर निवेशक बेहद सतर्क रुख अपना रहे हैं।





















