वैश्विक वित्तीय बाजारों में सतर्कता और अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में जोरदार उछाल के बीच बुधवार को ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव गहरा गया। लगातार तीन कारोबारी सत्रों की बढ़त के सिलसिले को तोड़ते हुए AUD/USD जोड़ी 0.44% गिरकर 0.6950 के आसपास कारोबार करती देखी गई। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व की पिछली बैठक के मिनट्स जारी होने से पहले विदेशी मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर को मजबूत सहारा मिल रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया में आगे ब्याज दरें बढ़ने की संभावना कमजोर पड़ने से स्थानीय मुद्रा की मांग प्रभावित हुई है।
ट्रेजरी यील्ड में मजबूती और डॉलर की मांग
भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के जारी रहने के बीच अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में नई तेजी आई है, जिसने निवेशकों को ग्रीनबैक की तरफ आकर्षित किया है। बेंचमार्क 10-वर्षीय अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड 5.33% के आसपास पहुंच गई है, जो साल 2002 के बाद का उच्चतम स्तर है। इतनी ऊंची यील्ड से अमेरिकी परिसंपत्तियों की तुलनात्मक अपील काफी मजबूत हो गई है, जिससे विदेशी निवेशक डॉलर की खरीदारी बढ़ा रहे हैं।
हालांकि, हालिया अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों ने निकट अवधि में फेडरल रिजर्व द्वारा और अधिक मौद्रिक सख्ती की आशंकाओं को कुछ हद तक सीमित भी किया है। पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर्स (PCE) प्राइस इंडेक्स के जरिए मापी गई महंगाई में नरमी और श्रम बाजार में नरमी के संकेतों के बाद अक्टूबर बैठक में दर वृद्धि की संभावनाएं कम आंकी जा रही हैं। इसके बावजूद बॉन्ड बाजार की भारी तेजी ने डॉलर इंडेक्स और ग्रीनबैक को बढ़त दिला रखी है।
ऑस्ट्रेलिया में ब्याज दरें बढ़ने की उम्मीदें कमजोर
ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की कमजोरी की दूसरी बड़ी वजह रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया (RBA) द्वारा दरों में बढ़ोतरी की उम्मीदों का घटना है। हालिया मुद्रास्फीति के आंकड़े अनुमान के अनुरूप आने के बाद ब्याज दर वृद्धि की अटकलें सुस्त पड़ गई हैं। ASX RBA रेट ट्रैकर के अनुसार, मनी मार्केट्स अब इस बात की केवल 24% संभावना देख रहे हैं कि ऑस्ट्रेलियाई केंद्रीय बैंक अपनी नवंबर बैठक में नीतिगत दरों में बढ़ोतरी करेगा। जब तक ब्याज दरों को लेकर आक्रामक रुख की पुष्टि नहीं होती, तब तक ऑस्ट्रेलियाई डॉलर पर दबाव बने रहने का अनुमान है।
तकनीकी स्तर और लाइव बाजार रुझान
चार्ट पर AUD/USD के लिए शुरुआती रुकावट 0.6955 के स्तर पर स्थित है। यदि जोड़ी इससे ऊपर निकलती है, तो 0.6957 के करीब 100-अवधि के एसएमए और 0.6975 पर स्थित 200-अवधि के एसएमए पर तकनीकी बाधाएं सामने आएंगी। इसके बाद क्षैतिज अवरोध 0.6980 और 0.7005 के स्तर पर बने हुए हैं। गिरावट की स्थिति में पहला समर्थन 0.6907 पर है, जिसके नीचे 0.6883 का मजबूत आधार मौजूद है जहां बिकवाली की रफ्तार थम सकती है।
लाइव मार्केट आंकड़ों के अनुसार, AUD/USD 0.6964 पर कारोबार कर रहा है, जो पिछले बंद स्तर 0.6967 से 0.05% कम है। परिसंपत्ति का 52-सप्ताह का दायरा 0.6422 से 0.7277 के बीच रहा है और ट्रेडिंग वॉल्यूम 20-दिवसीय औसत के 1.00 गुना पर सामान्य है। तकनीकी संकेतकों में 14-अवधि का आरएसआई 33 पर चल रहा है, जो कमजोर गति का संकेत देता है। एमएसीडी मंदी के दायरे में बना हुआ है, जबकि 14-दिवसीय एडीएक्स 39 के साथ एक सक्रिय ट्रेंड दर्शा रहा है। शॉर्ट-टर्म मूविंग एवरेज में 20-दिवसीय ईएमए 0.7034, 50-दिवसीय ईएमए 0.7065 और 200-दिवसीय ईएमए 0.6968 पर स्थित है, जबकि दैनिक धुरी बिंदु 0.6965 के आसपास बना हुआ है।
वैश्विक मुद्राओं और कमोडिटी बाजारों की स्थिति
मुद्रा बाजार के अन्य हिस्सों में भी डॉलर की मजबूती का व्यापक असर देखने को मिल रहा है। बुधवार के एशियाई सत्र में AUD/USD 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे नकारात्मक रुख के साथ जूझता रहा। इसी दौरान जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) डेढ़ हफ्ते के उच्च स्तर 158.50 के करीब टिका रहा। बैंक ऑफ जापान की नरम टिप्पणियों और अमेरिकी यील्ड में तेजी ने इस जोड़ी को मजबूत सहारा दिया है, जहां खरीदार आगे की बढ़त से पहले 200-दिवसीय एसएमए के स्तर पर नजरें गड़ाए हुए हैं।
कमोडिटी और क्रिप्टो बाजारों में भी अमेरिकी बॉन्ड यील्ड की उछाल का दबाव साफ दिखा। मंगलवार की बढ़त को पीछे छोड़ते हुए सोना गिरकर 4,000 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के अहम स्तर के ठीक ऊपर आ गया। डॉलर में उछाल और पूरी यील्ड कर्व पर ट्रेजरी दरों में आए उछाल ने सोने में तेज मुनाफावसूली कराई है। क्रिप्टो बाजार में बिटकॉइन को 87,200 डॉलर के पास आपूर्ति का सामना करने के बाद सुधारात्मक गिरावट झेलनी पड़ी। अन्य डिजिटल टोकनों में एथेरियम 2,600 डॉलर के प्रमुख समर्थन स्तर की ओर खिसक गया, जबकि रिपल 1.45 डॉलर के मांग क्षेत्र के पास अपने डाउनट्रेंड को आगे बढ़ाता दिखा।
यूरोपीय सेंट्रल बैंक की दुविधा
यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के सामने भी नीतिगत मोर्चे पर कठिन स्थिति बनी हुई है। जब मुद्रास्फीति अपने लक्ष्य से लगभग दोगुनी गति से चल रही हो, तब केंद्रीय बैंकों के पास ब्याज दरें बढ़ाने का सीधा विकल्प होता है। हालांकि, मौजूदा वित्तीय हालात असाधारण हैं क्योंकि बॉन्ड बाजार में यील्ड बढ़ने की वजह से मौद्रिक सख्ती का एक हिस्सा पहले ही अपने आप लागू हो रहा है, जिससे यूरोपीय नीति निर्माताओं के सामने जटिल असमंजस पैदा हो गया है।




















