अंतरराष्ट्रीय मुद्रा बाजार में शुक्रवार को अमेरिकी श्रम बाजार के कमजोर आंकड़ों ने डॉलर पर जोरदार दबाव बना दिया। अमेरिका में सितंबर महीने के दौरान रोजगार सृजन के आंकड़े अनुमान से काफी पीछे रहने और पिछले महीनों के आंकड़ों में भारी कटौती होने के कारण ग्रीनबैक में चौतरफा नरमी देखी गई। इस गिरावट का सीधा फायदा न्यूजीलैंड डॉलर को मिला और यह सुधरकर 0.5610 के आसपास पहुंच गया, जिसमें सत्र के दौरान 0.12% की मजबूती दर्ज की गई। हालांकि, न्यूजीलैंड के घरेलू मोर्चे पर 7 नवंबर को होने वाले आम चुनावों की सरगर्मियों और ओपिनियन पोल के नतीजों ने मुद्रा की इस बढ़त पर अंकुश लगाने का काम किया है।
अमेरिकी श्रम बाजार में भारी सुस्ती और पेरोल आंकड़े
अमेरिकी ब्यूरो ऑफ लेबर स्टैटिस्टिक्स (BLS) द्वारा शुक्रवार को जारी किए गए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में नॉनफॉर्म पेरोल्स (NFP) में केवल 29K का इजाफा हुआ। बाजार विश्लेषक और अर्थशास्त्री 90K रोजगार सृजन की उम्मीद लगाए बैठे थे, जिसके मुकाबले यह संख्या बेहद निराशाजनक रही। रिपोर्ट की गंभीरता तब और बढ़ गई जब पिछले महीनों के पेरोल आंकड़ों में बड़ा डाउनवर्ड संशोधन सामने आया। अगस्त महीने में पहले बताए गए 162K रोजगार के आंकड़े को घटाकर 133K कर दिया गया, जबकि जुलाई के प्रारंभिक अनुमान 21K की बढ़ोतरी को बदलकर अब 10K नौकरियों की शुद्ध गिरावट के रूप में दर्ज किया गया है। कुल मिलाकर, जुलाई और अगस्त के रोजगार सृजन में संयुक्त रूप से 60K की भारी कटौती दर्ज की गई है।
रिपोर्ट के अन्य आंतरिक घटकों ने भी अमेरिकी डॉलर को कोई राहत नहीं दी। अमेरिका की बेरोजगारी दर मामूली रूप से बढ़कर 4.2% पर पहुंच गई। वहीं, लेबर फोर्स पार्टिसिपेशन रेट पूर्व के 61.6% से सुधरकर 61.8% दर्ज किया गया। वेतन वृद्धि के मोर्चे पर, औसत प्रति घंटा कमाई (एवरेज ऑवर्ली अर्निंग्स) सालाना आधार पर 3% बढ़ी, जो कि बाजार के अनुमानित 3.2% से कम रही। मजदूरी में धीमी रफ्तार ने फिलहाल मजदूरी आधारित महंगाई के दबाव को शांत किया है, जिससे नीति निर्माताओं को राहत मिली है लेकिन मुद्रा के लिए यह एक कमजोर संकेत बनकर उभरा है।
डॉलर इंडेक्स पर दबाव और फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों पर असर
निराशाजनक रोजगार परिदृश्य सामने आते ही अमेरिकी डॉलर इंडेक्स (DXY), जो छह प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले ग्रीनबैक के मूल्य का आकलन करता है, शुक्रवार को 0.11% गिरकर 101.90 के निकट कारोबार करता दिखा। श्रम बाजार में आई इस अप्रत्याशित सुस्ती ने फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति संबंधी प्राथमिकताओं पर निवेशकों के अनुमान को पूरी तरह से बदल दिया है। सीएमई फेडवॉच टूल के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में ब्याज दर में बढ़ोतरी की संभावना अब घटकर लगभग 22% रह गई है, जो महज एक सप्ताह पहले लगभग 64% पर चल रही थी। व्यापारी अब यह मानकर चल रहे हैं कि आर्थिक रफ्तार धीमी पड़ने के कारण केंद्रीय बैंक अपनी आक्रामक नीति को थामने के लिए बाध्य हो सकता है।
न्यूजीलैंड में 7 नवंबर के चुनाव और रिजर्व बैंक का दोहरा मैंडेट
न्यूजीलैंड डॉलर, जिसे बाजार में आमतौर पर कीवी के नाम से जाना जाता है, डॉलर की कमजोरी का लाभ तो उठा रहा है लेकिन इसकी उड़ान घरेलू राजनीतिक माहौल के चलते सीमित है। देश में 7 नवंबर को होने वाले आम चुनाव से पहले आए विभिन्न ओपिनियन पोल बेहद कड़े मुकाबले का संकेत दे रहे हैं। सर्वेक्षणों से यह अंदेशा गहरा गया है कि प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन की मौजूदा गठबंधन सरकार सत्ता गंवा सकती है। सरकार बदलने की स्थिति में देश की आर्थिक प्राथमिकताओं और नीतियों में कई बुनियादी बदलाव आने की संभावना है।
विशेष रूप से, न्यूजीलैंड की लेबर पार्टी ने यह स्पष्ट किया है कि यदि वह सत्ता में आती है तो रिजर्व बैंक ऑफ न्यूजीलैंड (RBNZ) के दोहरे मैंडेट को फिर से बहाल करेगी। क्रिस्टोफर लक्सन की सरकार ने केंद्रीय बैंक के अधिकार क्षेत्र को केवल मूल्य स्थिरता यानी महंगाई नियंत्रण पर केंद्रित कर दिया था। यदि केंद्रीय बैंक के मौद्रिक नीति ढांचे में फिर से रोजगार और मूल्य स्थिरता दोनों का संतुलन बनाने की शर्त जोड़ी जाती है, तो ब्याज दरों के रुख में बदलाव हो सकता है। मौद्रिक नीति ढांचे में इस संभावित फेरबदल की आशंका ने कीवी मुद्रा के लिए एक बड़ा अनिश्चितता का कारक पैदा कर दिया है। विभिन्न प्रमुख विदेशी मुद्राओं के मुकाबले प्रदर्शन की बात करें तो शुक्रवार को न्यूजीलैंड डॉलर का सबसे मजबूत प्रदर्शन कनाडाई डॉलर के सामने रहा।
अन्य प्रमुख मुद्राओं में हलचल: ऑस्ट्रेलियाई डॉलर और येन
एशियाई व्यापार सत्र के दौरान अन्य प्रमुख मुद्रा युग्मों में भी काफी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। कमजोर अमेरिकी पेरोल डेटा आने से पहले ही डॉलर से मुनाफावसूली का दौर शुरू हो गया था, जिससे डॉलर अपने 17 महीने के उच्चतम स्तर से पीछे हटा। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) उछलकर एशियाई सत्र में 0.6950 के स्तर की ओर बढ़ा। ऑस्ट्रेलियाई डॉलर को वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी और मुद्रास्फीति के जोखिमों के बीच नवंबर महीने में संभावित ब्याज दर वृद्धि की उम्मीदों से अतिरिक्त समर्थन मिला।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन (USD/JPY) 158.00 के स्तर के पास नई गति पाने के लिए संघर्षरत रहा। टोक्यो में उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के अनुमान से अधिक गर्म रहने और डॉलर में आई व्यापक कमजोरी के बाद यह जोड़ी अपने साप्ताहिक दायरे के ऊपरी सिरे से नीचे फिसल गई। प्रमुख निवेशक और कारोबारी अमेरिकी रोजगार रिपोर्ट के सटीक नतीजों के अनुसार अपनी स्थिति को पुनर्गठित करते देखे गए।
सोने की चाल, ऊर्जा संकट और वैश्विक बाजारों का रुख
अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में सोने की चाल भी काफी अनिश्चित रही। नॉनफॉर्म पेरोल रिपोर्ट के बाद सोने की कीमतों में एक बार तेजी आई, लेकिन पीली धातु 4,200 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस के पार अपनी तेजी को बरकरार रखने में नाकाम रही। शुक्रवार के अंत तक सोना फिसलकर 4,180 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर आ गया। डॉलर में बिकवाली के दबाव के बावजूद निवेशकों द्वारा आंकड़ों का गहराई से आकलन किए जाने के कारण कीमती धातु में अनिर्णय की स्थिति देखने को मिली।
ऊर्जा संकट और लगातार चढ़ती सरकारी बॉन्ड यील्ड आने वाले दिनों में बाजार की दिशा तय करने वाले मुख्य कारक बने रहेंगे। अक्टूबर में फेडरल रिजर्व की ब्याज दर वृद्धि के दांव कमजोर पड़ने के बाद अब बाजार प्रतिभागियों की नजरें आगामी फेड मिनट्स पर टिकी हैं। इसके अलावा, आने वाले दिनों में आईएसएम सर्विसेज पीएमआई और ट्रेजरी नीलामियों के आंकड़े भी महत्वपूर्ण होंगे। अंतरराष्ट्रीय पटल पर कनाडा के रोजगार आंकड़े, जापानी वेतन आंकड़े और यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB) के मिनट्स भी निवेशकों के रडार पर हैं। इस बीच, यूरो (EUR/USD) बुधवार को 1.1312 तक गिरने के बाद मई 2025 के बाद के अपने सबसे निचले स्तर पर दबाव में बना रहा, जो कि जनवरी के 1.2082 के शिखर से काफी नीचे है। यूरो में यह कमजोरी मजबूत डॉलर, भू-राजनीतिक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों से यूरोप के प्रभावित होने की चिंताओं को दर्शाती है।
क्रिप्टोकरेंसी बाजार में सुधार
पारंपरिक मुद्रा बाजारों में डॉलर की नरमी के बीच शुक्रवार को डिजिटल परिसंपत्तियों में व्यापक सुधार देखने को मिला। प्रमुख क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन बढ़कर 86,000 डॉलर के पार निकल गई, जिससे पूरे बाजार की धारणा को मजबूती मिली। एथेरियम ने भी अपने तेजी के रुख की पुष्टि की और यह चढ़कर 2,700 डॉलर के ऊपर कारोबार करने लगा, हालांकि 2,800 डॉलर का दायरा इसके लिए निकटतम प्रतिरोध बना हुआ है। वहीं, रिपल (XRP) 1.54 डॉलर के स्तर के आसपास स्थिर गति से कारोबार करता देखा गया।


















